15/03/08

आओ बच्चो सुनो एक कहानी

आओ बच्चो,अरे लडो मत अराम से बेठो,चलो चुनु तुम इधर बेठो,पलक बेटे शरारत नही,सब बेठ गये... अब सुनो कहानी.
यह कहानी हे बडी पुरानी, जब मे बहुत छोटा था, उस से भी पहले की, मुझे मेरे दादा जी ने सुनाई थी,फ़िर मेने अपने बच्चो को,दुसरे बहुत से बच्चो को सुनाई,आज तुम्हे भी सुना रहा हु,सुनो गे,बच्चो थोडा ऊचा बोलो ना,सुनो गे,हां अब हुई ना बात तो सुनो.
शहर मे एक बहुत बडा घर था,उस घर मे बहुत से बच्चे भी रहते थे, ओर बहुत बडा आंगन था, पता हे आंगन कया होता हे,उस आंगन मे सभी बच्चे बहुत खेलते थे,ओर हां उस आंगन मे दो पेड भी थे, एक नीम का बहुत बडा पेड ओर चारो ओर फ़ेला हुया,ओर पता हे दुसरा पेड कोनसा था,नही पता ना,चलो मे बताता हु दुसरा पेड था आम का, यह पेड भी बहुत बडा था,आम के पेड पर पता हे ना कया लगता हे, हां आम लगते हे,वो आम पहले छोटे छोटे ओर कसेले होते हे,कसेले यानि के कडवे, फ़िर खट्टे ओर फ़िर पक्क कर मिठे हो जाते हे, ओर बच्चे इन दोनो पेडो पर झुले भी डालते थे, पेडो पर चढते थे, खुब खेलते थे,उन पेडो को भी अपना साथी समझते थे, गर्मियो मे उन पेडो की छाया मे बेठना, बाते करना, बडे भी भी एक कोने मे बेठ जाते थे,ओर हां उस पेड पर बहुत सारे पक्षी भी रहते थे, ओर सुबह शाम बहुत अच्छा लगता था जब सारे पक्षी शोर मचाते थे.
उन्ही पक्षियो मे एक कबुतर का जोडा भी था, देखा हे कभी कबुतर,अरे भी जो गुटगु करता हे,सुन्दर ओर शरीफ़, एक बार दोनो कबुतर ओर कबुतरी जमीन पर पडे हुये खाने के दाने चुग रहे थे,बरसात हो कर हटी थी,मोसम भी भीगा भीगा था,दोनो आपस मे बाते भी कर रहे थे गुटर गु गुटर गू ओर दाना भी चुन चुन कर खा रहे थे,दोनो बहुत खुश थे, पता हे फ़िर कया हुया बाप रे... तभी कही से एक बिल्ली वहा आगई,ओर उन दोनो को देख कर बिल्ली बहुत ही होशियार हो कर दब्बे पावं से उन की ओर चली,अब कबुतर ओर कबुतरी ने भी बिल्ली को देख लिया,दोनो के पास बहुत समय था उड्ने का , लेकिन दोनो ने अपनी आंखे बन्द कर ली, उन हो ने सोचा हम छुप गये हे, जेसे हमे बिल्ली नही दिखाई देती वेसे ही बिल्ली भी हमे नही देख पा रही, ओर फ़िर राम राम का भजन करने लगे,
अब बिल्ली की तो मोजा ही मोजा,बिल्ली आई ओर कबुतरी को पकड कर ले गई,कबुतर तो आंखे बन्द कर के भजन कर रहा था, सो उसे कुछ भी नही पता, बिल्ली कबुतरी को मार के अपने बच्चो को दे कर वपिस आई तो देखा कबुतर पागल बही खडा हे,बिल्ली ने उसे भी पकड लिया,अरे बच्चो तुम उदास मत हो यह तो कहानी हे.
अब बताओ तुम ने इस कहानी से कया सीखा,जरुर बताना,

1 comment:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत प्यारी कहानी है, बधाई स्वीकारें।