27/06/10

आइये मेले की तेयारी करे...(हमारे गांव का मेला)

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आईये आप को हम अपने गांव के मेले मे ले चले, अजी मेले के तो चित्र आप को बाद मै दिखायेगे, उस से पहले मेले की तेयारी तो देखे.... ऊपर वाले विडियो मै एक बुजुर्ग बेंड बाजे की अगुवाई कर रहा है, ओर यह बेंड बाजा किराये का नही किसी शोकिया ग्रुप का है जो शान बान से मेले की ओर बढे जा रहे है.....
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इस ऊपर वाले विडियो मै बाद मै गांव के बडे बुजुर्ग आते है, अपनी अपनी  पोशाक मै, विडियो के अंत मै एक बुजुर्ग आप को दिखेगे टोपी वाले, असल मै यही पोशाक यहां कि है, ओर टोपी मै एक पंख लगा है,ओर तरह तरह के झंडे लिये यह लोग भी मेले कि ओर जा रहे है....

videoओर इस तीसरी विडियो मै हमारे गावं के फ़ायर बिर्गेड वाले है, जिन मै कई तो मुफ़त मै काम करते है, यह भी आज अपनी बर्दी ओर अपने झंडे के संग मेले का उदघाटन करने आये है...


videoओर इस विडियो मै बावेरिया के लोगो कि असली पोशाक है, यह लोग खास खास मोको पर ही यह पोशाक पहनते है, यह निक्कर या पुरी पोशाक बहुत मंहगी होती है, ओर महिल्यो की पोशाक भी उतनी ही मंहगई होती है जितन पुरषो की, फ़िर बंदुक ओर अन्य हथियार( अन्य हथियार इन के पास नही है) लेकिन लोगो के गले मै मेडलो की माला भी पडी हुयी है, यह लोग आस पास के छोटे छोटे गावं से अपने अपने झंडे ले कर यहां मेले की शोभा बढाने आये है, ओर यह मेला पुरे पांच दिन चलता है, लेकिन मेले से ज्यादा रोनक इन जलुसो मै होती है, मेले मै तो यह लोग सिर्फ़ हाल मै बेठ कर बियर ही पीते है.
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इस ऊपर वाली विडियो मै जो बेंड वाजा है ओर जो लोग इस मै शामिल है वो मेले मै अलग अलग काम करने वाले है, कोई वहा गीत गाने वाला है तो कोई वहां बीयर देने वाली है, तो कोई वहां किचन मै काम करने वाला है, तो कोई बर्तन मांजने वाला, लेकिन सब मिल कर ओर शान से आगे बढ रहे है, ओर यहा बर्तन मांजने वाले की भी उतनी ही इज्जत है जितनी गांव के सरपंच की, मेने टुकडे टुकडे कर के खास खास सिन ही इस विदियो मै डाले है, वर्ना तो यह जलुस एक डेढ घंटे चलता.


videoओर इस अंतिम विडियो मै है हमारे गांव के वह लोग जो हमारे गाम्व की कमेटी मै ओर दफ़तर मै काम करते है, ओर फ़िर घोडा गाडी पर हमारे गांव का सरपंच अपनी बीबी ओर बच्चे के संग बेठा सब को हाथ हिला हिला कर नमस्ते कर रहा है, ओर उस की घोडा गाडी के पीछे एक ओर घोडा गाडी है जिस मै बीयर के बडे बडे ड्राम पडे है, ओर सरपंच  मेले मै पहुच कर सब से पहले एक ड्राम से बीयर निकाल कर मेले का उदघाटन करेगां उस के बाद हमारे गांव का मेला शुरु जो पुरे पांच दिन चलेगा, मेले के चित्र  मै अगली पोस्ट मै डालूंगा, सभी विडियो मैने लम्बे नही रखे, ताकि आप लोगो को देखने मै ज्यादा समय ना लगे, तो बताईये केसा लगा हमारे गांव के मेले का उदघाटन,
दुनिया का सब से बडा मेला मुनिख मै लगता है, जो करीब सितम्बर के अन्त मै ओर अक्तुबर के पहले सप्ताह के आसपास लगता है, उस मेले का जलूस कई घंटे चलता है, ओर वहा आने वाले मेहमान करोडो मै होते है.
ओर इस मेले को देख्कर मुझे एक गीत याद आता है कि चलुघी तेरे संग मेले मै लेकिन छोए को नही ऊठाऊंगी, यानि एक पत्नी अपने पति से कहती है कि मै भी जोर जबर्दस्ती से तेरे संग मेले मै जाऊंगी ओर लडके को भी नही ऊठाऊंगी
तो बताये केसा लगा यह हमारे गांव का मेला

21 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह क्या बात है. बिंदास.
अपने गांव यूं घुमाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत मजेदार वीडियो हैं!
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सुन्दर रहा मेले का चित्रण!

rashmi ravija said...

घर बैठे आपके गाँव के मेले की सैर कर ली...
बहुत बहुत शुक्रिया

मनोज कुमार said...

बहुत सुंदर संकलन गांव के विभिन्न आयामों का।

Arvind Mishra said...

अपुन के लिए तो यह पराये देश के गाँव का मेला आपके रहने से प्रिय हो गया -और है भी शानदार !

डा. अरुणा कपूर. said...

इस मेले की सैर का बहुत मजा आया....उस बियर फेस्टिवल मेले की सैर भी आपने हाल ही में की होगी, जो हर साल होता है!...पिछ्ले साल मैने भी उस मेले की सैर की थी...आपका और मेरा परिवार साथ साथ था!...अर्लांगन मे...बडा मजा आया था!

Jandunia said...

गांव के मेलों की बात ही निराली है। आपकी पोस्ट पसंद आई

निर्मला कपिला said...

वाह बहुत्6 सुन्दर लगा मेला। वेडिओ कमाल के हैं धन्यवाद।

ललित शर्मा said...

मजा आ गया जी आपके गांव का मेला देख कर।
लेकिन आप नहीं दिखे मेले में। दिखते और भी मजा आता।
लगता है आपके गांव में बिना बियर के कोई काम नहीं होता।
अब बताईए हम भी बिना बियर के ही मेला देख रहे हैं।
मेला है एकाध ड्रम तो इधर भी भी भिजवाईए,फ़िर यहां भी मेला है। हा हा हा

जी.के. अवधिया said...

वाह! मेले की तैयारी तो बड़ी जोरदार है!! अवश्य ही मेला भी शानदार होगा!!!

रंजन said...

जन्मदिन की देरी से शुभकामनाएँ..

अन्तर सोहिल said...

मजा आ गया जी बिना बीयर पिये
आपके गांव लोग भी बहुत सुन्दर हैं।
मुझे घोडे भी बहुत प्यारे लगे, शायद जर्मनी के घोडे दुनिया भर में मशहूर हैं।
मेले के बारे में और बातें भी बताईयेगा जी
किसी की याद में या किस खुशी में लगता है, यह जुलूस कहां से शुरू होता है और कहां खत्म होता है और आप इस मेले में कैसे भाग लेते हैं।

प्रणाम

Akshita (Pakhi) said...

अले वाह, कित्ता मजेदार मेला..मजा आ गया.


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'पाखी की दुनिया' में इस बार 'कीचड़ फेंकने वाले ज्वालामुखी' !

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया ......आनंद आ गया !

ज्योति सिंह said...

blog ke jariye mele ka aanand utha liya ,sundar sabhi kuchh .

सुलभ § Sulabh said...

मजा आ गया... विडियो भी खूब सुन्दर बनाए आपने... आपके होने से कितना प्रिय लग रहा है सचमुच यह पराया देश. जय हो इस मेले की.
इंतज़ार है अगले दृश्य का.

अभिषेक ओझा said...

विडिओ तो मेरे यहाँ चल नहीं रहा. फोटो लगाइए तो देखूं. वर्ना एक वीक बाद ही देख पाऊंगा.

ajit gupta said...

मेले का कुछ इतिहास भी बताएं तो और भी आनन्‍द आएगा। बहुत अच्‍छी सोच है। भारत में भी रोज ही मेले लगते हैं लेकिन उस गाँव में सेवारत लोगों का जलूस खास बात है। अगली कड़ी का इंतजार रहेगा।

वर्षा said...

मजा आ गया।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अरे वाह भाटिया जी, जब तैयारी इतनी जोरदार है तो मेला तो वाकई गजब का होगा...आनन्द आया

राम त्यागी said...

बहुत मजेदार लगा :)