21/03/08

होलिका दहन (बच्चो आओ) १

होलिका दहन
बहुत ही छोटा था, तब यह कहानी सुनी थी,उस समय तो छोटा था सो इस कहानी को भी पुरी तरह से समझ नही सका था, लेकिन अब कुछ कुछ समझने लगा हु, कल बच्चो ने पुछा तो उन्हें होली दहन (दुलहण्डी ) ओर होली मे अन्तर बताया, सोचा वही कहानी यहा भी लिख दु, शायाद आप कॊ ओर आप के बच्चो को अच्छी लगे.
अबहुत समय पहले एक राजा था, नाम उस का हिरण्यकश्यप वो भगवान का बहुत बडा भगत था, उसने बहुत ही कठोर भक्ति की जिस से भगवान बहुत खुश हुये,ओर आप प्रगट हुये, हिरण्यकश्यप को दर्शन दिया ओर बोले कोई भी वरदान मांगो, हिरण्यकश्यप ने भगवान से कहा मे अमर हो जाऊ, मुझे पुरे बर्ह्माण्ड मे कोई भी आदमी, देवता, पशु पक्षी,जीव जन्तु,ओर जानवर ना मार सके, मेरी मोत ना दिन मे हो ना रात मे हो, ना सुबह हो, ना शाम को हो,भगवान ने हिरण्यकश्यप को वरदान दिया ओर चले गये,वरदान मिलते ही हिरण्यकश्यप मे घमन्ड आ गया,ओर धीरे धीरे वो भगवान को भी अपने से तुच्छ समझने लगा,अपने राज्या मे लोगो को तंग करने लगा, लोगो की लडकियो, महिलओ को उठवाने लगा, पुरे राज्या मे घोषाणा करवादी कोई भी भगवान को नही पुजे गा, मन्दिरो से भगवान की मुरतिया हटवा कर अपनी मुरतिया रखवा दी,ओर सब को बताया आज से मे ही भगवान हु, सब मेरी पुजा करे, पुरे राज्या मे हएहएकार मच गई, अब जेसा राजा वेसे ही उस के सिपाही सिपहियो ने भी खुब अन्धेर मचा दिया,पुरे राज्या मे हाहा कार मची ( जेसे अब भारत मे हे ) लोगो के पास खाने के लाले पड गये, जये तो कहा जये, कुछ बोले तो गुण्डे सिपाही मारे, राजा के पास जाये तो भी सुनवाई नही,
लोग डर के मारे अब भगवान के स्थान पर हिरण्यकश्प का नाम ले कर पुजा करे,अब भगवान देखा हिरण्यकश्यप ने तो मेरे वर का गलत उपयोग किया हे, उसे जो वरदान दिया, जो शक्ति दी उसने उस का गलत उपयोग किया हे,लेकिन भगवान अपना दिया वचन भी वपिस नही ले सकते, तभी हिरण्यकश्यप के घर मे एक सुन्दर बच्चे ने जन्म लिया, उस का नाम प्रलहाद रखा गया, प्रल्हाद बचपन से ही बहुत बहदुर था, लेकिन बहुत ही गंभीर, ओर शांत चित, एक दिन बालक प्रलहाद घुमते घुमते ऎसी जगह पहुचा जहां एक गरीब कुमहार अपने घडॊ को पकाने के लिये तनंदुर मे रखा कर आग दे रहा था, जब बच्चे ने पुछा आप कया कर रहे हे तो कुम्हार ने उसे सब समझाया इस से घडे पक जाते हे, तभी झोपडे के अन्दर से कुम्हार की बीबी आई ओर तनंदुर मे धुयां देख कर चिल्लाई अरे ठहरो ठहरो, एक घडे मे हमारी बिल्ली ने बच्चे दिये थे, ओर वो घडा भी तंदुर मे ही था,कुम्हार ने कहा अब बहुत देर हो चुकी हे, अब तो तंदुर पुरी तरह से आग पकड चुका हे, अब तो उन्हे भगवान ही बचा सकता हे, यह बात सुन कर बच्चे ने पुछा यह भगवान कोन हे, अपनी गलती का अह्सास अब कुम्हार कॊ हुया, लेकिन बच्चा अपनी जिद पर अडा रहा,ओर दुसरे दिन प्रलहाद को आने को कह कर बात टाल दी,सारी रात ना तो प्रलहाद ही सोया ओर ना ही कुम्हार ओर उस की बीबी , प्रलहाद कॊ बिल्ली के बच्चो को बचाने बाले भगवान के बारे जनाने कि उतुसुकता थी, ओर कुम्हार ओर उस की बीबी को बिल्ली के बच्चो के साथ साथ प्रलहाद को भगवान के बारे कया बताये गे इस का डर था,
दुसरे दिन राजकुमार सही समय पर कुम्हार के घर पहुच गया, देखा कुम्हार तंदुर से अपने पके हुये लाल लाल घडे निकाल रहा हे, लेकिन अभी भी घडे गर्म थे इस लिये एक कपडे की सहायता से निकाल रहा था, साथ मे उस की बीबी दोनो हाथ जोड कर मन ही मन कुछ बुदबुदा रही थी, ठीक बीच मे एक घडा जब कुम्हार ने निकाला तो उस मे से मियाउ मियाउ की आवाज आ रही थी,कुम्हार,उस की बीबी ओर राज कुमार प्रहलाद की आंखे खुली रह गई,वो घडा तो पुरा पक्का था लेकिन बिल्ली के बच्चे विलकुल ठीक थे, फ़िर प्रहलाद ने भगवान के बारे पुछा तो कुम्हार ने बिना डर के उसे सारी बात समझा दी ओर भगवान के बारे बताया, प्रहलाद ने कहा लेकिन भगवान तो मेरे पिता जी हे, कुम्हार ने कहा नही, भगवान से अमर होने का वरदान पा कर तुम्हारे पिता मे अंहकार आ गया हे, वो मोत तो दे सकते हे, लेकिन जीवन किसी को नही दे सकते, इन बातो का प्रहलाद पर बहुत असर पडा.
क्रमश....
मिलते हे आज ही थोडी दे बाद

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