11/05/08

प्यासा कौया

बच्चो, अरे आ जायो आज तुम्हे एक बहुत ही अच्छी कहानी सुनाता हू, ओर उस से शिक्षा भी लेना. जब भी हम मुसिबत मे फ़सें तो अपने दिमाग से काम करो, ओर कोई भी युक्ति निकालो , भगवान के भरोसे मत बेठो, उस भगवान ने हमे दिमाग दिया हे, कि मुस्किल मे हम खुद सोचे, तो अब शुरु कर कहानी...
एक बार बहुत गर्मी पडी अरे बिलकुल आज की तरह से,ओर जगंल मे तो नल भी नही होता, ओर ना ही बोतल का पानी ही मिलता हे, वहां एक कोवा रहता था, उसे उस दिन बहुत प्यास लगी पानी पीने लगा तो क्य देखता हे. अरे इन बच्चो ने सारा पानी बहा दिया, अब बीबी को आवाज दी, लेकिन उस ने भी बताया आज तो सारा पानी बच्चो ने बहा दिया.

ओर अब कोये महाराज पानी की तलाश मे घर से निकले, कभी इधर देखते हुये कभी उधर देखते हुये उडे जा रहे हे ,ओर अब तो प्यास के मारे उडा भी नही जा रहा था, तभी उन की नजर एक बर्तन पर पडी, ओर बहुत खुश हुये नीचे उतरे, ओर बर्तन से पानी पीने लगे तो देखा, अरे पानी तो बहुत कम हे बर्तन मे, प्यास भी बहुत लगी हे, अब क्या करे, तभी उन्हे एक युक्ति सुझी, ओर आस पास से छोटे छोटे पत्थर ऊठा ऊठा कर बर्तन मे डलने लगे, ओर थोडी सी देर मे ही पानी उपर आ गया, ओर कोवे जी ने दिल भर के पानी पिया, ओर बाकी पानी बच्चो के लिये भी ले लिया,तो बच्चो समझ दारी से सभी काम हो जाते हे.

8 comments:

Anonymous said...

If any child will read thse stories in hindi he/she is bound to spoil the HINDI he knows. Your spellings are atrociously poor . And children dont really read these hindi blogs . May be u are writing these for indian children settled in italy who dont know hindi only they will probably understand this hindi . hopefully nextime we read there will be no spelling mistakes . i dont want my grand children to feel hindi is all crap with such aritng s

Dr.Parveen Chopra said...

राज भाटिया, आप की पोस्ट पर टिप्पणी देने से पहले ज़रा इन मिस्टर अनॉनीमस से दो बातें कर लूं। अनानीमस महोदय, क्या जब हमें हमारी मां लोरी सुनाती हैं, नानी-दादी कहानियां सुनाती हैं तो क्या हम उस की ग्रामर चैक करते फिरते हैं। नहीं ना, वैसे भी अनानीमस महोदय, हम ने तो इस देश में जो सीखा है कि जब आप दिल से कुछ कहते हैं, कुछ लिखते हैं.....तो किसी तरह के व्याकरण को बीच में घुसाने की कोई ज़रूरत नहीं होती। रही बात, राज भाटिया जी की इन कहानियों की.....तो हे अनानीमस प्रभु, ये जो राज भाटिया जी काम कर रहे हैं यह सदियों तक इंटरनेट पर पड़ा रहेगा। पता नहीं कितनी पुश्तें पढ़ेंगीं। और हां, आप ने अपनी टिप्पणी में कहा कि बच्चे ब्लाग नहीं पढ़ते, लेकिन आप अपने दिल पर हाथ रख कर यह तो एक बार टटोलें कि क्या बच्चों को ही इस तरह की सीख चाहिये....क्या हम ने इन सीखों पर चलना शुरू कर दिया है.....No,no way !....so, in a way these little pieces of wisdom are directed towards anybody who cares to draw any inspiration from these inspirational stories.
So far as I know, Mr.Anonymous, this gentleman Raj Bhatia is not writing it for a particular area....his writiings are aimed at all net users. Regarding spelling mistakes, hell with these mistakes, who cares......we simply enjoys what he writes ....is that not enouth,Sir Anonymous. इतने इतने व्यस्त लोग अपने रूटीन में से इतना समय निकाल कर अपना दिल हल्का कर लेते हैं तो उस में स्पैलिंग्स की करैक्टनैस कहां से आ गई।
वैसे भी जब हम लोग अपनी मां की गोद में सिर रख कर मां...मां....मां...बा..बा ..बा कहते कहते ही मां की पूरी भाषा बोलनी सीख जाते हैं तो क्या हम पहले ग्रामर पढ़ते हैं।
you have written that you dont want my grand children to .......well, Mr. Anonymous, that is your individual problem. By the way, I tell you my younger son enjoys these stories very much.
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भाटिया जी, हम सब लोगों को तो भई आप का लिखा बहुत पसंद आता है...वो बात अलग है कि बहुत बार यूं ही आलसवश टिप्पणी करने में कोताही कर देते हैं....मैं ही नहीं, आप के इतने सारे प्रशंसक यही कहते हैं,सर। आप तो बस जारी रखिये ऐसी ही प्यारी प्यारी नन्ही-मुन्नी कहानियां हमें परोसना जारी रखिये जिन के बहाने हमें बचपन का आंगन याद आता है , वह चारपाई याद आती है और नीले-आकाश पर जड़े सितारों वाली चादर की याद आती है, ठंड़ी ठंड़ी कोमल पुरवैया की भी याद आती है.....आशा है कि आप हमें ये सब जी लेने का बहाना नियमित मुहैया करवाते ही रहेंगे।
शुभकामनाएं।

राज भाटिय़ा said...

चोपडा जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद,मुझे बहुत अच्छा लगा आप की टिपण्णी पढ कर ओर एक नयी हिम्मत मिली.
मिस ? मिस्टर अनॉनीमस जी आप का भी बहुत धन्यवाद, मेने सुना हे इन्सान गल्तियो का पुतला हे, तो मेरे से जो गलतिया होती हे, मुझे नही मालुम पढता, वेसे आप मेरी पुरानी पोस्ट देखे गे तो उन मे तो ९०% गलतिया होती थी, फ़िर धीरे धीरे मुझे दोस्तो ने, अलोचको ने,टिपण्णी कारो ने मेरी गलतिया बताई ओर मेने सुधार किया,जिस आदमी ने २५,३० सालो से हिन्दी पढी ही नही, वो तो गलतिया करे गा ही, मे बहुत से शब्दो को यही बलाग पर आ कर सीखा हु, कई शब्दो के चित्र दिमाग मे बना कर सोचत हु यह ठीक हे या नही, फ़िर मेरा की बोर्ड भी आप से अलग हे, फ़िर भी मे आप का दिल दे धन्यवाद करता हु.
आप बन कर तो आये हे अनॉनीमस ? लेकिन मुझे मालुम हे आप कोन हे, लेकिन आप एक तरह से मेरी मदद कर रहे हे, ओर मुझे एक नया सबक भी आप की टिपण्णी से मिल गया,
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

आप अपना अभियान जारी रखिये. वर्तनी की त्रुटियाँ समय के साथ लिखते लिखते कम हो जायेंगी.

Anonymous said...

ha ha ha
you all critsize others when it comes to spelling mistakes and when its your turn you all feel its ok

राज भाटिय़ा said...

मिस ? मिस्टर अनॉनीमस जी,अब जरा सोचो तुम हम आप मे कभी नही मिले सभी एक दुसरे को सिर्फ़ शच्दो से ही जानते हे,या एक दुसरे के विचारो से हे,अब आप के ऎसे बिचकाने विचारो से तो आप की सोच (जिसे मे तो अच्छी तरह से जानता हू )को दर्शाता हे, अगर मे यहा आप का नाम लिख दु तो लोग आप के बारे मे क्या सोचे गे ?आप की इज्जत तो हे नही, अब आप के मुहं लग कर अपनी इज्जत भी क्यो खराब करू,क्यो कि मेरा तो नाम हे जो मेरे मां वाप ने दिया हे तुम्हारी तरह से बेनामी नही हु,जिस की कोई पहचान ही नही, अगर हे तो उसे दुनिया से छुपाते,छुपाती फ़िरती हो, क्यो की तुम्हे खुद पर शर्म आती हे,वरना खुल कर आओ सामने...

mamta said...

हुम्म बचपन की सुनी और पढी हुई कहानी एक बार फ़िर से पढने को मिली । शुक्रिया।

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

Anonymous जी को मैं भी जबाब दे दूं... जनाब आप मैं खुल कर नाम बताने की हिम्मत तो है नहीं...कम से कम कहानी से ही सीख ले ली होती...

भाटिया जी, बहुत खूब..बचपन की यादें ताज़ा कर दी आपने