15/01/11

हमारे बचपन की स्कूल की फ़ोटो ओर दो अन्य फ़ोटो

यह चित्र तो मैने बस युही मजाक मे डाल दिया था, लेकिन आप सब ने इसे पहेली बना दिया, ओर मुझे भी बहुत रोचक लगा, अब मै बताता हुं मै कहां बेठा हुं, ओर साथ मे अपने बचपने के दो चित्र भी दे रहा हुं...

नीचे चित्र मे देखे, नीचे से दुसरी लाईन मे एक बच्चा सलाम या सेलूट मार रहा हे इसी लाईन मे आगे चले यानि इस  से आगे एक बच्चा छोड कर, जिस बच्चे ने बन्द गले का स्वेटर पहन रखा हे या इसी लाईन मे तीसरा बच्चा, अब सबूत के तॊर पर आप को अपने दो अन्य चित्र भी साथ मे दे रहा हुं, एक मे लडकियो की तरह दिखाई देता हुं( इसी लिये मुझे लडकियो से बहुत प्यार हे :) ) दुसरे मे एक सरदार सा दिखाई दे रहा हू.



फ़ोटो को बडा करने के लिये फ़ोटो पर किल्क करे









अब बहुत से साथियो ने सही पहचाना , जेसे... ज्ञानचंद मर्मज्ञ जी ने कहा नीचे से दूसरी पंक्ति में बांये से तीसरे !
फ़िर जबाब आया anshumala  जी का उन्होने कहा कि...नीचे से दूसरी लाइन में जिस तरफ बच्चा सलामी ठोक रहा है उस तरफ से तीसरे | पर ये बताइये की सही बताया तो मिलेगा क्या | आप जो कहे मै दुंगा!!
फ़िर जबाब आया   दर्शन लाल बवेजा  जी का उन्होने भी कहा नीचे से दूसरी पंक्ति में बांये से तीसरे !
ऎसा था हमारा बचपन, मैने अपना बचपन कई शहरो मे बिताया हे पंजाब के होशियार पुर मे जन्मा, फ़िर हिमाचल मे एक गांव निग्गी मे , फ़िर दिल्ली, फ़िर आगरा, फ़िर नेपाल, फ़िर दिल्ली, फ़िर रोहतक ओर भी  कई शहरो मे रहा, यानि हम जन्म से ही विदेशी थे, ओर होशियार पुर कभी दोवारा नही गया.
आप सभी का धन्यवाद मेरे चित्र को देखने ओर दाद देने ओर पहचानने के लिये, ओर बताईये यह दो नये चित्र केसे लगे,

30 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

बहुत अच्छा लगा आपके बचपन के चिक्ष देखकर!

Mithilesh dubey said...

बहुत बढिया लगा आपको देखकर ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

तो बचपन में आप भी सरदारम् थे।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बिल्कुल जासूस लग रहे हैं.. शक्ल सूरत बदलने में माहिर..

mahendra verma said...

आपके बचपन की फोटो बहुत अच्छी लगी।

निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर चित्र हैं दोनो ही । तो इस बार जब आयें तो होशियारपुर भी जरूर जायें अपनी जन्मभूमि पर। और फिर नंगल तो पास ही है। शुभकामनायें।

प्रवीण पाण्डेय said...

यह चित्र पहले ही भेज दिये होते तो बता देते।

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

राज जी , पहचाना तो हमने भी वही यानि नीचे से दूसरी का तीसरा , बस दाये बाये का चक्कर मेँ उलझकर उल्टा लिख दिया था।
वैसे बहुत ही सुन्दर तस्वीर है और उससे भी सुन्दर बात कि आप ने सम्हालकर रखा है इतने अच्छे से।

Kajal Kumar said...

कुछ इसी तरह की एक स्कूली फोटो मेरे बचपन की भी है... पता नहीं कहीं संभाल कर रखी गई है.. निर्मला जी की बात से मैं भी सहमत हूं कि आपको होशियारपुर जाने का कोई बहाना ज़रूर निकालना चाहिये..

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

Yani mera tukka flop rahaa. :)

सैयद | Syed said...

ह्म्म्म ... अब जा कर पहचाना... :)

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (17/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

Vijai Mathur said...

आपके सभी चित्र ये दोनों भी आकर्षक हैं.हम भी आगरा में ३४ वर्ष रहें हैं.

Meenu Khare said...

फोटो देख कर मज़ा आ गया.वैसे काली सफेद फोटो की बात ही कुछ और थी.

मनोज कुमार said...

पुराने दिनों की याद ताज़ा हो गई।

सुलभ § Sulabh said...

तस्वीरें देख बहुत ख़ुशी मिली.
स्वच्छ समाज निर्माण के लिए आप बचपन से ही गंभीर दिख रहे हैं.
नेपाल में किस शहर में प्रवास रहा आपका?

राज भाटिय़ा said...

नमस्कार आप सभी को, मुझे सिर्फ़ दिल्ली , रोहतक ओर आगरा की याद हे बाकी नेपाल, पटियाला, हिमाचल बगेरा बगेरा कुछ याद नही, जेसे होशियारपुर की कोई याद नही, नीचे दी फ़ोटो की भी कोई याद नही,कोई भी लोग याद नही रहे एक दो को छोड कर. आप सभी का धन्यवाद

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बचपन की फोटो बहुत अच्छी लगी....

संजय भास्कर said...

फोटो देख कर मज़ा आ गया

वाणी गीत said...

बचपन तो सच्चा और मासूम होता ही है ...
सुमधुर यादें !

रचना दीक्षित said...

बहुत अच्छी लगी फोटो ।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

दोनों ही तस्वीरें बहुत ही प्यारी हैं !
नहीं मालूम होने पर लोग भाई बहन समझेंगे !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

JHAROKHA said...

aadarniy raj ji
jab aapne itne saare hits de rakhen hain to aapko pahchanane me bhul kaise ho sakti hai.ek photo me to aap vastav me ladki hi lag rahen hain agar aapne bataya na hota to shayad aapko pachan nahi paate.
bahut hi badhiya bachpan ki tasveeren.
poonam

ZEAL said...

बहुत कम ऐसा होता है की बचपन से मिलता जुलता चेहरा हो। लेकिन आपका चेहरा हूबहू आज के face से मिलता है । पहचानना मुश्किल नहीं। बचपन की तसवीरें अच्छी लगीं।

रंजना said...

waah !!!!

rashmi ravija said...

बचपन की तस्वीरें बड़ी प्यारी लगती हैं.
ख़ूबसूरत यादें...फोटो के माध्यम से

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय राज भाटिया जी

वैसे तो कहीं ताक-झांक सही नहीं … लेकिन आपके बचपन में झांकना बहुत अच्छा लगा ।
शुरू से ही आप तो क़्यूट रहे हैं …

~*~ हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !~*~
शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

हरकीरत ' हीर' said...

हा...हा...हा.....
राज़ जी आपकी बचपन की तसवीरें देख तो मज़ा आ गया .....
आप तो पक्के सरदार थे ...फिर .....?
पहले माँयें इसी तरह लम्बे बालों की वजह से लड़कों को लड़की बना देतीं थी ....!!

Kunwar Kusumesh said...

बचपन की मजेदार यादें .

G M Rajesh said...

badal sakti hai shakal
aage ke shabd kya ho aap soche?

vaise ek chhote sardaar ko dekha
ab ek mona se milte hai