23/05/10

जाये तो जाये कहा???न वहां सुकून, न यहां चैन

पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की शिकायत लेकर भारत आने वाले हिंदुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

लेकिन सुक़ून की तलाश में अपना घर छोड़कर आए इन लोगों की मुश्किलें यहां भी कम नहीं हो पा रही हैं.

ताज़ा मिसाल राजस्थान के सरहदी ज़िले गंगानगर की है जहां हिंदू समुदाय के दो पाकिस्तानी युवकों ने अपनी शादी तय की.पुरी खबर पढने के लिये यहां चटका लगाये

15 comments:

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

देश के विभाजन की विडम्बना कभी खत्म नहीं होने वाली। दुःखद है यह सब, लेकिन क्या करें। पाकिस्तान एक नासूर सा है। इसका दिया दर्द मिटने वाला नहीं है।

दीपक 'मशाल' said...

सच कहा सिद्दार्थ जी ने.. ये त्रासदी इतनी आसानी से ख़त्म नहीं होने वाली. लिंक देकर ये आवश्यक समाचार पढ़ाने के लिए धन्यवाद सर..

Udan Tashtari said...

आभार इस समाचार को पढ़वाने का.

Arvind Mishra said...

oh!

वाणी गीत said...

बेचारे ...ना घर के ना घाट के ...!!

honesty project democracy said...

विचारणीय प्रस्तुती / कल दिल्ली के ब्लोगर सभा में जर्मनी से फोन से ही सही लेकिन भावनात्मक जुड़ाव के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद /

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सच में दुःखद है!

जी.के. अवधिया said...

इस समाचार को पढ़वाने के लिये धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय said...

भारत की सदाशयता का प्रतिफल भोग रहे हैं, ये सब । हम पप्पू ही बने रहेंगे, लगता है ।

सुलभ § सतरंगी said...

कितना तकलीफ है, ये समस्या पिछले कई वर्षो से बढती जा रही है.

पाकिस्तान से क्या उम्मीद करे कोई.

शिवम् मिश्रा said...

दुःखद है|आभार इस समाचार को पढ़वाने का|

रंजना said...

सचमुच ...कितनी त्रासद स्थिति है....

ताऊ रामपुरिया said...

इस खबर के लिये धन्यवाद.

रामराम.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हिन्दू अर्थात विडम्बना, विश्वासघात का शिकार और दुर्भाग्य का दूसरा नाम..

नरेश सिह राठौङ said...

विचित्र त्रासदी है ये |