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30/08/10

बच्चो के मुख से...

यहां मुनिख मै हमारे एक दोस्त है, उम्र मै तो हमारे पिता समान है, ओर हम उन की इज्जत भी वेसे ही करते है, लेकिन कभी अंकल नही कहा, नाम से ही बुलाते है, शनिवार को वो हम से मिलने आये, तो अपने पोते की बाते बता रहे थे, जो कि अभी दो साल का है, ओर सारी बात हिन्दी मै ही करता है, ओर वो इग्लेंड मै अपने मामी पापा  के संग रहता है, वेसे तो यहां रहने वाले भरतीया ६०% लोग अपने बच्चो के संग अग्रेजी मे या यहां कि लोकल भाषा मै ही बात करते है, लेकिन कुछ मेरे जेसे सिर फ़िरे है जो अपने बच्चो को हिन्दी मै ही बोलना सीखाते है, जिस से वो अग्रेजी ओर लोकल भाषा  तो स्कुल मै सीख लेते है....

अब बात करता हुं उस पोते कि, हमारे मित्र जो ८० साल से ऊपर है रोजाना अपने पोते को ले कर बाहर घुमने जाते थे, ओर पोते को भी एक दोस्त दादा के रुप मे मिल गया, सारा दिन दादा ओर दादी के संग रहता ओर उन के कान खाता, ओर खुब हिन्दी बोलता...... एक दिन दादा ओर पोता घुमने गये, अब पोता जिस भी चीज को दॆखता तो झट से दादा को उस चीज का नाम ले कर ऊंगली का इशारा कर देता, ओर दादा खुश होते ओर हां हां कर देते... थोडा आगे गये तो बहुत सुंदर सुंदर फ़ुल खिले थे, जब पोते की नजर फ़ुलो पर पडी तो पोता साहब चिल्ला पडे फ़ुल फ़ुल..... ओर उस तरफ़ ऊंगली का इशारा भी करे..... दादा जी ने जब फ़ुलो की तरफ़ देखा तो वहां उन फ़ुलो को एक अग्रेज पानी दे रहा था, जो बच्चे की आवाज सुन कर इन की तरफ़ देखने लगा... ओर बच्चा चिल्ला रहा है फ़ुल फ़ुल.... दादा जी जल्दी से वहां से खिसके, ओर हमे यह किस्सा बताया तो हम सब का हंस हंस कर बुरा हाल था....... बेचारा अग्रेज :)

01/01/09

अजी आज तो पहली जनवरी है ना

नम्स्कार, इन से मिलिये, यह मेरे बडे बेटे अंकुर भाटिया है, ओर यह 1 जनवरी 1991 को पेदा हुये थे, यानि आज इन का जन्म दिन है, ओर यह आज 18 वर्ष के हो गये है, करीब एक महीना पहले ही इस ने अपना ड्राईविंग लाईसेंस बनवाया है, खुद ही अपने भाई के साथ मिल कर एक साल तक हर शुकर बार को अखवार बेच कर पेसे कमाये ओर फ़िर उस से लाईसेंस के लिये पेसे इकट्टॆ किये, कुछ पेसे मेरे से लिये.
अभी यह ११ वीं मै पढ रहे है,आगे यह क्या बनाना चाहते है, यह इन की अपनी मर्जी है, भारत इन्हे भी बहुत सुंदर लगता है, कई बार आ चुके है यह भारत मै, ओर इन्हे भी हिन्दी, पंजाबी खुब बोलनी आती है, हिन्दी थोडी बहुत पढ भी लेते है, बाकी युरोपियन भाषा भी कई आती है.
आज आप सब के साथ ओर इस नये साल की खुशी मै इस के जन्म दिन की खुशी भी आप सब के साथ मना रहा हूं, बहुत अच्छा लग रहा है.

नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
धन्यवाद

28/12/08

आज 28 दिसम्बर है जी

नमस्कार आप सब को, आज मेरे बेटे अंकुश भाटिया का जन्म दिन है, यह २८ दिसम्बर १९९१ को जर्मनी मे पेदा हुये है, अभी यहां ११ वी कलास मै पढते है, बहुत नट खट है दो दिन पहले ही इन्होने अपना कार का लाईसेन्स बनबाया है,लाईसेंस के पेसे इन्होने हर शुक्रवार दो घन्टे अखबार बेच कर कमाये,ओर करीब एक साल तक अखबार बेची, अब इन्हे पेसो की जरुरत नही क्योकि अब पढाई बहुत करनी पडती है इस लिये इस महीने से अखवार से छुट्टी, इन के सपने बहुत सुंदर है, ओर यह हिन्दी, पंजाबी, अग्रेजी, इटालियन , लेटिन ओर जर्मन खुब बोलते है, हिन्दी थोडी बहुत पढ भी लेते है,

कई बार भारत आये, ओर इन्हे भारत बहुत सुंदर लगता है, बहुत शर्मिले है, इन की पसंद की हीरोईन रानी मुखर्जी है, हिन्दी फ़िल्मे देखने के शोकिन है, मदर इन्डिया, गगां यमुना,गाईड,दोस्ती, रेन कोट ओर बहुत सी नयी फ़िल्मे भी देखी है, लेकिन आज कल भारतीया फ़िल्म ऎसी बनती ही नही की मां बाप के साथ बेठ कर देख सके.

जब कभी भी भारत आये आप सब से इन्हे जरुर मिलवायेगे.यह पोस्ट पुरे 12.00 बजे सुबह यहां के लोकल समय के अनुसार प्रकाशित होगी, आप सब को इस सुंदर सुबह की बहुत बहुत बधाई
धन्यवाद

11/05/08

प्यासा कौया

बच्चो, अरे आ जायो आज तुम्हे एक बहुत ही अच्छी कहानी सुनाता हू, ओर उस से शिक्षा भी लेना. जब भी हम मुसिबत मे फ़सें तो अपने दिमाग से काम करो, ओर कोई भी युक्ति निकालो , भगवान के भरोसे मत बेठो, उस भगवान ने हमे दिमाग दिया हे, कि मुस्किल मे हम खुद सोचे, तो अब शुरु कर कहानी...
एक बार बहुत गर्मी पडी अरे बिलकुल आज की तरह से,ओर जगंल मे तो नल भी नही होता, ओर ना ही बोतल का पानी ही मिलता हे, वहां एक कोवा रहता था, उसे उस दिन बहुत प्यास लगी पानी पीने लगा तो क्य देखता हे. अरे इन बच्चो ने सारा पानी बहा दिया, अब बीबी को आवाज दी, लेकिन उस ने भी बताया आज तो सारा पानी बच्चो ने बहा दिया.

ओर अब कोये महाराज पानी की तलाश मे घर से निकले, कभी इधर देखते हुये कभी उधर देखते हुये उडे जा रहे हे ,ओर अब तो प्यास के मारे उडा भी नही जा रहा था, तभी उन की नजर एक बर्तन पर पडी, ओर बहुत खुश हुये नीचे उतरे, ओर बर्तन से पानी पीने लगे तो देखा, अरे पानी तो बहुत कम हे बर्तन मे, प्यास भी बहुत लगी हे, अब क्या करे, तभी उन्हे एक युक्ति सुझी, ओर आस पास से छोटे छोटे पत्थर ऊठा ऊठा कर बर्तन मे डलने लगे, ओर थोडी सी देर मे ही पानी उपर आ गया, ओर कोवे जी ने दिल भर के पानी पिया, ओर बाकी पानी बच्चो के लिये भी ले लिया,तो बच्चो समझ दारी से सभी काम हो जाते हे.

10/05/08

लालची कुत्ता

बच्चो, अरे कया कर रहे हो , आओ आज तुम्हे एक कहानी सुनाउ, यह कहानी एक ऎसे लालची की हे जो लालच मे पढ कर अपने हाथ की चीज भी खो देता हे... तो सुनाउ कहानी...
इस कहानी का नाम हे लालची कुत्ता पता हे ना लालच बुरी बला हे...
एक बार एक कुत्ते को कई दिनो तक कुछ भी खाने को नही मिला,बेचारे को बहुत भुख लगी थी, अब करे तो कया करे, तभी किसी ने उसे एक पुरी रोटी दे दी, रोटी ले कर कुत्ता जब खाने लगा तो उस ने देखा दुसरे कुते भी उस से रोटी छीनना चाहते हे, तो वह कोई सुरक्षित जगह देखने लगा, ओर वहां से चुपचाप खिसक गया, आगे जाने पर उसे एक लकडी का पुल नजर आया सकरा सा, उस कुते ने सोचा चलो दुसरी तरफ़ जा कर खाता हू इस रोटी को.
ओर बच्चो डरते डरते कुता उस सकरे पुल से दुसरी तरफ़ जाने के लिये चल पडा, तभी उस की नजर पानी मे पडी तो देखता हे एक कुता पुरी रोटी मुहं मे दबाये नीचे पानी मे खडा हे, समझ गये ना वह अपनी परछाई को ही दुसरा कुता समझ रहा था,अब कुते ने सोचा मे यह रोटी भी इस से छीन लु तो भरपेट खा लु गा, ओर वो रोटी छिननए के चक्कर मे भोकां ओर पानी मे उस कुते पर भोंका, कुते के मुहं खोलते ही उस की रोटी पानी मे गिर गई, ओर बह गई,ओर उस बेचारे को फ़िर से भुखे पेट ही सोना पडा. :) तभी तो कहते हे लालच बुरी बला हे

12/04/08

आठ सींगो वाला हिरन

अरे बच्चो लगता हे खुब मस्ती कर रहे हो,कया नेट पर भी आते हॊ, तो चलो तुम्हे एक कहानी सुनाता हुं,ध्यान से सुनना.
कहानी बहुत ही पुराने से पुराने जमाने की हे जब सब जीव साथ साथ रहते थे, यानि जानवर ओर आदमी ओर सभी बाते भी करते थे,तो सुनाऊ कहानी, तो सुनो ना.....
एक बार एक हिरनी के एक बहुत ,सुन्दर सा एक बच्चा आया,अब हिरण ओर हिरणी उसे बहुत प्यार करते थे,लेकिन यह कया उसके आठ सींग थे, फ़िर एक दिन वो स्कुल गया,लेकिन जाते वक्त तो बहुत खुश था, पर घर वापिस आते ही रोने लगा,उसकी ममी ने जब पुछा तो फ़िर से रोने लगा ओर बोला मे कल से स्कुल नही जाऊगा, अरे अरे मेरा राजा बेटा स्कुल क्यओ नही जाये गा ममी ने पुछां तो वह वोला सभी मुझे आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण कहते हे
तो मां बोली इस मे कया बडी बात हे जाओ अपने बढई अकंल के पास ओर एक सींग कटवा लो. ओर वो भागा बढई अकंल के पास गया ओर बोला अकंल अकंल मेरा एक सींग काट दो,मुझे स्कुल मे दुसरे साथी आठ सींग वाला हिरण कह कर चिढाते हे, ओर बढई अकंल ने उस का एक सींग काट दिया,दुसरे दिन फ़िर हिरण का बच्चा रोता रोता घर आया तो मा ने फ़िर पुछा आज कया हुया, बच्चा रोते रोते बोला सभी बच्चे मुझे छेडते हे,
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
मां ने फ़िर से उसे बढई अकंल के घर भेज दिया ओर एक सींग ओर कट्वा दिया,तीसरे दिन फ़िर बच्चा रोता रोता घर आया, मां ने पुछा अब कया हुया,बच्चा रोते रोते बोला सभी बच्चे मुझे छेडते हे,ओर बच्चे ने एक सीं ओर कट्वा लिया,
धीरे धीरे बच्चे ने सारे सींग कटवा लिये,ओर वो हमारी, तुम्हारी तरह से बन गया,ओर आज मां ने उसे तेयार करके सिर मे कंघी करके स्कुल भेजा.... आज भी हिरण बाबा फ़िर रोते रोते घर आये मां ने पुछा बेटा अब कया हुया, तो बच्चा बोला अब सभी दुसरे बच्चे मुझे बिना सींगो वाला हिरण बिना सींगो वाला हिरण कह कर तगं करते हे,मुझे तो मेरे सींग वापिस चाहिये,मां ने उसे फ़िर बढई अकंल के पास भेज दिया, बच्चा वहा जाकर बढई से बोला अकंल अकंल मेरे सींग फ़िर से लगा दो,बढई बोला बेटा जो काट दिया उसे मे केसे वापिस लगा दु,अब बच्चा जिद करने लगा तो बढई अकंल ने उसे डांट कर भगा दिया, बच्चे को बहुत गुस्सा आया,ओर गुस्से मे बढई अकंल से बोला पता हे कया वोला ?
बढई अकल बढई अकंल मेरे सींग जोड दो नही तो मे कुल्हाडी ले जाउ गा तुम्हारी, ओर वो सचमुच मे बढई की कुल्हाडी ले कर भाग गया, उसे रास्ते मे एक लकडहारा मिला उस के पास कुल्हाडी नही थी,ओर वो हाथो से लकडिया तोड रहा था,तो हिरण के बच्चे को उस पर तरस आया ओर हिरण का बच्चा वोला अकंल अकंल तुम हाथ से लकडिया क्यो तोड रहे हो यह लो मेरी कुलहाडी इस से काटो,जब लकडहारा उस से लकडिया काटने लगा तो वो कुल्हाडी झट से टुट गई, ओर यह देख कर हिरण का बच्चा बोला दो मेरी कुल्हाडी, अब भला लकडहारा कहां से देता कुलहाडी,तो हिरण का बच्चा गुस्से मे उस की लकडिया ले कर भाग गया,आगे गया तो कया देखता हे,एक लडकी भुखी बेठी हे बच्चे ने पुछा तुम खाना क्यो नही बनाती तो उस ने कहा मेरे पास लकडिया नही हे, तो हिरण के बच्चे ने उसे लकडिया दे दी, ओर लडकी ने झट पट आग जला कर खाना बना लिया.
अब शरारती हिरण बोला ऎ लडकी मेरी लकडिया वपिस करो,भला जलने के बाद लकडिया कहां से आती,तो हिरण उस का खाना ले कर भाग गया, आगे जा कर हिरण ने देखा,एक बर्तन बेचने बाला बर्तन ले कर बेठा हे ओर बहुत उदास था, हिरण के बच्चे ने पुछां अकंल उदास क्यो बेठे हो,तो बर्तन वाला बोला आज कल लोग मेरे बर्तन नही खरीदते, ओर जिस के कारण मेरे पास पेसे नही, ओर बिना पेसे के खाना नही मिलता, तो मेने ३,४ दिन से कुछ नही खाया,हिरण के बच्चे ने उसे खाना दे दिया बर्तन बाले ने सारा खाना खा लिया तो हिरण का बच्चा बोला वपिस करो मेरा खाना वर्ना मे तुम्हारा बर्तन ले कर भाग जऊगा ओर झट से वो बर्तन वाले का बर्तन ले कर भाग गया,
आगे जाने पर उसे एक ग्वाला मिला, जो अपनी गाय का दुध सीधा अपने मुहं मे फ़िर बच्चो के मुहं मे दोह रहा था,हिरण के बच्चे ने उसे अपना बर्तन दे दिया,अब गाय ने टागं मार कर वो बर्तन तोड दिया,ओर फ़िर हिरण उस की गाय ले कर भाग गया,आगे एक किसान दुखी बेठा था, पुछने पर उस ने बताया उस का एक बेल मर गया हे, तो हिरण के बच्चे ने उसे हल चलाने के लिये गाये दे दी,अब गाय तो नाजुक होती हे ना तो वो जल्द ही मर गई,अब हिरण किसन से बोला दो मेरी गाय नही तो मे तेरी बुआ को ले कर भागु गा, किसान वोला अब मे कहां से लाउ तेरी गाय तो हिरण उस की बुआ को ले कर भागा, थोडी दुरी पर एक मदारी तमाशा दिखा रहा था, ओर एक रस्सी पर तीन साल का लडका चल रहा था,हिरण ने उसे गुस्से से कहा तुम्हे शर्म नही आती इस छोटे बच्चे को रस्सी पर चलवाते हुये,मदारी वोला तो कया तेरी बुआ चले गी रस्सी पर हिरण बोला हां,ओर मदारी ने बच्चे को रस्सी से उतार दिया ओर किसान की बुआ को रस्सी पर चढा दिया इतन ऊपर से नीचे देख के बुआ को चक्कर आया ओर वो गिर कर मर गई,अब तो हिरण को बहुत गुस्सा आया बोला लाओ मेरी बुआ, अब मदारी कहा से लाये बुआ, तो हिरण का बच्चा उस का तबला ले कर भागा ओर फ़िर घर आ कर खुब जोर जोर से तबला बजाये ओर नाचे, दुसरे दिन स्कुल मे तबला ले गया ओर सभी बच्चे तबले की धुन पर नाचने लगे,त ता तेयिया ता ता तेयिआ, ओर फ़िर सब हिरण के बच्चे के दोस्त बन गये.
समाप्त

09/04/08

ते तोली तो तोली आप तोनो त्यो तोली

बच्चो नमस्कार,कया हाल हे,पढाई केसी चल रही हे, रोजाना अगर थोडा थोडा भी ध्यान से पढो गे तो तुम्हे मुस्किल नही होगी अच्छे नम्बर मे पास होने के लिये, चलो अब कहानी का समय हो गया तो सुनो एक कहानी...

एक सेठ था, बहुत अकड वाला, लोगो का खुब खुन चुसता, यानि सब को लुटाता था,ज्यादा पेसा लेना समान कम देना, अपने नोकरो को भी वेतन कम देता ओर काम खुब लेता,अब बेचारे लोग भी कया करते सब कुछ जानते हुये भी मुसिबत मे इस सेठ के फ़सं जाते,कहते हे ना भगवान के घर देर हे अंधेर नही,सेठ के पास पेसा तो बहुत था, लेकिन उसे एक दुख भी था, जिसका अभी किसी को पता नही था, इस सेठ ने तीन बार शादी की,लेकिन बेचारे की किस्मत उस की तीनो बीबीया तोतली थी,जिस के कारण सेठ लोगो मे कम ही परिवार के साथ मिलता था,

एक दिन किसी कर्ज दार ने सेठ जी से कहा सेठ जी एक लडकी हे बहुत ही सुन्दर, रुप की रानी हे,स्वभाव भी बहुत अच्छा हे, बस थोडे गरीब हे, आप चाहॊ तो आप की बात चलाये,अब सेठ तो अपनी तीन तीन तोतलियो से तगं था, कुछ सोच कर बोला,हां बात चलाओ, लेकिन पहले मे देखुगां, कर्जदार ने कहा सेठ जी मुझे कया मिले गा, तो सेठ ने कहा आज से तुमहारा कर्ज माफ़,

दुसरे दिन वो आदमी सेठ को एक घर मे लेगया,ओर घर वालो ने सेठ जी की बहुत सेवा की, फ़िर सॆठ जी ने लडकी देखी,ओर सच मे लडकी खुब सुरत थी, ओर शर्मिली भी, सेठ जी ने कई सवाल उस से पुछे लेकिन हर बार लडकी शर्म के मारे चुप रही,ओर सेठ जी ने जल्द ही उस से शादी कर ली, लेकिन शादी के बाद भी लडकी नही बोली, सेठ ने खुब कोशिश की लेकिन लडकी नही बोली ( लडकी तो तोतली थी ओर उस के मां बाप ने उसे समझा दिया था ) अब सेठ ने सोचा यह तो गुंगी हे,तभी वहा से एक चुहिया नई बीबी पर कही से आ कर गिरी ओर वो डर के मारे बोली बततो बततो तुईया बततओ बततो तुईया, ओर सेठ उस की आवाज सुन कर अपने भाग्या को कोसने लगा की एक ओर तोतली पल्ले पड गई,उस सेठ के सारे सपने चकनाचुर हो गये, सेठ ने सोचा था नई बीबी से मिठ्ठी मिठ्ठी बाते करुगा लेकिन यह भी तोतली हे राम, लेकिन सेठ ने यह बात सब से चुपा कर रखी थी,

एक दिन सेठ जी के घर पर उस का जिगरी दोस्त अपनी बीबी के साथ आया,दो दिन के बाद बोला सेठ तुम्हारी चारो बीबी कया तोतली हे, सेठ ने कहा नही तो, लेकिन तुम ने यह क्यो पुछा, ( सेठ ने अपनी चारो बीबीयो को पहले ही मना कर दिया था की जब तक मेरा दोस्त ओर उस की बीबी यहां रहे मुहं मत खोलना, वरना..... लेकिन सेठ का दोस्त ओर उस की बीबी भी बहुत चालाक थे, सो उन्होने सोचा जाने से पहले सेठ की बीबीयो का राज जरुर जानाना चहिये,

सभी रात का खाना खा रहे थे, ओर सेठ का दोस्त बहुत अच्छी अच्छी बाते ओर चुटकले सुना रहा था, लेकिन चारो बीबी चुपचाप बेठी उस की बाते सुनती ओर चुप रहती, तभी दोस्त की बीबी के दिमाग मे एक तरकीब आई, उस ने कहा आज तो मजा आगया कितनी अच्छी पुरियां हे, अरे यह किसने तली हे, अब पुरियो की तरीफ़ सुन कर पहली बीबी खुश हो गई ओर पति का वचन भुल कर बोली * दे तुरिया तेने तली हे, (यह पुरिया मेने तली हे )उसे बोलता देख कर दुसरी बीबी झट से बोली तेरे तो तना किया था तिर तु त्यो तोली (तेरे को मना किया था फ़िर तु क्यो बोली ) अब तीसरी बीबी को बहुत गुस्सा आया, कि पति के मना करने पर भी यह दोनो बोली, ओर अपने को सयाना समझ कर वो भी झट से दोनो को गुस्से मे बोली .. ते तोली तो तोली आप तोनो त्यो तोली ( यह बोली तो बोली आप दोनो क्यओ बोली,

अब चोथी बीबी मन ही मन मे सोचने लगी यह तीनॊ तो महामुर्ख हे मना करने पर भी बोली, अब तो सेठ जी के दोस्त कॊ इन तीनो का पता चल गया यह तीनो तोतली हे,ओर मन ही मन बहुत खुश हुई ओर इसी खुशी मे उस ने कहा मे तो तोली ताली ही नही(मे तो बोली चाली ही नही ) ओर उधर सेठ जी ओर उस के दोस्त ओर उस की बीबी खुब खिलखिला कर हसने लगे.

तमात्प

05/04/08

जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन

अरे बच्चो आओ, ओर सुनो एक कहानी बडी पुरानी,कहानी का नाम हे जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन ?
बच्चो पंडे कोन होते हे,आप को मालुम हे कया, अरे पण्डे यार,पंडित जी को बोलते हे ना,ओर यह कहानी दो पण्डो (पंडितो ) की हे. अब मेरी कहानी शुरु होती हे,अरे मेरी नही मेरे दुवारा पण्डो की कहानी.
जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन
एक बार एक गावं मे दो पण्डे ( दोनो भाई थे) अपने यजमान के घर गये,वहां उन की खुब सेवा हुई,दोनो ने खुब भर पेट अच्छा अच्छा खाना खाया,ओर रात को यजमान के घर पर ही सोगये, रात को सोने से पहले यजमान ने दोनो को दुध के दो बडे बडे गिलास पीने के लिये दिये ओर साथ मे एक प्लेट मे मोतीचुर के लड्डु खाने को भी दिये,अब दोनो भाई दुध पीकर लड्डु खाने लगे देखा तो प्लेट मे पांच लड्डु थे, बडा भाई बोला मे तीन लड्डु खाउ गा,छोटा भाई बोला नही मे खाऊ गा तीन लड्डु,अब दोनो मे वहस शुरु हो गई,फ़िर दोनो सोचने लगे केसे बांटे, तभी बडे भाई ने कहा जो भी हम मे से पहले बोलेगा वो दो लड्डु खाये गा, जो बाद मे बोला वो तीन लड्डु खाये गा, दोनो भाईयो को यह बात अच्छी लगी ओर दोनो एक दम से चुप हो गये.ओर वेसे ही रात को सोगये.
दुसरे दिन सुबह सुबह यजमान उस कमरे मे आया देखा दोनो भाई चुपचाप लेटे हे,बुलाने पर बोले भी नही, हिल जुल भी नही रहे,यजमान ने बहुत बुलाया लेकिन वो कुछ भी नही कर रहे थे,बच्चो अब तो यजमान बहुत डर गया ओर भागा भागा गया घर पर अपने भाईयो को ओर लडको को बुला लाया सभी ने उन्हे देखा बुलाया, लेकिन दोनो भाई अब ना तो बोले ना ही हिले ढुले,बाप रे यह सब देख कर सभी लोग डर गये,सोचने लगे कही इनको हमारे घर मे सांप ने तो नही काट लिया, या जो दुध रात को दिया था उस मे कही जहर ना हो, अब सभी सोचने लगे अब इन का कया करे,अगर सब को पता चल गया तो हमारी बदनामी होगी ओर जेल भी जाना पडे गा.
घर वालो ने अपने साथ गाव बालो को मिला कर बात की कि यह दोनो पण्डे पता नही केसे मर गये ओर हमारी इज्जत के साथ गाव की इज्जत का सवाल हे, हम सभी मिल कर इन हे टिकाने लगा देते हे, यानि इन्हे जला देते हे,अब यह सारी बाते दोनो भाई भी सुन रहे थे,उन्होने मन ही मन सोचा यह कया पंगा पड गया, फ़िर एक भाई ने सोचा मे क्यो बोलु, अगर मे बोला तो दुसरे को तीन लड्डु मिल जाये गे ओर गाव वालो ने दोनो भाईयो को दो अरथियो पर कस के बाधं दिया की कही गिर ना जाये,ओर शमशान घाट पर आगऎ, दोनो भाई फ़िर भी नही बोले क्यो की दोनो को ज्यादा लड्डु जो खाने थे,
अब गाव वालो ने रोते रोते उन की चिता तेयार कर दी, फ़िर चिता मे नीचे घास फ़ुस भी रख दिया,बडे भाई ने सोचा जल गया तो जल जऊ लेकिन मे दो लड्डु नही खाउगा,
अब सभी ने रोते रोते चिता को आग दे दी,ओर आग धीरे धीरे फ़ेलने लगी, पांच लोग चिता के पास ठहर गये बाकी लोग स्नान करने नदी की ओर चले गये,पांचो चिता से थोडी दुर बेठे थे,अब आग थोडी ज्यादा हुई तो बडे भाई ने सोचा चहे मर जाऊ मे कम क्यो खाऊ, तभी छोटे भाई को थोडा सेक लगा, ओर वो सोचने लगा अरे एक लड्डु ज्यादा खाने के लिये मे तो अपनी जान ही गवां रहा हू, ओर चिता से ऊठा ओर बोला भागो भागो मेरे दो ओर बडे भईया आप के तीन, अब छोटे भाई की आवाज सुन कर बडा भाई भी ऊठ गया उधर उन पांचॊ ने यह सुना की मेरे दो बडे भईया आप के तीन, चिता पर देखा तो उन्होने सोचा यह तो दोनो के भुत हे,वो पांचो शोर मचा कर गाव की ओर भागे बाकी गाव वाले भी भुत भुत कहते हुये वहा से भागे, पीछे पीछे दोनो भाई भी भागे,बच्चो कितना मजा आया होगा जो भी इन्हे देख रहा होगा, फ़िर दोनो भाई यजमान के घर आ कर लड्डु खाने लगे, उस के बाद कया हुया मुझे नही मालुम.बच्चो केसी लगी यह कहानी बताना.
समाप्त

23/03/08

मुर्ख गधा

बच्चो आओ आज एक बहुत ही सुन्दर कहानी सुनो, ओए इस से कुछ सीख भी लेना.
मुर्ख गधा
अर्जुन पुर गांव मे एक कुम्हार रहता था,वो कुम्हार रोजाना अपने गधे पर मिट्टी के पक्के बर्तन ले कर शहर मे बेचने जाता था, रास्ते मे एक महल भी पडता था,गधे ने कई बार कुम्हार को महल के बारे बाते करते सुना था,ओर अब गधा भी मन ही मन सोचता काश मे राजा का गधा होता तो कितना अच्छा होता,बर्तनो की जगह मेरे ऊपर हीरे, ओर मोती लादे जाते,जुन का महीना था उस दिन गर्मी भी बहुत थी,सुरज भी चमक रहा था,चलते चलते दोपहर होगई जिस से गधे का बुरा हाल था, एक तो इतनी गर्मी,उपर से बर्तनो का बोझ, पर करे भी तो कया करे, बस मन ही मन सोचने लगा, मेरी जिन्दगी भी कितनी बेकार हे,सारा दिन बस बर्तन ढोने के सिवा कोई ओर काम नही, तभी अचानक गधे कॊ कोयल की आवाज सुनाई दी कूउउ कूउउउ, गधे ने देखा, ओर सोचने लगा कोयल कितनी भाग्यशाली हे, कभी इस पेड पर कभी उस पेड पर आजाद घुमती ओर उडती हे,अपनी अपनी किस्मत,अब कुम्हार अपनी मजिल पर पहुच गया तो उस ने बर्तन उतार कर गधे को एक खुले मेदान मे छोड दिया, ताकि वो थोडी बहुत घास चर ले,
अभी गधा बेमन से घास चरने ही लगा था, की उसे आवाज आई,बचाओ बचाओ, कोई मेरी मदद करो, बचाओ....गधे ने इधर उधर देखा, उसे कोई भी दिखाई नही दिया, तभी गधे की नजर नीचे एक गढे मे गई, तो देखा वहां एक जख्मी तोता पडा हे,नजरे मिलते ही तोते ने कहां गधे महाराज मुझे बचालो, मे रानी का तोता हू, कुछ तोतो के कहने से मे महल से भाग कर उन के साथ यहां आया,तो उन् तोतो ने मुझे चॊंचे मार मार कर मेरा यह हाल कर दिया, अब अगर तुमने मेरी मदद नही की तो कोई कुत्ता या बिल्ली मुझे खा जाये गे,तुम्हारा बहुत उपकार होगा, ओर मे जिन्दगी भर तुम्हारा उपकार नही भुलु गा, मुझे यहां से निकाल के महल मे पहुचा दो,गधे ने ध्यान से देखा तोते के सारे पर टुट गये थे, ओर खुन भी निकल रहा था,फ़िर एक सुनहरी मोका भी मिल रहा था महल मे जाने का, सो गधे ने तोते को अपने उपर बिठा लिया ओर चल पडा महल की ओर,लेकिन पीठ से तोता बार बार फ़िसल जाता था, फ़िर तोते ने उसे अपने कान मे बिठा लिया, ओर महल के दरवाजे मे जा कर गधा जोर जोर से बोला भाई दरवाजा खोलो,लेकिन वहां आदमी तो गधे की ढेचू ढेचू को नही समझते थे, फ़िर कया गधे को मार मर कर वहां से भगा दिया,गधा बहुत उदास हुया,
तभी तोता बोला गधे जी इस बार आप मत बोलना बस सर हिलाना, चलो एक बार मेरे लिये चलॊ, गधे को तो जरुर महल देखना था, सो फ़िर गया महल के दरवाजे पर ओर पेर से दरवाजा खटखटाया, तभी सिपाही ने गधे को देखा, ओर फ़िर से मारने लगा तो कान मे बेठा तोता बोला भाई ठहरो मुझे राजा से मिलना हे,सिपाही ने पहली बार एक गधे को बोलते देखा ( सिपाही ने सोचा गधा बोल रहा हे )तो बहुत हेरान परेशान, उस ने राजा को खबर पहुचाई, ओर तुरन्त गधे को राजा के पास लाया गया, राजा के पास जा कर गधा झुका तो कान मे बेठा तोता बोला महाराज प्रणाम,मुझे कोई काम दे दे,राजा रानी बहुत हेरान हुये एक बोलते गधे को देख कर,उस दिन राजा रानी ने बहुत बाते की गधे से, फ़िर शाम कॊ गधे को बहुत ही सुन्दर खाना मिला,हरी मुलायम घास साफ़ सुथारा पानी,गधे ने तो कभी इतना खाया भी नही था जितना आज का गया, ओर सोने के लिये बहुत ही सुन्दर स्थान ओर इतनी गरमी मे भी ठण्डा, सुबह सुबह तोता बोला भाई आज मुझे रानी के पास जाने दो,तो गधा बोला २,३ दिन मुझे ओर रहने दो फ़िर मेरा दिल भी भर जाये गा महल से तब तुम चले जाना, तोता बोला ठीक हे, दो दिन यु ही बीत गये,आज तीसरा दिन था,राजा मे अपने दोस्त राजाओ को बोलने बाला गधा दिखाने के बाहने बुलाया था, दरवार सजा हुया था,सभी लोगो ने गधे से कई सवाल पुछे, ओर कान मे बेठा तोता उन के जबाब दे देता, सभी सोचते गधा बोल रहा हे,आज राजा भी बहुत खुश था, ओर गधा तो फ़ुला ना समा रहा था, तभी किसी ने कहा कया गधा गीत भी गा सकता हे,यह बात सुनते ही गधे को जॊश आ गया, तोता रोकता ही रह गया, ओर गधा अपनी मिठ्ठी आवाज मे रेंगने लगा ढे....चू ढे...चू इतनी जोर से गाया की तोता भी उस के कान्से गिर गया,ओर दरवारियो ने राजओ ने अपने अपने कान बन्द कर लिये, ओर गधा अपनी मस्ती गाता रहा,अब अक सब लोगो को पता चल गया कया माजरा हे . फ़िर उस गधे को मार मार कर महल से बहिर किया. बेचारा गधा,

21/03/08

होलिका दहन (बच्चो आओ) २

क्रमश से आगे...
होलिका दहन
अब प्रहलाद घर आ कर राम राम का नाम जपने लगा, क्योकि उस बच्चे ने जो देखा वो अद्भुत था,इतनी आग से बिल्ली के बच्चो का बचना ना मुम्किन था, सो अब वो हर समय राम राम जपने लगा, सब ने रोका, लेकिन राज कुमार नहि रुका राम का नाम लेने से, मां ने बहुत समझाया, लेकिन बच्चे पर कोई असर नही हुया, जब इस बात का पता हिरण्यकश्यप को चला तो वो खुद अपने इकलोते बेटे को समझाने आया, फ़िर हिरण्यकश्यप ने सोचा बेटा पागल हो गया हे उसे हकीम के पास इलाज के लिये भी भेजा, लेकिन प्रहलाद पर सिर्फ़ राम राम की भक्ति का ही भुत सवार था, फ़िर हिरण्यकश्यप नेउसे प्यार से समझाया धमकया, लेकिन कोई असर नही, अब प्रहलाद को देख कर ओर भी लोग राम का नाम्लेने लगे, एक तरह से बिद्रोह सा होने लगा,
एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कहा की आज के बाद अगर तुमने राम का नाम जुबान पर लिया तो मे तुमहे अभी भुखे शेर के सामने डाल दुगां, बताओ ऎसा कया हे उस भगवान मे,तो प्रहलाद ने कहा आप जीवन लेना जानते हॊ देना नही, बात सुन कर बाप को क्रोध आगया, उस ने सिपहियो को हुकम दिया इसे अभी भुखे शेर के समाने डाल दो शेर कई दिनो से भुखा था,जब प्रहलाद को शेर के सामने लेजाया गया तो शेर ने प्रहलाद पर हमला करने के स्थान पर उस के पेर चुमने लगा, ओर अपनी पीट पर प्रहलद कॊ बिठा कर घुमने लगा,हिरण्यकश्यप ने उसे पहाड की चोटी से नीचे फ़िक्वाया, उबलते पानी मे डलवाया, खोलते तेल मे फ़ेका, हाथी के पांव तले कुचना चाहा, लेकिन प्रहलाद को कुछ भी ना हुया.
प्रहलाद राम राम की धुन मे मगन रहता, ओर धीरे धीरे उस के साथ ओर लोग भी आने लगे, लेकिन यह सब हिरण्यकश्यप को अच्छा ना लगता, उसे अपनी हार मासुस होती, काफ़ी सोच विचार के बाद हिरण्यकश्यप के दिमाग मे एक सुन्दर आईडिया आया.
हिरण्यकश्यप की एक बहिन थी होलिका जो बहुत ही घमंडी थी भाई के राजा होने से उसे किसी का भी डर नही था, लोगो को तगं करना, मरना, मजाक उडाना उस का काम था लोग भी उस से बहुत तगं थे, ओर हा होलिका के पास एक शाल था जिसे ओड कर आग उस का ( जिस ने भी शाल ओडा हे )कुछ नही बिगाड सकती थी, अब एक दिन हिरण्यकश्यप ने होलिका को अपने महल मे बुलाया ओर सारी बात बातई, होलिका सारी बात सुन कर भाई के कहे अनुसार काम करने को तेयार हो गई,
आज सुबह से ही पुरे राज्य मे ढिढोरा पीट कर लोगो को लोगो को हुकम दिया गया की आज शाम को एक राम भगत को होलिका की गोद मे बिठा कर आग के हवाले किया जाये गा ताकि शेष लोगो को भी पता लगे ,इस देश मे राम का नाम लेने वाले का कया हाल होता हे, उस मेदान मे जगंलो से बहुत सारी लकडिया ला कर इकट्टी की गई थी, निश्चित समय पर उस मे आग लगा दी गई, ओर होलिका ने अपना शाल ओड् कर प्रहलाद को गोदी मे उठाये आग के बीच चली गई,तभी एक हवा का झोंका आया ओर शाल प्रहलाद पर पलट गई ओर होलिका उस आग मे जल मरी, हिरण्यकश्यप को अब बहुत ही गुस्सा आया ओर उसने उसी आग से एक बहुत ही बडा लोहे का खंम्बा गरम करवाया जब खंम्बा लाल रंग को हो गया तो सिपहियो को हुकम दिया प्रहलाद को इस खंम्बे से बांध दो, ओर खुद सब कुछ देखने के लिये खंम्बे के पास आ गया,तभी खंम्बा फ़टा ओर उस मे से एक ऎसा आदमी निकला जिसका सिर शेर की तरह से था, हाथ पांवो भी जान्वरो की तरह सी थे, उस ने हिरण्यकश्यप को उठा कर अपने घुटने पर रखा ओर बोला देखो हिरण्यकश्यप न तुम्हे जानवर मार रहा हे ना आदमी, ना तुम रात मे मर रहे हो, ना ही दिन मे अभी ना शाम हे ना सवेर आधा सुर्या डुबा हे, इतना कह कर उस जानवर रुपी ने हिरण्यकश्यप के टुकडे टुकडे कर दिये, उस निर्दयी राजा के मरने ओर होलिका के जलजाने पर सभी बहौत खुश हुये,बस तभी से एक दिन पहले होलिका दहन होता हे आदमी अपने अन्दर की सभी बुराईयो को इस अगनि मे डाल देता हे ( काश ऎसा ही होता ) फ़िर दुसरे दिन सभी दुशमनी भुल कर आपस मे खेलते हे, रंगो से ,एक दुसरे को उपहार देते हे शुभकामन्ये देते हे.आप सब को भी होली की शुभकामन्ये.
ओर भी बहुत सी कहानिया होली से जुडी हे, लेकिन हमे इन कहानियो से शिक्षा लेनी चहिये,
हम कितने भी अमीर बन जाये, कितने भी उचे पद पर पहुच जाये हमे मनावता को नही भुलना चहिये, हम मे अकड नही आनी चहिये, हम सब उस पर्म पिता के बच्चे हे, सब बराबर हे, फ़िर मिले गे

होलिका दहन (बच्चो आओ) १

होलिका दहन
बहुत ही छोटा था, तब यह कहानी सुनी थी,उस समय तो छोटा था सो इस कहानी को भी पुरी तरह से समझ नही सका था, लेकिन अब कुछ कुछ समझने लगा हु, कल बच्चो ने पुछा तो उन्हें होली दहन (दुलहण्डी ) ओर होली मे अन्तर बताया, सोचा वही कहानी यहा भी लिख दु, शायाद आप कॊ ओर आप के बच्चो को अच्छी लगे.
अबहुत समय पहले एक राजा था, नाम उस का हिरण्यकश्यप वो भगवान का बहुत बडा भगत था, उसने बहुत ही कठोर भक्ति की जिस से भगवान बहुत खुश हुये,ओर आप प्रगट हुये, हिरण्यकश्यप को दर्शन दिया ओर बोले कोई भी वरदान मांगो, हिरण्यकश्यप ने भगवान से कहा मे अमर हो जाऊ, मुझे पुरे बर्ह्माण्ड मे कोई भी आदमी, देवता, पशु पक्षी,जीव जन्तु,ओर जानवर ना मार सके, मेरी मोत ना दिन मे हो ना रात मे हो, ना सुबह हो, ना शाम को हो,भगवान ने हिरण्यकश्यप को वरदान दिया ओर चले गये,वरदान मिलते ही हिरण्यकश्यप मे घमन्ड आ गया,ओर धीरे धीरे वो भगवान को भी अपने से तुच्छ समझने लगा,अपने राज्या मे लोगो को तंग करने लगा, लोगो की लडकियो, महिलओ को उठवाने लगा, पुरे राज्या मे घोषाणा करवादी कोई भी भगवान को नही पुजे गा, मन्दिरो से भगवान की मुरतिया हटवा कर अपनी मुरतिया रखवा दी,ओर सब को बताया आज से मे ही भगवान हु, सब मेरी पुजा करे, पुरे राज्या मे हएहएकार मच गई, अब जेसा राजा वेसे ही उस के सिपाही सिपहियो ने भी खुब अन्धेर मचा दिया,पुरे राज्या मे हाहा कार मची ( जेसे अब भारत मे हे ) लोगो के पास खाने के लाले पड गये, जये तो कहा जये, कुछ बोले तो गुण्डे सिपाही मारे, राजा के पास जाये तो भी सुनवाई नही,
लोग डर के मारे अब भगवान के स्थान पर हिरण्यकश्प का नाम ले कर पुजा करे,अब भगवान देखा हिरण्यकश्यप ने तो मेरे वर का गलत उपयोग किया हे, उसे जो वरदान दिया, जो शक्ति दी उसने उस का गलत उपयोग किया हे,लेकिन भगवान अपना दिया वचन भी वपिस नही ले सकते, तभी हिरण्यकश्यप के घर मे एक सुन्दर बच्चे ने जन्म लिया, उस का नाम प्रलहाद रखा गया, प्रल्हाद बचपन से ही बहुत बहदुर था, लेकिन बहुत ही गंभीर, ओर शांत चित, एक दिन बालक प्रलहाद घुमते घुमते ऎसी जगह पहुचा जहां एक गरीब कुमहार अपने घडॊ को पकाने के लिये तनंदुर मे रखा कर आग दे रहा था, जब बच्चे ने पुछा आप कया कर रहे हे तो कुम्हार ने उसे सब समझाया इस से घडे पक जाते हे, तभी झोपडे के अन्दर से कुम्हार की बीबी आई ओर तनंदुर मे धुयां देख कर चिल्लाई अरे ठहरो ठहरो, एक घडे मे हमारी बिल्ली ने बच्चे दिये थे, ओर वो घडा भी तंदुर मे ही था,कुम्हार ने कहा अब बहुत देर हो चुकी हे, अब तो तंदुर पुरी तरह से आग पकड चुका हे, अब तो उन्हे भगवान ही बचा सकता हे, यह बात सुन कर बच्चे ने पुछा यह भगवान कोन हे, अपनी गलती का अह्सास अब कुम्हार कॊ हुया, लेकिन बच्चा अपनी जिद पर अडा रहा,ओर दुसरे दिन प्रलहाद को आने को कह कर बात टाल दी,सारी रात ना तो प्रलहाद ही सोया ओर ना ही कुम्हार ओर उस की बीबी , प्रलहाद कॊ बिल्ली के बच्चो को बचाने बाले भगवान के बारे जनाने कि उतुसुकता थी, ओर कुम्हार ओर उस की बीबी को बिल्ली के बच्चो के साथ साथ प्रलहाद को भगवान के बारे कया बताये गे इस का डर था,
दुसरे दिन राजकुमार सही समय पर कुम्हार के घर पहुच गया, देखा कुम्हार तंदुर से अपने पके हुये लाल लाल घडे निकाल रहा हे, लेकिन अभी भी घडे गर्म थे इस लिये एक कपडे की सहायता से निकाल रहा था, साथ मे उस की बीबी दोनो हाथ जोड कर मन ही मन कुछ बुदबुदा रही थी, ठीक बीच मे एक घडा जब कुम्हार ने निकाला तो उस मे से मियाउ मियाउ की आवाज आ रही थी,कुम्हार,उस की बीबी ओर राज कुमार प्रहलाद की आंखे खुली रह गई,वो घडा तो पुरा पक्का था लेकिन बिल्ली के बच्चे विलकुल ठीक थे, फ़िर प्रहलाद ने भगवान के बारे पुछा तो कुम्हार ने बिना डर के उसे सारी बात समझा दी ओर भगवान के बारे बताया, प्रहलाद ने कहा लेकिन भगवान तो मेरे पिता जी हे, कुम्हार ने कहा नही, भगवान से अमर होने का वरदान पा कर तुम्हारे पिता मे अंहकार आ गया हे, वो मोत तो दे सकते हे, लेकिन जीवन किसी को नही दे सकते, इन बातो का प्रहलाद पर बहुत असर पडा.
क्रमश....
मिलते हे आज ही थोडी दे बाद

15/03/08

आओ बच्चो सुनो एक कहानी

आओ बच्चो,अरे लडो मत अराम से बेठो,चलो चुनु तुम इधर बेठो,पलक बेटे शरारत नही,सब बेठ गये... अब सुनो कहानी.
यह कहानी हे बडी पुरानी, जब मे बहुत छोटा था, उस से भी पहले की, मुझे मेरे दादा जी ने सुनाई थी,फ़िर मेने अपने बच्चो को,दुसरे बहुत से बच्चो को सुनाई,आज तुम्हे भी सुना रहा हु,सुनो गे,बच्चो थोडा ऊचा बोलो ना,सुनो गे,हां अब हुई ना बात तो सुनो.
शहर मे एक बहुत बडा घर था,उस घर मे बहुत से बच्चे भी रहते थे, ओर बहुत बडा आंगन था, पता हे आंगन कया होता हे,उस आंगन मे सभी बच्चे बहुत खेलते थे,ओर हां उस आंगन मे दो पेड भी थे, एक नीम का बहुत बडा पेड ओर चारो ओर फ़ेला हुया,ओर पता हे दुसरा पेड कोनसा था,नही पता ना,चलो मे बताता हु दुसरा पेड था आम का, यह पेड भी बहुत बडा था,आम के पेड पर पता हे ना कया लगता हे, हां आम लगते हे,वो आम पहले छोटे छोटे ओर कसेले होते हे,कसेले यानि के कडवे, फ़िर खट्टे ओर फ़िर पक्क कर मिठे हो जाते हे, ओर बच्चे इन दोनो पेडो पर झुले भी डालते थे, पेडो पर चढते थे, खुब खेलते थे,उन पेडो को भी अपना साथी समझते थे, गर्मियो मे उन पेडो की छाया मे बेठना, बाते करना, बडे भी भी एक कोने मे बेठ जाते थे,ओर हां उस पेड पर बहुत सारे पक्षी भी रहते थे, ओर सुबह शाम बहुत अच्छा लगता था जब सारे पक्षी शोर मचाते थे.
उन्ही पक्षियो मे एक कबुतर का जोडा भी था, देखा हे कभी कबुतर,अरे भी जो गुटगु करता हे,सुन्दर ओर शरीफ़, एक बार दोनो कबुतर ओर कबुतरी जमीन पर पडे हुये खाने के दाने चुग रहे थे,बरसात हो कर हटी थी,मोसम भी भीगा भीगा था,दोनो आपस मे बाते भी कर रहे थे गुटर गु गुटर गू ओर दाना भी चुन चुन कर खा रहे थे,दोनो बहुत खुश थे, पता हे फ़िर कया हुया बाप रे... तभी कही से एक बिल्ली वहा आगई,ओर उन दोनो को देख कर बिल्ली बहुत ही होशियार हो कर दब्बे पावं से उन की ओर चली,अब कबुतर ओर कबुतरी ने भी बिल्ली को देख लिया,दोनो के पास बहुत समय था उड्ने का , लेकिन दोनो ने अपनी आंखे बन्द कर ली, उन हो ने सोचा हम छुप गये हे, जेसे हमे बिल्ली नही दिखाई देती वेसे ही बिल्ली भी हमे नही देख पा रही, ओर फ़िर राम राम का भजन करने लगे,
अब बिल्ली की तो मोजा ही मोजा,बिल्ली आई ओर कबुतरी को पकड कर ले गई,कबुतर तो आंखे बन्द कर के भजन कर रहा था, सो उसे कुछ भी नही पता, बिल्ली कबुतरी को मार के अपने बच्चो को दे कर वपिस आई तो देखा कबुतर पागल बही खडा हे,बिल्ली ने उसे भी पकड लिया,अरे बच्चो तुम उदास मत हो यह तो कहानी हे.
अब बताओ तुम ने इस कहानी से कया सीखा,जरुर बताना,