12/04/08

आठ सींगो वाला हिरन

अरे बच्चो लगता हे खुब मस्ती कर रहे हो,कया नेट पर भी आते हॊ, तो चलो तुम्हे एक कहानी सुनाता हुं,ध्यान से सुनना.
कहानी बहुत ही पुराने से पुराने जमाने की हे जब सब जीव साथ साथ रहते थे, यानि जानवर ओर आदमी ओर सभी बाते भी करते थे,तो सुनाऊ कहानी, तो सुनो ना.....
एक बार एक हिरनी के एक बहुत ,सुन्दर सा एक बच्चा आया,अब हिरण ओर हिरणी उसे बहुत प्यार करते थे,लेकिन यह कया उसके आठ सींग थे, फ़िर एक दिन वो स्कुल गया,लेकिन जाते वक्त तो बहुत खुश था, पर घर वापिस आते ही रोने लगा,उसकी ममी ने जब पुछा तो फ़िर से रोने लगा ओर बोला मे कल से स्कुल नही जाऊगा, अरे अरे मेरा राजा बेटा स्कुल क्यओ नही जाये गा ममी ने पुछां तो वह वोला सभी मुझे आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण
आठ सींग वाला हिरण कहते हे
तो मां बोली इस मे कया बडी बात हे जाओ अपने बढई अकंल के पास ओर एक सींग कटवा लो. ओर वो भागा बढई अकंल के पास गया ओर बोला अकंल अकंल मेरा एक सींग काट दो,मुझे स्कुल मे दुसरे साथी आठ सींग वाला हिरण कह कर चिढाते हे, ओर बढई अकंल ने उस का एक सींग काट दिया,दुसरे दिन फ़िर हिरण का बच्चा रोता रोता घर आया तो मा ने फ़िर पुछा आज कया हुया, बच्चा रोते रोते बोला सभी बच्चे मुझे छेडते हे,
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
सात सींग वाला हिरण
मां ने फ़िर से उसे बढई अकंल के घर भेज दिया ओर एक सींग ओर कट्वा दिया,तीसरे दिन फ़िर बच्चा रोता रोता घर आया, मां ने पुछा अब कया हुया,बच्चा रोते रोते बोला सभी बच्चे मुझे छेडते हे,ओर बच्चे ने एक सीं ओर कट्वा लिया,
धीरे धीरे बच्चे ने सारे सींग कटवा लिये,ओर वो हमारी, तुम्हारी तरह से बन गया,ओर आज मां ने उसे तेयार करके सिर मे कंघी करके स्कुल भेजा.... आज भी हिरण बाबा फ़िर रोते रोते घर आये मां ने पुछा बेटा अब कया हुया, तो बच्चा बोला अब सभी दुसरे बच्चे मुझे बिना सींगो वाला हिरण बिना सींगो वाला हिरण कह कर तगं करते हे,मुझे तो मेरे सींग वापिस चाहिये,मां ने उसे फ़िर बढई अकंल के पास भेज दिया, बच्चा वहा जाकर बढई से बोला अकंल अकंल मेरे सींग फ़िर से लगा दो,बढई बोला बेटा जो काट दिया उसे मे केसे वापिस लगा दु,अब बच्चा जिद करने लगा तो बढई अकंल ने उसे डांट कर भगा दिया, बच्चे को बहुत गुस्सा आया,ओर गुस्से मे बढई अकंल से बोला पता हे कया वोला ?
बढई अकल बढई अकंल मेरे सींग जोड दो नही तो मे कुल्हाडी ले जाउ गा तुम्हारी, ओर वो सचमुच मे बढई की कुल्हाडी ले कर भाग गया, उसे रास्ते मे एक लकडहारा मिला उस के पास कुल्हाडी नही थी,ओर वो हाथो से लकडिया तोड रहा था,तो हिरण के बच्चे को उस पर तरस आया ओर हिरण का बच्चा वोला अकंल अकंल तुम हाथ से लकडिया क्यो तोड रहे हो यह लो मेरी कुलहाडी इस से काटो,जब लकडहारा उस से लकडिया काटने लगा तो वो कुल्हाडी झट से टुट गई, ओर यह देख कर हिरण का बच्चा बोला दो मेरी कुल्हाडी, अब भला लकडहारा कहां से देता कुलहाडी,तो हिरण का बच्चा गुस्से मे उस की लकडिया ले कर भाग गया,आगे गया तो कया देखता हे,एक लडकी भुखी बेठी हे बच्चे ने पुछा तुम खाना क्यो नही बनाती तो उस ने कहा मेरे पास लकडिया नही हे, तो हिरण के बच्चे ने उसे लकडिया दे दी, ओर लडकी ने झट पट आग जला कर खाना बना लिया.
अब शरारती हिरण बोला ऎ लडकी मेरी लकडिया वपिस करो,भला जलने के बाद लकडिया कहां से आती,तो हिरण उस का खाना ले कर भाग गया, आगे जा कर हिरण ने देखा,एक बर्तन बेचने बाला बर्तन ले कर बेठा हे ओर बहुत उदास था, हिरण के बच्चे ने पुछां अकंल उदास क्यो बेठे हो,तो बर्तन वाला बोला आज कल लोग मेरे बर्तन नही खरीदते, ओर जिस के कारण मेरे पास पेसे नही, ओर बिना पेसे के खाना नही मिलता, तो मेने ३,४ दिन से कुछ नही खाया,हिरण के बच्चे ने उसे खाना दे दिया बर्तन बाले ने सारा खाना खा लिया तो हिरण का बच्चा बोला वपिस करो मेरा खाना वर्ना मे तुम्हारा बर्तन ले कर भाग जऊगा ओर झट से वो बर्तन वाले का बर्तन ले कर भाग गया,
आगे जाने पर उसे एक ग्वाला मिला, जो अपनी गाय का दुध सीधा अपने मुहं मे फ़िर बच्चो के मुहं मे दोह रहा था,हिरण के बच्चे ने उसे अपना बर्तन दे दिया,अब गाय ने टागं मार कर वो बर्तन तोड दिया,ओर फ़िर हिरण उस की गाय ले कर भाग गया,आगे एक किसान दुखी बेठा था, पुछने पर उस ने बताया उस का एक बेल मर गया हे, तो हिरण के बच्चे ने उसे हल चलाने के लिये गाये दे दी,अब गाय तो नाजुक होती हे ना तो वो जल्द ही मर गई,अब हिरण किसन से बोला दो मेरी गाय नही तो मे तेरी बुआ को ले कर भागु गा, किसान वोला अब मे कहां से लाउ तेरी गाय तो हिरण उस की बुआ को ले कर भागा, थोडी दुरी पर एक मदारी तमाशा दिखा रहा था, ओर एक रस्सी पर तीन साल का लडका चल रहा था,हिरण ने उसे गुस्से से कहा तुम्हे शर्म नही आती इस छोटे बच्चे को रस्सी पर चलवाते हुये,मदारी वोला तो कया तेरी बुआ चले गी रस्सी पर हिरण बोला हां,ओर मदारी ने बच्चे को रस्सी से उतार दिया ओर किसान की बुआ को रस्सी पर चढा दिया इतन ऊपर से नीचे देख के बुआ को चक्कर आया ओर वो गिर कर मर गई,अब तो हिरण को बहुत गुस्सा आया बोला लाओ मेरी बुआ, अब मदारी कहा से लाये बुआ, तो हिरण का बच्चा उस का तबला ले कर भागा ओर फ़िर घर आ कर खुब जोर जोर से तबला बजाये ओर नाचे, दुसरे दिन स्कुल मे तबला ले गया ओर सभी बच्चे तबले की धुन पर नाचने लगे,त ता तेयिया ता ता तेयिआ, ओर फ़िर सब हिरण के बच्चे के दोस्त बन गये.
समाप्त

3 comments:

mahendra mishra said...

bahut badhiya kahanee . dhanyawaad

mehek said...

raj uncle ji :) :) bahut achhi kahani thi,ek dam pyari,nanhe hiran ki tarah,aap humko yuhi kahani sunaa kigiye.

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

भाटिया अंकल भाटिया अंकल.. और कोई कहानी सुनाओ नही तो मैं आपकी ब्लॉग लेकर भाग जाऊंगा..
वाकई बहुत अच्छी कहानी सुनायी है आपने.. मज़ा आ गया..