लहरों से डर कर नौका पार नही होती हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती॥ नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवरों पर सौ बार फिसलती है। मन का विश्वास रगों में साहस बनता है, चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना ना अखरता है। आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती॥ डुबकियाँ सिँधु में गोता-खोर लगता है, जा-जा कर खाली हाथ लौट आता है। मिलते ना सहज ही मोती पानी में, बहता दूना उत्साह इसी हैरानी में। मुठ्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती॥ असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो, क्या कमी रह गयी, देखो और सुधार करो। जब तक ना सफल हो, नींद चैन की त्यागो तुम, संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम। कुछ किये बिना ही जय-जयकार नहीं होती, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती॥

14/7/09

कर्तव्य निभाने की सज़ा?

आज समय मिला तो मै बी बी सी की साईट पर गया, ओर युही ही पेज पलटते पलटते नजर पडी इस खबर पर, मेरे लिये यह माया बत्ती कुछ नही लेकिन इस वीर जवान के बारे मै यह खबर ज्यादा मायने रखती है, अगर ऎसा होता है तो कोन जान जोखिम मै डाल कर फ़िर ऎसा करेगा ??.... पुरी खबर पढने के लिये यहां दबाये....
एक ओर केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई मुख्यमंत्री मायावती और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति बटोरने मामले में चार्जशीट को अंतिम रूप देने में लगी है.

11/7/09

तो प्लीज आप और लोगों को भी सचेत करें

एक मेल मुझे कल मिला, जिस मै एक सज्जन ने जो भी लिखा वो सब मै उन सज्जन के नाम लिये बगेरा उन का यह संदेश आप तक पहुचां रहा हुं, यह उन सज्जन की इच्छा है...

कल मैंने शाम को एक बार पुनः डाक्टर को दिखाया और अपनी सारी परेशानी बताई ! इसके पहले मैंने डाक्टर से पूरा ब्योरा नहीं बताया था ! डाक्टर ने मेरी बात सुनकर जो कुछ बताया, उसका निष्कर्ष यही निकला कि सारी बीमारी और परेशानियों को मैंने स्वयं आमंत्रित किया है !

असल में कुछ समय पहले मुझे तगड़ा जुकाम हो गया था ! मैं कोई काम तल्लीनता से नहीं कर पा रहा था ... ऊपर से बार - बार नाक सुड़कते और रुमाल से पोछते शर्म भी आती थी ! बस मै डाक्टर के पास गया और कहा कि "इस जुकाम को किसी भी तरह ख़त्म कीजिये ... मैं कोई काम नहीं कर पा रहा हूँ" उन्होंने तीन टाईम की डोज दे दी ! पहली डोज में तत्काल फायदा हो गया था !

बस राज साहब आज उसी का फल भोग रहा हूँ ! हालाँकि मैं पहले भी जुकाम को रोकने की मेडीसिन खा चुका हूँ लेकिन इस बार जबरदस्त रिएक्शन हो गया ..... मेरी सांस भी इसीलिये फूल रही है ... और कभी भी अचानक कफ बन जाता है ... सिर भारी रहता है वो अलग ... बुखार तो कभी भी आता-जाता रहता है ... और भी पता नहीं क्या,,,क्या .. !

मेल लिखने का मकसद सिर्फ इतना है कि आप अपनी किसी पोस्ट में मेरे नाम का उल्लेख किये बगैर अन्य पाठकों को इस सम्बन्ध में अवश्य बताएं ! जुकाम को रोकना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है ! हलकी-फुल्की विक्स जैसी दवा ली जा सकती है लेकिन जुकाम को एकदम से रोकना शरीर के लिए काफी हानिकारक है ! ये सब मुझे डाक्टर ने बताया ! अगर ये सच है तो प्लीज आप और लोगों को भी सचेत करें क्योंकि मेरे जैसे बेवकूफों की कमी नहीं है !

अगर आप को यह लेख अच्छा लगे तो उस सज्जन को जरुर धन्यवाद देवे.

9/7/09

जब हम ने पहरेदारी की २

क्रमश से आगे..

अब कब रात के ११.०० बजे आखिर इन्त्जार की घडी खतम हुई, ओर चोकी दार हम सब को एक स्थान पर ले गया ओर सब कुछ समझा दिया, ओर सभी को एक एक लाठी ओर एक एक सीटी दे दी, सभी ने अपने अपने मोर्चे सम्भंल लिये,ओर सभी अपने अपने साथियो के संग अपनी अपनी दिशा मै चल पढे, आधी रात हो गई घुमते घुमते, साथ मै शीला सिनेमा था जिस का आखरी शो खत्म, ओर लोग भी सब अपने अपने घरो को चले गये,अब दुर दुर तक कोई नही, एक दम सन्नटा.
सोचा कही चाय पी ले लेकिन कहां ? अब नींद भी हावी होने लगी, मेरे साथ स्वामी था ओर वो पुरी तरह से चुस्त, शायद वो संघ मै जाता था, दो बार सब मिले ओर सब फ़िर से दुर दुर चले गये , युही घुमते घुमते हम उस प्रेस वाले के पास से गुजरे, तो मुझे एक शरारत सुझी, वो प्रेस वाला आले किस्म का डरपोक तो था ही, मेने स्वामी से सलाह कि की अब नींद भगाने का इस से अच्छा कोई ढंग नही, ओर फ़िर हम दोनो ने आपिस मे सलाह कर के उस प्रेस वाले की चार पाई के पास जा कर उस की चादर को खींचा तो उस ने नींद मै ही बिना देखे चादर फ़िर से ले लि.

मेने आवाज बदल कर कहा...सरदार यह प्रेस वाला बहुत करोड पती है इन ने प्रेस कर कर के ओर नकली कोयले जला जला कर बहुत पेसा जमा किया है आज इस की तिजोरी लूटी जाये, ओर हम ने चांदनी रात मै देखा कि वो आदमी हमारी बाते सुन कर थोडा हिला ओर मुंह छुपाये छुपाये ही बोला तुम कोन हो.....
मेने कहा हम डाकू गरदन तोड हे, पहले गोली मारते है, फ़िर गर्दन तोडते है,, उसी समय स्वामी ने अपनी लाठी उस की छाती पर रख दी ओर कहा अगर ज्यादा बोले तो गोली पार...अब वो प्रेस वाला आजीब आजीब सी आवाजे निकाल रहा था, हम ने कहा बोल प्रेस सेठ तिजोरी की चाभी कहा रखी है, प्रेस वाला बोला जी मै तो बहुत गरीब हुं, मेरे पास कोई तिजोरी नही... हम ने उसे कहा तो सुन हम तुझे पांच मिंट का समय दे रहे है, तुम चुप चाप चाभी निकाल कर वापिस लेट जाना ओर हम पेशाब कर के आते है... लेकिन शोर नही मचाना ओये वरना गोली अन्दर दम ....
हम वहा से थोडी हि दुर गये तो उस ने लेटे लेटे ही शोर मचा दिया, हाय मुझे लुट लिया हाय मै कंगाल हो गया. आधी रात का समय आवाज खुब गुंजी हम दोनो भाग कर काफ़ी दुर चलेगे, तो सामने से नेपाली चोकी दार ओर एक अन्य लडका हमे मिले, हमे भागता देख नेपाली को कूछ शक हुआ तो हम ने उसे कहा वहां एक आदमी जोर जोर से चीख रहा है चलो सब मिल कर चले, उस नेपाली ने कोड बर्ड मै सीटी मार कर सब को बुला लिया, जब हम प्रेस वाले के पास गये, तो वहा ओर भी लोग  इकट्ठे हुये थे, ओर जब सब ने पुछा कि तुम सब कहां थे , हम सब ने अपनॊ अपनी पोजिशन बता दी ओर बताया की यहां हम ने किसी को नही देखा, फ़िर प्रेस वाले की बाते सुन कर सब हंसने लगे कि तेरे पास कोन सा खजाना है, चल सो हा तुझे कोई सपना आया होगा.
अब रात के २ बज गये थे, ओर एक बार फ़िर से शांति छा गई, हम दोनो फ़िर आये ओर उसे आवाज मार कर कहा... सेठ तुझे मना किया था कि शोर नही मचाना अब मर.. ओर रंगा लगा तो जरा इस सेठ का निशाना, मेने कहा सरदार बंदुक तो हम वही भुल आये, चलो बंदुक ले आये... यह कह कर हम एक दिवार से कुद कर वहा से दुर चले गये ..... लेकिन उस आदमी ने फ़िर जोर जोर से शोर मचा दिया कि भागो भागो डाकू आ गये हाय हाय मुझे मार दिया.... फ़िर से सभी लोग डंडे लाठिया ले कर भागे ओर उस से पूछा बोल कहा है डाकू, अब वो क्या बताये , बोला अभी अभी यही बात कर रहे थे, ओर मुझे मारने के लिये बंदुक लाने गये है, इतनी देर मै हम सब भी आ गये,ओर सब हेरान की आज इसे कया हो गया है, इसे तो सब जानते है, इस के पास पेसे कहा, शायद कोई बुरा सपना देखा होगा, ओर उसे चेतावनी  दे कर ओर उस की बाते सुन कर सब फ़िर से चले गये,
अब सब की पोजिशन भी बदल गई, ओर हमारी नींद भी उड गई, बल्कि मजा आने लगा अब सुबह के चार बजने वाले थे लेकिन थोडा थोडा अंधेरा अभी भी था, हम ने एक बार फ़िर दिवार से झांका ओर देखा वहा उस गली मे कोई नही था, तो स्वामी ने कहा एक बार फ़िर से मजा ले , लेकिन ध्यान रखना कोई छुप कर देख ना रहा हो, ओर एक चक्कर हम उस के पास लगा कर निकले ओर आवाज लगाई जागते रहो.... ओर फ़िर हम वहा से दुसरी तरफ़ चलेगे ओर फ़िर मै दिवार कुद के उस के पास गया ओर कहा ओये मुंह से चादर उतार हम ढके मुंह वाले को गोली नही मारते, हम तुझे अब गोली मारेगे, कर नंगा अपना मुंह... ओर वो गि गि कर के अपना मुंह चादर मै ओर भी छुपाने लगा, लेकिन मै तो कब का वहां से भाग गय था ओर दिवार के दुसरी तरफ़ पहुच कर हम दोनो वहा से चले गए थे. जब प्रेस वाले को चोकी दार की सीटी सुनी ओर उसे यकीन हो गया कि अब उस के सिरहाने कोई नही तो वो फ़िर से जोर जोर से शोर मचाने लगा, हाय लुट गया, हय मर गया हाय मुझे मार दिया, सभी लोग फ़िर इकट्टॆ हुये, सब ने इधर उधर देखा कोई भी तो नही था,आसपास भी काफ़ी देखा लेकिन मिलता तब जब कोई होता, उस दिन के बाद उस का बाहर सोना लोगो ने बंद कर दिया.
सुबह पांच बजे हम घर आये, ओर शाम को सभी हम उम्र वालो को यह कहानी बताई, उस के बाद रोजाना ही उस प्रेस वाले का शोर रात को आने लगा, अब बाकी भी आते जाते उस का दरवाजा खडखडा , कभी धमका देते, अब तो चोकी दारो को भी यह सब पता चल गया, ओर फ़िर एक दिन सब बडो को भी,  तो बडो ने फ़िर से मिटींग की ओर आईंदा सब बडॆ ही पेहरा देने लगे,ओर सब नोजवानो का पहरा देना बन्द. लेकिन उस प्रेस वाले को फ़िर सभी खुब छेडने लगे थे..ओर बाकी लोग भी शन्ति से सोने लगे.