24/05/10

आईये आज हम आप को अपने गांव के आस पास घुमा लाये

आज हमारे यहां करीब छ महिनो बाद इतना सुंदर मोसम हुआ, ओर आज गर्मी भी करीब +२६c के करीब थी, सोचा चलो एक लम्बा सा चक्कर मार कर आये,पहले हम ने एक तरबुज खाया, ओर फ़िर इस लम्बे चक्कर के लिये घर से निकले, पेदल ही, चलिये आप भी चले हमारे संग हम आप को अपना गांव भी साथ साथ मै दिखायेगे, पेदल पुरा एक घंटा लगता है, हम घाटी से जायेगे ओर फ़िर धीरे धीरे एक टीले नमुना पहाडी से होते हुये वापिस आयेगे, आप सभी चित्रो को बडा कर के भी देख सकते है, ओर जिन्हे कोई चित्र चाहिये तो ले सकता है
यह चित्र हमारे पाडोसी के घर की दिवार का है , बहुत सुंदर फ़ुल देखे तो एक दो चित्र लेने को मन हो गया...
चलो आज हम पांच सात किलो मीटर घुम आये
अरे अभी तो दो मिन्ट भी नही चले....अच्छा अच्छा फ़ोटो खिचवाने के लिये बेठे है....

यह जो सामने साईन बोर्ड सा दिख रहा है, यह कोई साईन बोर्ड नही है, बल्कि यह कुत्ते का मल फ़ेंकने के लिये लगा है, अगर आप अपने कुत्ते के संग घुमने निकले है ओर कुत्ते ने कही भी सडक पर या घास पर मल कर दिया तो आप यहां से ऊपर वाले डिब्बे से एक पलास्तिक की थेली निकाल कर, उस से मल को ऊठा कर इस नीचे वाले डिब्बे मै डाल दे, क्योकि हम मै से किसी को भी यह मल लग सकता है, ओर फ़िर हमे अपने गांव को साफ़ भी तो रखना है, जी नफ़रत??? तो ठीक है आप कुत्ता मत पाले, वर्ना बहुत भारी जुर्माना भुगतने के लिये तेयार रहे, अगर आप ने कानून का पालन नही किया तो.
सामने पगडंडी पर मेरे बच्चे, दोनो बेटे, ओर उन के लेफ़्ट साईड मै एक किसान कोई काम कर रहा है, ओर हमारे राईट साईड मै कल की कटी हुयी घास पडी है.
यह मोड कर अपने ट्रेकटर को सुखी हुयी घास की ओर ले जा रहा है
यह ट्रेकटर वाला सुखी हुयी घास को ऊठा कर अपनी ट्राली मै भर रहा है
किसान कल की कटी घास को जो सुख गई है, अपने ट्रेकटर से उलट पलट कर रहा है, ताकि कल तक सुख जाये
ऊपर वाला चित्र, किसानो ने मेदान मै घास काट ली है, जो आज ही काटी है, ओर सुख रही है
ओर यह चित्र हम ने लिया है गांव की ओर जाते समय काफ़ी आगे जा कर हम टीले पर पहुच जाते है धीरे धीरे..



यह चित्र जब हम टीले से आगे आ रहे है, गांव की तरफ़ तो किसी ने यहां यह क्रास की मुर्ती लगा दी है, हम सब यहां आते जाते इसे प्रणाम कर के जाते है
यह नीचे वाला चित्र भी टीले से ही लिया गया है, चारो ओर खेत ही खेत



यह चित्र हमारे घर से काफ़ी दुर से लिया है, हम एक टीले पर है ओर सामने नीचे आधा गांव है

34 comments:

महफूज़ अली said...

बहत सुंदर चित्रों के साथ .... सुंदर पोस्ट.... कुछ फ़ोटोज़ को वालपेपर के लिए सेव कर लिया है....

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अरे वाह राज जी. बहुत शानदार तरीके से आपने अपने साथ हमें भी सैर करवा दी, वो भी पैदल. सुन्दर, सजीव तस्वीरें. कुछ कड़े नियम हमारे देश में भी बन जायें तो कितना अच्छा हो.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर तस्वीरें हैं। लेकिन गांव कहां है? यह तो गाँव का बाहर हुआ।

सैयद | Syed said...

आह !! ६-७ किलोमीटर घुमा दिया आपने... थक गए अब तो... :(

लेकिन इन मनोरम दृश्यों के आगे थकन कुछ भी नहीं. .. :)

Mishra Pankaj said...

अच्छा लगा आपका गाव देखकर और साथ में सफाई का तरीका
काश ऐसा हमारे गाव में भी होता :(

राज भाटिय़ा said...

अगर मोसम दो चार दिन ओर अच्छा रहा था, आप को अपने गांव कि सडको ओर गलियो मै घुमायेगे, हाम इस पोस्ट मै एक फ़ोटो गायब हो गई है गेंहू के खेत वाली, वो डाल दुंगा

महफूज़ अली said...

अरे अभी तो मैंने आपकी पोस्ट पर कमेन्ट दिया था..... गायब हो गया.....

M VERMA said...

आनन्द आ गया दृश्यो वृत्तांत के साथ देखकर.

Jandunia said...

अच्छा लगा, गांव की याद ताजा हो गई

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

@mahfooj ali ji-gaayab aaya, aaya gaayab yaad dila diya...
aapka gaaon bahut khoobsoorat hai..

दीपक 'मशाल' said...

लगता है अब तो जल्दी ही आपसे मिलने का प्लान बनाना ही पड़ेगा सर.. :)

राम त्यागी said...

चलो मजा आ गया आपका गाँव देखकर ...में भी इधर शिकागो के एक गाँव में रहता हूँ और बड़ी मुस्किल से तापमान में गर्मी देखी है कुछ दिनों से
कल शिकागो गए थे तो पार्किंग मिलाना भी मुस्किल हो रही थी और बीच की हालत तो पूछो मत बस ...लोग पागल थे बहार निकलने के लिए
देखो इश्वर का खेल - भारत में लोग गर्मी से परेशान और हम इधर गर्मी की आश में परेशान

परमजीत सिँह बाली said...

आभार राज जी,बहुत बढिया सैर करा दी आपने आज।काश! हमारे यहाँ भी सफाई का इसी तरह ध्यान रखा जाता तो कितना अच्छा होता।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह भाटिया जी, प्रकृ्ति के नजारे लेते हुए आपके साथ साथ हम भी सैर कर लिए...चित्र एकदम बढिया आए हैं...

Arvind Mishra said...

अब आपके पैत्रिक /मातृभूमि के गाँव को देखने की इच्छा है !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

अच्छा तो जर्मनी के गाँव ऐसे होते हैं? भै वाह...!! गाँव शब्द से जो छवि बनती आयी है अबतक उसे तो आपने धराशायी कर दिया। :)

Ratan Singh Shekhawat said...

आपका गांव देखकर मन प्रसन्न हो गया | काश हम भी अपने गांवों को इतना साफ़ सुथरा रख सकें !

Udan Tashtari said...

बढ़िया सफर रहा आपके साथ मनभावन!

योगेन्द्र मौदगिल said...

Sheershak se laga Rohtak le jaoge par aapne to german gaon ki sair kara di par ye nahi bataya ki is gaon ka naam kya hai....?

जी.के. अवधिया said...

कई सालों के बाद पैदल घूमना हुआ जी, मजा आ गया घूम कर और आपका गाँव देखकर!

seema gupta said...

waah behd manbhavn or sjiv chitran...

regards

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

पोस्ट पढ़कर और चित्रों को देख कर
गर्मी में ठण्डक मिली!

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया लगा आपका गाँव देख कर !! आभार !!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह ! बहुत अच्छा लगा गांव घूम कर. घुमाई के लिए आपका धन्यवाद.

रेखा श्रीवास्तव said...

राज जी,

गाँव का नाम तो बता दीजिये, लगता नईं है की ये हमारे ही देश का गाँव है. आपने तो बस गाँव के बाहर चक्कर लगवा दिया अन्दर वालों से भी मिलवानाथा.

निर्झर'नीर said...

bhai jaan humen to pata hi nahi chala ki ye gaanv hai......aise bhi gaanv hai dunia mai tajjub hai
or is baat ka to bahut hi jyada ki kutte ke mal ko uthakar uski sahi jagah bhi daal dete h ........

yahan to kisi ko aisa kah bhi diya to usi ke ghar jake kutte ko halka karayega or sath m bandook bhi dikhayega .......

kash : ye mansik parivartan yahan bhi ho

माधव said...

ऐसा खुबसूरत गाँव तो पहली बार देखा है , ये तसवीरें कहा की है सर

mrityunjay kumar rai said...

nice

पी.सी.गोदियाल said...

फर्क साफ़ नजर आ रहा है हिन्दुस्तानी और यूरोपियन गाँवों का , खूब चित्रण, भाटिया साहब !

राजकुमार सोनी said...

खूब घूमा लेकिन थका नहीं। एक बार तो आना ही पड़ेगा आपका जलवा-जलाल देखने के लिए। बहुत ही शानदार।

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर गाँव है आपका ।

नीरज जाट जी said...

भाटिया साहब,
पहली बात तो ये कि आपने गांव का नाम नहीं बताया।
बहुत सुन्दर नजारे हैं। मैं आज ही दिल्ली से जर्मनी जाने वाली ट्रेन का स्लीपर में टिकट रिजर्व कराता हूं।

honesty project democracy said...

उम्दा और मनमोहक दृश्य दिखाती गाँव / शानदार प्रस्तुती /

नरेश सिह राठौङ said...

आपका गाँव तो बहुत सुन्दर लगा | हमें तो अब ईर्ष्या होने लगी है |