21/04/11

घर मे दाना नही अम्मा पिसाने चली?

अजी यह कहावत तो हे लेकिन यहां से सच साबित हो रही हे...

'भारत देगा पाकिस्तान को सस्ती बिजली'

 आप भी इस खबर पर किल्क कर के पढ ले...

33 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

खुद के घर में अँधेरा और दूसरों को भाई लोग उजाला दे रहे हैं ....

मनोज कुमार said...

आपने जो कहावत लगा दिया है शीर्षक में वही पूरी कथा बयान कर जाता है। इसके आगे कुछ कहना ही नहीं है।

shikha varshney said...

अरे हम तो हैं ही महान ...

अन्तर सोहिल said...

माँ तै चोथी-चोथी बेटे बिटौडे बख्शें

प्रणाम

अन्तर सोहिल said...

http://notification.travian.in/?box&ad=10235_1114950120&ce_cid=000xQTjAcqtP15N.RG5Ysiq4eh000000

आपके किसी भी ब्लॉग पर टिप्पणी करते वक्त उपरोक्त लिंक की साईट खुलती है जी
क्या चक्कर है??

प्रणाम

योगेन्द्र मौदगिल said...

na amma, na dane, na bharat na pakistaan......

aajkal to har sirfira
ban ne ko aatur hai shrimaan....

शोभना चौरे said...

सही तो है
"घर में नहीं है दाने अम्मा चली भुनाने "
अब अम्मा को तो ऐसे ही अच्छा बनना पड़ेगा न ?

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

सुबह खबर पढ़कर मेरे मस्तिष्क में भी यही बात कौंधी थी कि खाने को आटा नहीं, शौक नवाबो वाले !

नरेश सिह राठौड़ said...

भारत को भी कभी कभी दानदाता बनने देना चाहिए |

निशाचर said...

अजी गाँधी भी तो ६५ करोड़ दिलवाने के लिए अनशन कर रहे थे, गाँधी के भक्त क्या इतना भी न करेंगे ??

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बिलकुल सही... अपने यहाँ समस्याएं क्या कम हैं....?

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक शीर्षक ...यही हो रहा है

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अब जब वोट का सवाल हो तो कुछ भी करेगा.. वह लात मारे हम कालीन हो जाते हैं....

प्रवीण पाण्डेय said...

जय परोपकारी जीव।

Arvind Mishra said...

बिलकुल सही मुहावरा है !

देवेन्द्र पाण्डेय said...

ऐसे समाचार पढ़कर ऐसे ही उदगार आते हैं।

सुशील बाकलीवाल said...

घर का पूत कंवारा डोले,
पाडोसी का फेरा पाडे.

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

हो सकता है इस सस्ती डील में ऊपर का कुछ कमीशन मिल रहा हो किसी को...............जो कुछ दिन बाद एक घोटाले के रूप में पता चले.

आलोक मोहन said...

इसे कहते है चिराग तले अँधेरा
http://blondmedia.blogspot.com/2011/04/blog-post.html

G.N.SHAW said...

दानवीरता इस देश की परम्परा रही है ! इसी का नाम भारत वर्ष है और दानी अपनी दशा नहीं देखते !

मदन शर्मा said...

हमारा देश पुराने समय से ही दानियों का देश रहा है. यहाँ कुपात्र सुपात्र नहीं देखे जाते. हमने तिब्बत चीनीओं को दान कर दिया. आधा कश्मीर दुसरे देशों को दान कर दिया. अखंड भारत के विभिन्न अंगों को जाने किसे किसे दान कर दिया .
आज गुड फ्राई डे के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं आपको !!

ZEAL said...

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सब गांधी जी की औलादें हैं न । एक गाल पर थप्पड़ मिले तो दूसरा आगे कर दो , लेकिन उफ़ न करो।

यहाँ बड़े-बड़े कारखानों में बिजली की आपूर्ति नहीं है , उत्पादन , खपत से काफी कम है , जिसके कारण बिजली महँगी है और समान भी महंगे हैं। grid failure हो रहे हैं । लोग बिजली की कमी से छटपटा रहे हैं, लेकिन भारत-भूमि की ऋषि संतानें किसी दानवीर कर्ण से कम नहीं ।

" घर फूंक तमाशा देख "

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nivedita said...

सच है ....शायद ऐसा कर के हम अपने अहं को दुलरा लेते हैं ......आभार !

Kunwar Kusumesh said...

कहावत सटीक लगाई है आपने ,वाह.

संजय भास्कर said...

यही हो रहा है...बिलकुल सही

खुशदीप सहगल said...

तन पर नहीं लत्ता, दूसरों को पान खाए अलबत्ता...(साभार अनूप शुक्ल)

ज़िंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा...

जय हिंद...

mahendra verma said...

आखिर दानवीर कर्ण की धरती है यह...।
शीर्षक का व्यंग्य सब कुछ कह रहा है।

संगीता पुरी said...

आखिर दानवीर कर्ण की धरती है यह..

जाट देवता said...

राम-राम जी,
ये भारत अजीब निराला है, यहाँ हर कहीं गडबड घोटाला होता ही रहता है।
इन नेताओ की चले तो आधे कश्मीर की तरह, आधा देश ही पाकिस्तान बना दे।

एम सिंह said...

राज भाटिया जी, मैं तो मानता हूँ कि हमारे इर्द गिर्द ऐसे बहुत सारे महाज्ञानी गधे रहते हैं. इन्ही लोगों का तो तंत्र है, मतलब लोकतंत्र.

Vijay Kumar Sappatti said...

raj ji
yahi to hote aa raha hai , kayi barso se,, islilye hamare desh me aaj bhi 5 lakh gaanv me bijli nahi hai ..

bahut acchi baat kahi aapne ..

badhayi

मेरी नयी कविता " परायो के घर " पर आप का स्वागत है .
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/04/blog-post_24.html

निर्मला कपिला said...

ाब क्या कहें सरकार को अपने घर मे पूरी पदती नही और पडोसियों को आमन्त्रण। शुभकामनायें।

Coral said...

महान है हम....