आज कल अपने देश की खबरे देख सुन कर दिमाग खराब होता हे, कहां हम विदेशो मे देखते हे, ओर सोचते हे हम तो इन से ज्यादा मेहनती हे, ओर हमारे देश मे सब कुछ होता हे, ओर हमारे देश मे शिक्षा की भी कमी नही, फ़िर क्यो हम एक एक रोटी को तरसते हे, मै कुछ लोगो की बात नही करता, कुछ लोगो के पास तो इतना हे कि अगर वो दोनो हाथो से लुटाये तो भी खत्म ना हो, मै तो आम भारतिया की बात कर रहा हुं.
अब पिछले दिनो जो देखा सुना, इन सब बातो से दिमाग सुन्न हो गया, अगर ऎसे नेता विदेश मे होते तो कभी के माफ़ी मांग कर सारा धन वापिस कर के कही शर्म से मुंह छुपे होते, लेकिन हमारे यहां तो एक चोरी फ़िर सीना जोरी.... यह सब देख कर आजकल मन बेचैन हे, इस लिये कुछ समय मै ब्लाग से दुर ही रहना चाहता हुं, क्योकि हर किसी के अपने अपने विचार हे, ओर मै नही चाहता कि मेरा किसी से विचारो मे टकराव हो, जब मुड ठीक होगा वापिस आऊंगा, राम राम
अब पिछले दिनो जो देखा सुना, इन सब बातो से दिमाग सुन्न हो गया, अगर ऎसे नेता विदेश मे होते तो कभी के माफ़ी मांग कर सारा धन वापिस कर के कही शर्म से मुंह छुपे होते, लेकिन हमारे यहां तो एक चोरी फ़िर सीना जोरी.... यह सब देख कर आजकल मन बेचैन हे, इस लिये कुछ समय मै ब्लाग से दुर ही रहना चाहता हुं, क्योकि हर किसी के अपने अपने विचार हे, ओर मै नही चाहता कि मेरा किसी से विचारो मे टकराव हो, जब मुड ठीक होगा वापिस आऊंगा, राम राम
38 आप की राय:
raj ji post nahi padh pa rahi kyonki khul nahi paa raha ,phir aakar padhoongi .
theek bhi hsi,
आपके ब्लाग पर वार्निंग आ रही है।
मैं भी कभी-कभी ऐसा ही करता हूँ। और यही सही रास्ता लगता है।
प्रणाम
I appreciate.
दुख और हताशा में कमोबेस सबकी मनःस्थिति आज ऐसी ही है..
मूड तो खराब होता है पर अब इन नेताओं को चुना है तो सहना भी पढ़ेगा ...
कभी कभी एकान्त रहने से ठीक लगने लगता है।
ताऊ जी अशांति में ....शांत रहना ही श्रेयस्कर है !
सूचना के लिए धन्यवाद!
यह कोई समाधान नहीं मगर आशा है जल्द पुनर्वापसी करेंगे.
Der na ho jae...kaheen Der na ho jae.
jaldi peelo beer kahin bhabhi so na jae..
jis din aaoge...us din pad lena bhai ji....filhaal sadhuwaad ke baad alvida...
नही यह पलायन होगा । जहां भी ऐसा लगे कि इस ब्लाग पर किसी की आलोचना या समर्थन करना है किन्तु दिल नहीं चाहता है तो न की जाये टिप्पणी । मगर पढने में क्या हर्ज है ।प्रत्येक व्यक्ति के अपने विचार है, कुछ जोश मे कुछ भावावेश में लिखते है।
""हर किसी से मिला करो तो जफर
कौन कैसा है कुछ पता तो चले ""
विचारों को विराम देना भी कभी कभी श्रेयस्कर होता है |
अवकाश के समय में या घूमने के समय में ब्लॉग में न लिखने की बजाय कम से कम समय मिलने पर पढ़ा तो जा सकता है ... वैसे आपका ख्याल दुरस्त है ....
जी..... आपके विचारों का इंतजार रहेगा.....
आपकी वेदना सबकी वेदना है...
आदरणीय राज भाटिया जी
सादर वंदे मातरम्!
# अगर ऎसे नेता विदेश मे होते तो कभी के माफ़ी मांग कर सारा धन वापिस कर के कही शर्म से मुंह छुपे होते,
लेकिन हमारे यहां तो एक चोरी फ़िर सीना जोरी....
हमारे भाग में ही लिखे हैं ऐसे एहसानफ़रामोश कृतघ्न नेता ।
इन हरामजादों की पीढ़ियों के ऐश-ओ-आराम का बंदोबस्त हमारा वोट करता है … और बदले में इनकी बर्बरता का शिकार भी हम और हमारी पीढ़ियां होती हैं ।
दलगत स्वामीभक्ति और कुंठाओं से आम मतदाता निकल जाए तो समस्याओं क हल निकल सकता है …
बड़े ख़तरनाक हैं सत्तासीन सांपों के इरादे …
अब तक तो लादेन-इलियास
करते थे छुप-छुप कर वार !
सोए हुओं पर अश्रुगैस
डंडे और गोली बौछार !
बूढ़ों-मांओं-बच्चों पर
पागल कुत्ते पांच हज़ार !
सौ धिक्कार ! सौ धिक्कार !
ऐ दिल्ली वाली सरकार !
पूरी रचना के लिए उपरोक्त लिंक पर पधारिए…
आपका हार्दिक स्वागत है
- राजेन्द्र स्वर्णकार
इन सब घटनाओं पे आक्रोश तो आता ही है शांत रहने के सिवा चारा कोई नहीं है
आप ब्लोगिंग करते रहें , इससे दूर ना जाएँ . पलायन समस्या का समाधान नहीं है . बाबा ने अनशन तोड़ दिया है अतः आप भी अनशन को त्याग कर लेखन का कार्य आरंभ कीजिये .
sanp chhuchundar vaali sthiti ho gayi hai
व्यस्तता हो, बाद में आना चाहें तो यह आपकी मर्जी। ऐसा ही करना चाहिए। लेकिन एक विचारधारा की पोस्टों से खिन्न होकर सभी प्रकार के पोस्टों से किनारा कर लेना कहां तक ठीक है? बहुत से ब्लॉगर हैं जो सकून देते हैं।
चेतना जाग रही है. आशान्वित ही रहें.
अपने अपने विचार हैं भाटिया जी किसी को अच्छा लगे तो पढे ना तो ना पढे । पर इसके लिये आप क्यूं लिखना बंद करें ।
कामना करता हूँ कि जल्द ही आपका मूड ठीक हो जाए |
भाटिया जी आपका कहना सही है! सारे नेता बराबर हैं और हमारे देश की ऐसी हालत होते हुए देखकर बड़ा दुःख होता है! आपका मुड जल्द ठीक हो जाए और आपके नए पोस्ट का हमें बेसब्री से इंतज़ार रहेगा!
राज जी,
नमस्कार।
मेरा विचार कुछ अलग है। यदि इस तरह विरोध की आवाज खामोश हो जाएगी तो "चिकने घड़ों" की तो और हौसला अफजाई हो जाएगी। ठीक उसी तरह जैसे चुनावों में सिर्फ 50-55 प्रतिशत वोट पड़ते हैं और बहुत से प्रबुद्ध जन सांपनाथ-नागनाथ में से किसी को चुनने के बजाय घर में ही रहते हैं, बिना तीसरे विकल्प को आजमाए या खोजे। और उसी टुच्ची जीत को ले अयोग्य लोग देश का समाज का बंटाधार करने पर तुल जाते हैं।
मेरा तो यही कहना है कि आप आएं और दुगने विरोध के साथ लिखें। भले ही आवाज कितनी भी धीमी हो पर कहीं ना कहीं, कभी ना कभी तो असर करेगी ही। जैसे रात को कभी-कभी कीड़े-मकोड़ों की हल्की ध्वनी या घड़ी की टिक-टिक से ही नींद खुल जाती है।
हफ्ता-दस दिन पहले मैंने आपके ब्लाग पर वार्निंग आने का आपको बतलाया था। अजीत गुप्ता जी भी ऐसा बतला रहीं हैं, देखिएगा।
जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !
आप देश के लिए परेशान न हो
ये राम भरोशे chalta रहेगा
अब तो आ जाईये
हाल तो आजकल अपना भी यही है इस लिये अधिक ब्लाग्ज़ भी नही पढ पाती हर जगह झगदा फसाद आरोप प्रतारोप बस यही कुछ हो रहा है। जल्दी वापिस आयें । शुभकामनायें।
ठीक है भाटिया जी राम-राम...
आ जाओ अब तो,
क्या बात है भाई जी ...कुछ दिन कई दिन पहले बीत चुके हैं !
हार्दिक शुभकामनायें आपको !
भाटिया जी , राम राम . आप कहाँ हैं ?
thanks for comment on my post .is this your come back ?
Asha ka daman nahee chodana hai hume ....
ab aapka swasth kaisa hai...
dhyan rakhiyega.......
aapka blog mai padtee rahee hoo aur tippaneeya bhee par aaj Satishjee ke blog par aapkee aswasthata kee baat hee vadhy kar gayee comment chodne ke liye.......
shubhkamnae.......v sheeghr swasthy labh kee kamna ke sath.
मन में सिर्फ गुस्सा आता है राज जी
क्या करे , कुछ लिख लेते है तो मन हल्का हो जाता है , लेकिन , लगता है कि देश अब वो देश नहीं रहा ... सच में ही पराया हो गया है ..
आभार
विजय
कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html
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