05/04/08

जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन

अरे बच्चो आओ, ओर सुनो एक कहानी बडी पुरानी,कहानी का नाम हे जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन ?
बच्चो पंडे कोन होते हे,आप को मालुम हे कया, अरे पण्डे यार,पंडित जी को बोलते हे ना,ओर यह कहानी दो पण्डो (पंडितो ) की हे. अब मेरी कहानी शुरु होती हे,अरे मेरी नही मेरे दुवारा पण्डो की कहानी.
जो चुप रहे गा वो खायेगा तीन
एक बार एक गावं मे दो पण्डे ( दोनो भाई थे) अपने यजमान के घर गये,वहां उन की खुब सेवा हुई,दोनो ने खुब भर पेट अच्छा अच्छा खाना खाया,ओर रात को यजमान के घर पर ही सोगये, रात को सोने से पहले यजमान ने दोनो को दुध के दो बडे बडे गिलास पीने के लिये दिये ओर साथ मे एक प्लेट मे मोतीचुर के लड्डु खाने को भी दिये,अब दोनो भाई दुध पीकर लड्डु खाने लगे देखा तो प्लेट मे पांच लड्डु थे, बडा भाई बोला मे तीन लड्डु खाउ गा,छोटा भाई बोला नही मे खाऊ गा तीन लड्डु,अब दोनो मे वहस शुरु हो गई,फ़िर दोनो सोचने लगे केसे बांटे, तभी बडे भाई ने कहा जो भी हम मे से पहले बोलेगा वो दो लड्डु खाये गा, जो बाद मे बोला वो तीन लड्डु खाये गा, दोनो भाईयो को यह बात अच्छी लगी ओर दोनो एक दम से चुप हो गये.ओर वेसे ही रात को सोगये.
दुसरे दिन सुबह सुबह यजमान उस कमरे मे आया देखा दोनो भाई चुपचाप लेटे हे,बुलाने पर बोले भी नही, हिल जुल भी नही रहे,यजमान ने बहुत बुलाया लेकिन वो कुछ भी नही कर रहे थे,बच्चो अब तो यजमान बहुत डर गया ओर भागा भागा गया घर पर अपने भाईयो को ओर लडको को बुला लाया सभी ने उन्हे देखा बुलाया, लेकिन दोनो भाई अब ना तो बोले ना ही हिले ढुले,बाप रे यह सब देख कर सभी लोग डर गये,सोचने लगे कही इनको हमारे घर मे सांप ने तो नही काट लिया, या जो दुध रात को दिया था उस मे कही जहर ना हो, अब सभी सोचने लगे अब इन का कया करे,अगर सब को पता चल गया तो हमारी बदनामी होगी ओर जेल भी जाना पडे गा.
घर वालो ने अपने साथ गाव बालो को मिला कर बात की कि यह दोनो पण्डे पता नही केसे मर गये ओर हमारी इज्जत के साथ गाव की इज्जत का सवाल हे, हम सभी मिल कर इन हे टिकाने लगा देते हे, यानि इन्हे जला देते हे,अब यह सारी बाते दोनो भाई भी सुन रहे थे,उन्होने मन ही मन सोचा यह कया पंगा पड गया, फ़िर एक भाई ने सोचा मे क्यो बोलु, अगर मे बोला तो दुसरे को तीन लड्डु मिल जाये गे ओर गाव वालो ने दोनो भाईयो को दो अरथियो पर कस के बाधं दिया की कही गिर ना जाये,ओर शमशान घाट पर आगऎ, दोनो भाई फ़िर भी नही बोले क्यो की दोनो को ज्यादा लड्डु जो खाने थे,
अब गाव वालो ने रोते रोते उन की चिता तेयार कर दी, फ़िर चिता मे नीचे घास फ़ुस भी रख दिया,बडे भाई ने सोचा जल गया तो जल जऊ लेकिन मे दो लड्डु नही खाउगा,
अब सभी ने रोते रोते चिता को आग दे दी,ओर आग धीरे धीरे फ़ेलने लगी, पांच लोग चिता के पास ठहर गये बाकी लोग स्नान करने नदी की ओर चले गये,पांचो चिता से थोडी दुर बेठे थे,अब आग थोडी ज्यादा हुई तो बडे भाई ने सोचा चहे मर जाऊ मे कम क्यो खाऊ, तभी छोटे भाई को थोडा सेक लगा, ओर वो सोचने लगा अरे एक लड्डु ज्यादा खाने के लिये मे तो अपनी जान ही गवां रहा हू, ओर चिता से ऊठा ओर बोला भागो भागो मेरे दो ओर बडे भईया आप के तीन, अब छोटे भाई की आवाज सुन कर बडा भाई भी ऊठ गया उधर उन पांचॊ ने यह सुना की मेरे दो बडे भईया आप के तीन, चिता पर देखा तो उन्होने सोचा यह तो दोनो के भुत हे,वो पांचो शोर मचा कर गाव की ओर भागे बाकी गाव वाले भी भुत भुत कहते हुये वहा से भागे, पीछे पीछे दोनो भाई भी भागे,बच्चो कितना मजा आया होगा जो भी इन्हे देख रहा होगा, फ़िर दोनो भाई यजमान के घर आ कर लड्डु खाने लगे, उस के बाद कया हुया मुझे नही मालुम.बच्चो केसी लगी यह कहानी बताना.
समाप्त

3 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

bahut badhiya......umeed hai aisi hi kuch aor sunne ko milengi.

सागर नाहर said...

हा हा हा..
भाटिया साहब, इस कहानी का प्रिंट आऊट ले लिया है घर जा कर बच्चों को पढ़वाने के लिये।
मुझे तो बहुत मजा आया, बच्चों को भी आयेगा।
:)

राज भाटिय़ा said...

अनुराग जी ओर सागर जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद,