22/01/11

फ़ेस बुक से चोरी का माल आप सब के लिये

अजी थोडी मेहनत आप भी करे, इस पर किल्क करे फ़िर पढे..

44 comments:

अन्तर सोहिल said...

हा-हा-हा
बच्चे का नाम फत्तू था

प्रवीण पाण्डेय said...

हा हा।

ललित शर्मा said...

मस्त आयटम है जी :)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मुंडा जल्दी बड़ा हो गया।

डा. अरुणा कपूर. said...

Wah!...bilkul sahi javaab diyaa jee!

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

waah re kalyug.......

western culture ka ek or udahran..

Rahul Singh said...

बालक तो तत्‍वज्ञानी जान पड़ता है.

संजय भास्कर said...

WAHHHH KYA BAAT HAI........

सुज्ञ said...

आपने फ़ेस बुक से चोरी की यह आपकी सोच है।
इस बात हमें गुदगुदी होगी यह आपका वहम है।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत उम्दा...

anshumala said...

सच में अब बच्चे ऐसे ही हो गये है |

Kajal Kumar said...

लेकिन बच्चे का जवाब है तो सही ही
:)

Mithilesh dubey said...

????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????

rashmi ravija said...

बहुत ही रोचक ...:)

अभिषेक मिश्र said...

क्या बात है!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चोरी का ऐसा ही माल उडाया जाता है :)

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

जरूर जीनियस होगा ( हमारी सोंच ) ...... और शायद बचपन की उम्र में गलती से पचपन का रोग लग गया होगा. (हमारा वहम )

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत बढ़िया ...सच में आजकल बच्चों को छोटा समझाना वहम ही है....

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

*समझना

Vivek Rastogi said...

वाह जी वाह !!

मनोज कुमार said...

मज़ेदार है!!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

मजा आ गया जी। शुक्रिया।

Manoj K said...

बच्चे बड़े हो गए...

girish pankaj said...

sundar kavitaa dee hai aapne.

Vijai Mathur said...

.बड़ा सटीक व्यंग्य है.

डा० अमर कुमार said...


भाटिया जी.. आप भी ना

hem pandey said...

हम सब वहम में ही जी रहे हैं |

P.N. Subramanian said...

मजा आ गया.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

बहुत बढ़िया रहा यह चोरी का माल!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

बहुत बढ़िया रहा यह चोरी का माल!

ZEAL said...

.

Unfortunately , teachers enjoy such answers.

Loss of ethics , moral values and culture is very well depicted in this small poetry.

I wish readers must not read it as a joke but try to see this as a sarcasm on the current state of affairs.

Pathetic state of children !


.

Dr. Amar Jyoti said...

Zeal से सहमत.

Arvind Mishra said...

अले ले ले तो तू बड़ा हो गया है रे मेरा लल्लू !हा हा हा !

Radhe Radhe Satak Bihari said...

जनाब जाकिर अली साहब की पोस्ट "ज्‍योतिषियों के नीचे से खिसकी जमीन : ढ़ाई हजा़र साल से बेवकूफ बन रही जनता?" पर निम्न टिप्पणी की थी जिसे उन्होने हटा दिया है. हालांकि टिप्पणी रखने ना रखने का अधिकार ब्लाग स्वामी का है. परंतु मेरी टिप्पणी में सिर्फ़ उनके द्वारा फ़ैलाई जा रही भ्रामक और एक तरफ़ा मनघडंत बातों का सीधा जवाब दिया गया था. जिसे वो बर्दाश्त नही कर पाये क्योंकि उनके पास कोई जवाब नही है. अत: मजबूर होकर मुझे उक्त पोस्ट पर की गई टिप्पणी को आप समस्त सुधि और न्यायिक ब्लागर्स के ब्लाग पर अंकित करने को मजबूर किया है. जिससे आप सभी इस बात से वाकिफ़ हों कि जनाब जाकिर साहब जानबूझकर ज्योतिष शाश्त्र को बदनाम करने पर तुले हैं. आपसे विनम्र निवेदन है कि आप लोग इन्हें बताये कि अनर्गल प्रलाप ना करें और अगर उनका पक्ष सही है तो उस पर बहस करें ना कि इस तरह टिप्पणी हटाये.

@ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा "और जहां तक ज्‍योतिष पढ़ने की बात है, मैं उनकी बातें पढ़ लेता हूँ,"

जनाब, आप निहायत ही बचकानी बात करते हैं. हम आपको विद्वान समझता रहा हूं पर आप कुतर्क का सहारा ले रहे हैं. आप जैसे लोगों ने ही ज्योतिष को बदनाम करके सस्ती लोकप्रियता बटोरने का काम किया है. आप समझते हैं कि सिर्फ़ किसी की लिखी बात पढकर ही आप विद्वान ज्योतिष को समझ जाते हैं?

जनाब, ज्योतिष इतनी सस्ती या गई गुजरी विधा नही है कि आप जैसे लोगों को एक बार पढकर ही समझ आजाये. यह वेद की आत्मा है. मेहरवानी करके सस्ती लोकप्रियता के लिये ऐसी पोस्टे लगा कर जगह जगह लिंक छोडते मत फ़िरा किजिये.

आप जिस दिन ज्योतिष का क ख ग भी समझ जायेंगे ना, तब प्रणाम करते फ़िरेंगे ज्योतिष को.

आप अपने आपको विज्ञानी होने का भरम मत पालिये, विज्ञान भी इतना सस्ता नही है कि आप जैसे दस पांच सिरफ़िरे इकठ्ठे होकर साईंस बिलाग के नाम से बिलाग बनाकर अपने आपको वैज्ञानिक कहलवाने लग जायें?

वैज्ञानिक बनने मे सारा जीवन शोध करने मे निकल जाता है. आप लोग कहीं से अखबारों का लिखा छापकर अपने आपको वैज्ञानिक कहलवाने का भरम पाले हुये हो. जरा कोई बात लिखने से पहले तौल लिया किजिये और अपने अब तक के किये पर शर्म पालिये.

हम समझता हूं कि आप भविष्य में इस बात का ध्यान रखेंगे.

सदभावना पूर्वक
-राधे राधे सटक बिहारी

वन्दना said...

सही तो कह रहा है………हा हा हा

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

हास्य अच्छा है, मगर आज की स्थिति भी यही है

Alok Mohan said...

ha ha ha ha
had hai

ज्योति सिंह said...

bachcho ki soch ka jawab nahi ,bahut badhiya .gantantra divas ki badhai ,vande matram .

ZEAL said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

Vijai Mathur said...

आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.

महेन्द्र मिश्र said...

गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ...

Kunwar Kusumesh said...

गणतंत्र दिवस की आपको हार्दिक बधाई

Sawai Singh Raj. said...

आप सभी कों गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें !

Coral said...

आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं!