22/12/08

चिंतन पहले तोल फ़िर बोल

आज का विचार, हम सब कई बार गुस्से मै, लडाई मै, किसी के लेख पर, या किसी ओर बात पर दुसरो को बहुत गलत बोल देते है, बिन सोचे बिन समझे कि जो गलती दुसरे ने की, वोही गलती मै भी कर रहा हूं, उस के शव्दो से मुझे कितना कष्ट पहुचा तो क्या मेरे शव्दो से उसे नही कष्ट पहुचेगा, ओर बाद मै हम अपने किये पर पछताते है...
तो लिजिये आज का विचार...
एक आदमी का किसी बात को ले कर अपने घर वालो से झगडा हो गया, ओर उस ने अपने भाईयो को खुब गन्दी गन्दी गालिया दे दी, रात को जब उस का गुस्सा उतरा तो उसे अपनी गलती का आहसास हुआ, ओर वह सुबह सुबह अपने पिता के पास गया ओर बोला की कल घर पर मैने अपने भाईयो को खुब गन्दी गन्दी गालिया दी है अब माफ़ी मांगना चाहाता हूं.

पिता ने कहा बेटा ऎसा करो अन्दर जा कर थोडा सा नमक ले आओ, वह आदमी अन्दर गया ओर घर से थोडा सा नमक ले आया, फ़िर पिता ने कहा अब इस नमक को घर की छत से चारो ओर बिखेर दो पिसा हुया नमक लडके ने छत से चारो ओर नीचे फ़ेक दिया ? पिता बोले जायो अब सारा नमक ले आओ, लडका जब गया नमक लेने तो वह सब तो मिट्टी मै मिल चुका था.

तो पिता ने समझाया कि जिस परकार अब नमक को इकट्टा करना नामुमकिन हे उसी परकार मुह से निकले शव्दॊ को वापिस लेना मुस्किल है, इस लिये जब भी किसी को बोलो सोच समझ कर बोलो

23 comments:

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

एक सत्य जो अक्सर याद नही रहता .यह वह फार्मूला आपने याद कराया जिसे अपनाकर व्यक्ति महान तो नही महान को श्रेणी मे तो आ ही सकता है .

varun jaiswal said...

जबान व्यक्तित्व का वो आईना है कि कोई भी दरार सब कुछ मिटा देती है |

Arvind Mishra said...

सचमुच sadvichaar !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

इस सद्विचार की सब से अधिक जरूरत अंतुले महाराज को है।

Anil Pusadkar said...

सत्य वचन महाराज्।

seema gupta said...

जब भी किसी को बोलो सोच समझ कर बोलो
"सत्य और अनमोल वचन "

regards

P.N. Subramanian said...

शायद यही है तोल मोल के बोल. अछा लगा.

विनय said...

सही बात याद दिलाने का धन्यवाद

प्रदीप मानोरिया said...

हर बार की तरह आपकी लेखनी ने जादू बिखेरा है

संगीता पुरी said...

आपने बहुत ही सटीक बातें बतायी ......कभी कभी हमलोग इसका ध्‍यान नहीं रखते हें।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुन्दर और उपयोगी शिक्षा !

रामराम !

Abhishek said...

सही कहा आपने, तौल कर बोलने से कई बातों के बिगड़ने की नौबत ही ना आए.

रश्मि प्रभा said...

bahut sahi chintan.....maafi maangne se zahar ka asar nahi jaata,gaali zahar ke jaisa hi hota hai......

praney ! said...

sunder vichar !

Gyan Dutt Pandey said...

सही कहा भाटिया जी। वाणी का संयम बहुत बड़ा तप है।

डॉ .अनुराग said...

सत्य वचन

pintu said...

bilkul sahi bat kaha aapne!
sty or anmol vachan!

प्रहार - महेंद्र मिश्रा said...

तोल मोल के बोल सत्य अनमोल कटु सत्य ....

अल्पना वर्मा said...

पहले तोलो फिर बोलो -सच लिखा है.सफल और चिंता रहित जीवन का मूलमंत्र.

अशोक पाण्डेय said...

सही बात कही है आपने। सोच समझकर कोई भी बात बोलनी चाहिए।

Amit said...

बहुत ही सही उदाहरण के साथ समझाया है.......बहुत अच्छा लगा पढ़ कर..

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भाटिया जी, बिल्कुल सही एवं जनोपयोगी शिक्षा प्रदान करने हेतु साधुवाद स्वीकार करें.

अनुपम अग्रवाल said...

dhanyawaad achhee shikshaa ke liye