21/03/08

होलिका दहन (बच्चो आओ) २

क्रमश से आगे...
होलिका दहन
अब प्रहलाद घर आ कर राम राम का नाम जपने लगा, क्योकि उस बच्चे ने जो देखा वो अद्भुत था,इतनी आग से बिल्ली के बच्चो का बचना ना मुम्किन था, सो अब वो हर समय राम राम जपने लगा, सब ने रोका, लेकिन राज कुमार नहि रुका राम का नाम लेने से, मां ने बहुत समझाया, लेकिन बच्चे पर कोई असर नही हुया, जब इस बात का पता हिरण्यकश्यप को चला तो वो खुद अपने इकलोते बेटे को समझाने आया, फ़िर हिरण्यकश्यप ने सोचा बेटा पागल हो गया हे उसे हकीम के पास इलाज के लिये भी भेजा, लेकिन प्रहलाद पर सिर्फ़ राम राम की भक्ति का ही भुत सवार था, फ़िर हिरण्यकश्यप नेउसे प्यार से समझाया धमकया, लेकिन कोई असर नही, अब प्रहलाद को देख कर ओर भी लोग राम का नाम्लेने लगे, एक तरह से बिद्रोह सा होने लगा,
एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कहा की आज के बाद अगर तुमने राम का नाम जुबान पर लिया तो मे तुमहे अभी भुखे शेर के सामने डाल दुगां, बताओ ऎसा कया हे उस भगवान मे,तो प्रहलाद ने कहा आप जीवन लेना जानते हॊ देना नही, बात सुन कर बाप को क्रोध आगया, उस ने सिपहियो को हुकम दिया इसे अभी भुखे शेर के समाने डाल दो शेर कई दिनो से भुखा था,जब प्रहलाद को शेर के सामने लेजाया गया तो शेर ने प्रहलाद पर हमला करने के स्थान पर उस के पेर चुमने लगा, ओर अपनी पीट पर प्रहलद कॊ बिठा कर घुमने लगा,हिरण्यकश्यप ने उसे पहाड की चोटी से नीचे फ़िक्वाया, उबलते पानी मे डलवाया, खोलते तेल मे फ़ेका, हाथी के पांव तले कुचना चाहा, लेकिन प्रहलाद को कुछ भी ना हुया.
प्रहलाद राम राम की धुन मे मगन रहता, ओर धीरे धीरे उस के साथ ओर लोग भी आने लगे, लेकिन यह सब हिरण्यकश्यप को अच्छा ना लगता, उसे अपनी हार मासुस होती, काफ़ी सोच विचार के बाद हिरण्यकश्यप के दिमाग मे एक सुन्दर आईडिया आया.
हिरण्यकश्यप की एक बहिन थी होलिका जो बहुत ही घमंडी थी भाई के राजा होने से उसे किसी का भी डर नही था, लोगो को तगं करना, मरना, मजाक उडाना उस का काम था लोग भी उस से बहुत तगं थे, ओर हा होलिका के पास एक शाल था जिसे ओड कर आग उस का ( जिस ने भी शाल ओडा हे )कुछ नही बिगाड सकती थी, अब एक दिन हिरण्यकश्यप ने होलिका को अपने महल मे बुलाया ओर सारी बात बातई, होलिका सारी बात सुन कर भाई के कहे अनुसार काम करने को तेयार हो गई,
आज सुबह से ही पुरे राज्य मे ढिढोरा पीट कर लोगो को लोगो को हुकम दिया गया की आज शाम को एक राम भगत को होलिका की गोद मे बिठा कर आग के हवाले किया जाये गा ताकि शेष लोगो को भी पता लगे ,इस देश मे राम का नाम लेने वाले का कया हाल होता हे, उस मेदान मे जगंलो से बहुत सारी लकडिया ला कर इकट्टी की गई थी, निश्चित समय पर उस मे आग लगा दी गई, ओर होलिका ने अपना शाल ओड् कर प्रहलाद को गोदी मे उठाये आग के बीच चली गई,तभी एक हवा का झोंका आया ओर शाल प्रहलाद पर पलट गई ओर होलिका उस आग मे जल मरी, हिरण्यकश्यप को अब बहुत ही गुस्सा आया ओर उसने उसी आग से एक बहुत ही बडा लोहे का खंम्बा गरम करवाया जब खंम्बा लाल रंग को हो गया तो सिपहियो को हुकम दिया प्रहलाद को इस खंम्बे से बांध दो, ओर खुद सब कुछ देखने के लिये खंम्बे के पास आ गया,तभी खंम्बा फ़टा ओर उस मे से एक ऎसा आदमी निकला जिसका सिर शेर की तरह से था, हाथ पांवो भी जान्वरो की तरह सी थे, उस ने हिरण्यकश्यप को उठा कर अपने घुटने पर रखा ओर बोला देखो हिरण्यकश्यप न तुम्हे जानवर मार रहा हे ना आदमी, ना तुम रात मे मर रहे हो, ना ही दिन मे अभी ना शाम हे ना सवेर आधा सुर्या डुबा हे, इतना कह कर उस जानवर रुपी ने हिरण्यकश्यप के टुकडे टुकडे कर दिये, उस निर्दयी राजा के मरने ओर होलिका के जलजाने पर सभी बहौत खुश हुये,बस तभी से एक दिन पहले होलिका दहन होता हे आदमी अपने अन्दर की सभी बुराईयो को इस अगनि मे डाल देता हे ( काश ऎसा ही होता ) फ़िर दुसरे दिन सभी दुशमनी भुल कर आपस मे खेलते हे, रंगो से ,एक दुसरे को उपहार देते हे शुभकामन्ये देते हे.आप सब को भी होली की शुभकामन्ये.
ओर भी बहुत सी कहानिया होली से जुडी हे, लेकिन हमे इन कहानियो से शिक्षा लेनी चहिये,
हम कितने भी अमीर बन जाये, कितने भी उचे पद पर पहुच जाये हमे मनावता को नही भुलना चहिये, हम मे अकड नही आनी चहिये, हम सब उस पर्म पिता के बच्चे हे, सब बराबर हे, फ़िर मिले गे

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