क्या आप को शुक्रवार ओर सोमवार मे कोई फ़र्क नजर आता हे ? क्या कहा कुछ नही ? अरे आप कया कह रहे हे, जी आ शुक्र वार तो शुक्र वार होता हे ओए सो.... , अजी यह नही कुछ ओर, आप कह रहे हे कुछ समझे नही, कोई बात नही नीचे खुद ही देख ले,
चेतावनी: कुछ नही बस दिल थाम के देखे.
Saturday, 19 July, 2008
फ़र्क
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 20:09 2 आप की राय
नामपत्र विडियो
बेचारी बीबियां
बस के गेट पर लटके मुसाफिरों से कंडक्टर ने कहा: 'भाइयों, अंदर हो जाओ। गेट पर लटकना खतरनाक है।' पर जब कोई भी अंदर न हुआ तो कंडक्टर गुस्से में बोला: 'तुम्हें तुम्हारी बीवियों की कसम, अंदर हो जाओ।' इतना सुनना था कि जो मुसाफिर सीटों पर बैठे थे वे भी आकर गेट पर लटक गए।
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मुकदमा जीतने के बाद वकील ने चोर की पत्नी से कुछ ज्यादा फीस मांगी तो वह झुंझला कर बोली: 'इस चोरी में आपका भी तो हाथ है।' ' मेरा हाथ? यह आप क्या कह रही हैं?' ' जी हां, न पिछले केस में आप उन्हें बरी कराते, न आज यह नौबत आती।'
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एक पंडित जी के घर के सामने गधा मर गया। उन्होंने नगरपालिका को फोन किया तो उधर से जवाब आया कि क्रिया-कर्म करना तो पंडितों का काम है। पंडित जी बोले , हां वो तो है लेकिन उस से पहले रिश्तेदारों को खबर करना जरूरी है।
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प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 06:55 6 आप की राय
नामपत्र कुछ चट्पटी
Friday, 18 July, 2008
ताऊ की चौपाल
एक बाबा आटा मांगण चल्या गया - बाबा नै एक घर मैं जा-कै रूका मारा । बाबा नैं देख्या सारा घर खिंढ्या पड़्या था - कितै बर्तन पड़े, कितै चप्पल-जूते, कितै कपड़े पड़े थे । फेर एक बेसूहरी सी लुगाई बाहर आई ।लुगाई - बाबा, न्यूं आटा मांगता हांडै सै ईब, घर क्यूं ना बसाया ?बाबा - "बेबे, सुथरा घर कदे बस्सया कोनी, और तेरे बरगा वसावण का जी कोनी करया ।"
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एक बार ताऊ के घर में चार चोर बड गए.सबेरे सबेरे ताऊ थाने में पहुच गया रपोर्ट लिखाण खातर.दरोगा न उस ते पूछी ," ताऊ के बखत था ?"ताऊ बोल्या ," थानेदार साहब बखत तो माडा ऐ था ता ऐ तो ये रासे हो गए ."दरोगा बोल्या ," ताऊ यो बता के बाज्या के था?"ताऊ बोल्या," के बताऊ थानेदार साहब एक लट्ठ मेरे सिर पे बाज्या और एक तेरी ताई के सिर पे लगया "दरोगा न अपने गुस्से प कंट्रोल कर के फिर पुछ्या ," ताऊ न्यू बता अक घड़ी प के बाज्या था ?"ताऊ बोल्या ," घड़ी प तो एक ही टिक्या था व तो एक में ही खिंड गई।"दरोगा न अपना सिर पकड़ लिया बोल्या ," ताऊ तू सिर्फ़ इतना बता दे की टेम के होया था?"इब ताऊ न भी छो आ गया वो बोल्या ," र दरोगा तू यू बता अक चोर कदे टेम बता क जाया करें ?"
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भाई जाट जुगाड़ी आदमी हो से , किते न किते तै सारी बाता का जुगाड़ कर लिया करे ,एक बै एक जाट और एक बामण का छोरा एक एक ऊंट ले के जंगल में घुमण जा रे,जाट के छोरे की नकेल टूट गी , ऊंट उसने तंग करण लाग गया , वो बामण के छोरे तै बोल्या भाई यो शरीर के तागा (जनेऊ ) बांद रहा यो मने दे दे,यो ऊंट मने दुखी कर रहा से , बामण का बोलूया- न भाई यो जनेऊ तै हमारा धरम से में ना दू,वो दुखी सुखी हो के घरा आगे .आते ही जाट का छोरा आपने बाबु तै बोल्या - बाबु आज जंगल में इस बामण के ने मेरी गल्या इसा काम करा . एक तागा माँगा था वो भी न दिया . आगे इन तै वयवहार कोन्या राखना,उसका बाबु बोल्या -- अरे इसका बाबु भी इसा ऐ था . तेरी बेबे के ब्याह आले दिन तेरी बेबे बीमार होगी तै मने बामण ताहि न्यू कही के भाई एक बै तू फेरा के उपर आपनी छोरी नै बिठा दे एक घंटे खातर घाल तै मैं आपनी ने दूंगा, पर भाई यो बामण मान्या नही,छोरा बोल्या -- फेर के हुआ बाबु बाबु बोल्या - अरे होना के था फेर एक घंटे खातर तेरी माँ फेरा पे बठानी पड़ी
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 21:26 5 आप की राय
नामपत्र कुछ चट्पटी
खतर नाक विवाह मासुम बराती
मुझे यह खतरनाक कार्ड पता नही कहा से मिला, पहले तो मे कांप ही उठा,फ़िर धयान्से पढा ओर सॊचा आप को भी दिखा दु, तो लिजिये आप भी इस हसीन सुहावने कार्ड को देखे ओर...
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 18:56 6 आप की राय
नामपत्र कुछ चट्पटी
Thursday, 17 July, 2008
चिंतन मां
आज का विचार,यानि शब्दो का मन्थन, आये कुछ विचार करे, मां जिस शब्द को बोलते ही दिल मे ठण्डक पडती हे, वो मां जो एक बच्चे को संस्कार दे कर, पाल पोस कर, दुनिया की ऊंच नीच बता कर, खुद को दुख दे कर अपने बच्चे कॊ सुखी देखना चाहती हे,यह सब एक अच्छी मां ही कर सकती हे, मां जो पहले एक बीबी उस से पहले एक बहिन या बेटी होती हे, एक अच्छी बेटी, एक अच्छी बहिन, ओर एक अच्छी बीबी ही एक अच्छी मां बन सकती हे, जो बिना स्वार्थ के त्याग करना जानती हो, अपने शोको का, अपनी इच्छा का, अपनी भावनओ का, ओर ऎसी मां ही पूत को सपूत बनाती हे, एक अच्छे नागरिक का, एक अच्छे समाज का, एक अच्छॆ दॆश का निर्माण करती हे, तो पढिये आज का विचार..
एक १०, १२ साल का लडका किसी बात से मां से नाराज था, दुसरे दिन सुबह स्कुल जाने से पहले बच्चे ने एक पत्र मां के नाम लिखा ओर मां के काम करने वाली जगह जहां मां का धयान चला जाये रख कर स्कूल चला गया,अब मां किचन के काम निपटा कर बेठने लगी तो उस की नजर उस चिठ्ठी पर गई, उसे ऊठा के पढा, ओर मुस्कुराई, उस पत्र मे बच्चे ने लिखा था...
१०, ०० रुपये छोटी बहन को खिलाने के.
१०,०० शाम को बाजार से समान लाने के.
५,०० रुपये मां को किचन मे हाथ बटाने के
१०,०० रुपये आटा पीसवाने के.
१५,०० रुपये छोटे भाई को पढाने के.
सारे हुये ५०,०० रुपये, मेरी टेबल पर शाम कॊ मिलने चाहिये.
अब मां ने उस पत्र के साथ ५०,०० रुपये ओर एक पत्र अपनी ओर से रख दिया.
बच्चा जब स्कुल से आया तो सीधा अपने कमरे मे गया ओर ५०,०० रुपये देख कर बहुत खुश हुआ, जब वह पेसे उठाने लगा तो उस की नजर मां के लिखे पत्र पर गई...
बच्चा उसे उठा कर पढने लगा...
नो महीने तुम्हे पेट मे रखा= ० रुपये
तुम्हे जन्म दिया = ० ,,
दिन रात तुम्हारी बिमारी मे जागी =० रुपये
तुम्हारे गीले बिस्तर पर खुद सोई तुम्हे सूखे ओर साफ़ बिस्तर पर सुलाया = ० रुपये
तुम्हे लोरी सुना कर देर से सोना = ० रुपये
स्कुल मे दाखिल करवाया = ० रुपये
अच्छे अच्छे कपडे बनबा कर दिये =० रुपये
ओर भी बहुत सी बाते वगेरा वगेरा... यह सब पढ कर बच्चे की आंखॊ मे आंसु आ गये ओर उस ने पेसे मां के कदमो मे रख दिये ओर बोला मां तुम सच मे महान हो मुझे माफ़ कर दो, ओर मां ने उसे गले से लगा लिया. अब आप इसे चिंतन कहे या कहानी लेकिन सोचे जरुर एक बार मां के बारे,
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 22:04 7 आप की राय
नामपत्र चिंतन
बेचारी ल ड कि या
3 लड़कियां आपस में बात कर रही हैं पहली : यार, पता है कल मुझे सर के टेबल से कॉन्डम मिला दूसरी : हां, और मैंने उसमें सुई चुभो दी... तीसरी : कमबख्त, मुझे मरवा दिया ना तूने...
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शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है, जरा गौर कीजिए... पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं
दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं
तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना
चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकालकर खा लेना
पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझसे खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ
छठे साल: जब देखो खान, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था...
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 06:06 9 आप की राय
नामपत्र कुछ चट्पटी
Wednesday, 16 July, 2008
एक रुपया कहां गया ???
यह एक छोटा सा सवाल हम से हमारे (मदन जी ने )टेक्सी ड्राईवर ने पुछा था... क्या आप देगे इस का जबाब ????
दो दोस्त रोजाना एक स्थान पर थोडी दुर पर बेठ कर केले बेचते हे,दोनो घर से रोजाना ३०, ३० केले ले कर आते हे, पहले दोस्त का नाम सुनील हे, दुसरे दोस्त का नाम सुशील हे. दोनो ३० , ३० केले रोजाना बेचते हे, लेकिन इन के भाव अलग अलग हे..
सुनील एक रुपये के दो केले बेचता हे,यानि रोजाना कुल मिला कर १५, रुपये कमाता हे,
सुशील एक रुपये के तीन केले बेचता हे,यानि रोजाना कुल मिला कर १० रुपये कमाता हे.दोनो के रुपये मिला कर २५ बनते हे,
एक दिन सुनील बिमार हो जाता हे, ओर सुशील से बोलता हे तुम मेरे हिस्से के केले भी बेच दो,सुशील सारे केले ले कर बाजर गया, ओर सोचा अगर मे अलग अलग केले बेचुगा तो मुस्किल होगी, ओर वह एक उपाय सोचता हे, सुनील एक रुपये के दो केले बेचता हे, ओर मे एक रुपये के तीन बेचता हु, यानि दोनो मिला कर दो रुपये के पांच, क्यो ना मे सीधे दो रुपये के पांच बेचू, ओर वह दो रुपये के पांच केले बेचता हे, जब सभी केले बिक गये तो पेसे गिनने लगा तो २४ रुपये ही बने, जब अलग अलग बेचते हे तो २५ रुपये बनते हे, क्या आप बातये गे एक रुपया कहां गया??
प्रस्त्तुकर्ता राज भाटिय़ा समय 18:40 16 आप की राय
नामपत्र सवाल
