16/05/10

भ्रष्टाचार को जड से खत्म तो जनता कर सकती है......

भाई सच कह रहा हुं कि हम अपने देश मै फ़ेले भ्रष्टाचार को जड से खत्म कर सकते है, ओर फ़िर यही देश हमे स्वर्ग से भी अच्छा लगेगा, लेकिन उस से पहले जो कीटांणू भ्रष्टाचार के, जो खुदगर्जी के,अपने मतलब के, हमारा काम बन जाये जेसे तेसे के हमारे अंदर मोजूद है सब से पहले हमे इन से मुक्ति लेनी पडेगी.
थोडे दिन पहले मैने डा० प्रवीण चोपडा जी का एक लेख पढा था, जिस मै उन्होने कहा था कि एक फ़िल्म""Well Done Abba"" जरुर देखे, ओर मैने वादा किया कि मै इस फ़िल्म को कभी ना क्भी देखूगां,वेसे मुझे सदियां हो गई भारतिया फ़िल्म देखे, लेकिन कल रात बच्चे दोस्तो के संग गये थे, टिपण्णियां दे दी, ब्लांग लिखने का मुड नही था, ओर बीबी भी टी वी पर कोई अच्छा प्रोगराम ना आने के कारण बोर हो रही थी, तो सोचा चलो आज इस "Well Done Abba" फ़िल्म को देखा जाये...
सच कहुं कि फ़िल्म एक साफ़ बहुत अच्छी ओर साफ़ सुथरी है, एक सीधे साधे आदमी की, जो साधारण जिन्दगी जी रहा है, जिन्दगी हमारी तुमहारी तरह से ही है, फ़िर वो लोगो की परेशानियां महसुस करता है, ओर एक कुआं खुदवाने की कोशिश करता है जिस से गांव वालो को, पीने का पानी मुफ़्त मिल सके, ओर उस के खेतो को भी पानी मिल सके... ओर यह सारी कहानी भ्रष्टाचार की चाशनी मै डुबी हुयी उस कुये के चारो ओर चलती है.
लेकिन अंत मै हम सब को एक सबक दे जाती है कि हम किस प्रकार इस देश से इन भ्रष्टाचार बिमारी को दुर कर सकते है, यानि इस फ़िल्म मै बहुत बडा संदेश छिपा है, ओर हमारे सिस्टम की पोल पट्टी भी खोलता है.... तो जरु देखे इस फ़िल्म को, ओर फ़िर बताये केसी लगी यह फ़िल्म

32 comments:

Akhtar Khan Akela said...

bhrshtaachaar ke khilaaf aapki is maarmik apil kaa men smrthk hun aaj hm apne ghr privaar mohlle saathiyon ko iske prti jaagruk kr is abhiyaan ki shuruaat krte hen.akhtar khan akela kota rajathan my hind blog akhtarkhanakela.blogspot.com

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सटीक पोस्ट ....आभार
परशुराम जयंती पर हार्दिक शुभकामनाये ...

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत सटीक पोस्ट ....आभार
परशुराम जयंती पर हार्दिक शुभकामनाये ...

महाशक्ति said...

समाज प्रधान फिल्‍मे अच्‍छी होती है हम भी देखेगे

Arvind Mishra said...

विचारपरक -शुक्रिया !सशक्त भाव वीडियो

honesty project democracy said...

राज जी बहुत ही अच्छी प्रेरक प्रसंग को आपने उठाया है / सच है जिस दिन हमलोग जान की परवाह किये वगैर भ्रष्टाचार और खासकर भ्रष्ट मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों के खिलाप लड़ने की ठान लेंगे / उस दिन इस देश से भ्रष्टाचार क्या साडी बुराइयाँ दूर हो जाएँगी / आप जैसे लोगों को भारत आकर इसके लिए आवाज को बुलंद करने का काम करना चाहिए / तब जाकर इस मुहीम को ताकत मिलेगा /

वाणी गीत said...

अच्छी प्रस्तुति ...आभार ...!!

M VERMA said...

हम भी देखेंगे.
जो गीत लगाया है क्या वह उसी फिल्म की है?

पी.सी.गोदियाल said...

sahee kahaa bhaatiyaa sahaab, charity bigins at home.

डॉ टी एस दराल said...

अच्छी प्रस्तुति भाटिया जी । देखते हैं ये फिल्म।

डॉ टी एस दराल said...

अच्छी प्रस्तुति भाटिया जी । देखते हैं ये फिल्म।

डॉ टी एस दराल said...

अच्छी प्रस्तुति भाटिया जी । देखते हैं ये फिल्म।

प्रवीण पाण्डेय said...

मैं भी जाकर देखता हूँ यह फिल्म ।

राज भाटिय़ा said...

जी यह गीत इसी फ़िल्म का है

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

जनता कर सकती है - पर वह नेतृत्व को ताकती रहती है।

alka sarwat said...

फिल्म देखने की कोशिश करेंगे हम
और आपको सेंधा नमक भी भेज देंगे
पटरियां मत उखाड़ने की जुर्रत कीजियेगा वरना वहाँ कि पुलिस भी हमारे देश जैसी हो जायेगी .....

लेकिन आपका नीचे वाला लेख बहुत गंभीर और विचारणीय है ,निरुपमा काण्ड का तो देश भर में शोर व्याप्त है ही ,पर बेहया के पौधे कैसे नष्ट हों इस पर विचार मंथन बहुत जरूरी है
मकान बन्ने में वक़्त तो लगता है ,चलिए एक एक ईंट जुटायी जाए

बेचैन आत्मा said...

यह फिल्म तो मैंने भी देखि है...लाजवाब फिल्म है.
कुओं की चोरी का F I R और अंत में भ्रस्टाचारियों को मिलने वाले सम्मान का दृश्य अतंत रोचक व आँखें खोलने वाला है.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भाटिया जी, सही चिन्तनपरक पोस्ट....अब आप कहते हैं तो ये फिल्म देख ही लेते हैं...

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

गाना सुना - इसका ठनकाव अच्छा लगा !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

भ्रष्टाचार केवल जनता ही दूर सकती है वर्ना बाक़ी सब तो केवल काठ के उल्लू हैं.

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा विचार और उम्दा पोस्ट !!

Udan Tashtari said...

कोशिश करते हैं देखने की....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

भाटिया साहब, जो आदमी भ्रष्टाचार चिल्लाता है, वही मौका मिलने पर करने लगता है.. भारत में असम्भव है...

रश्मि प्रभा... said...

bahut sahi likha hai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ब्लॉगिंग से फुरसत मिली तो....!

जी.के. अवधिया said...

हमने तो कई सालों से फिल्में देखनी ही बन्द कर दी है किन्तु जब आप सिफारिश कर रहे हैं तो देखनी पड़ेगी इस फिल्म को।

अजय कुमार झा said...

विचारणीय पोस्ट है राज भाई , मगर शायद ऐसा तब हो पाएगा जब सभी ऐसा ही सोचें और महसूस करें ।

अभिषेक ओझा said...

बिलकुल सही सन्देश... ये फिल्म देखता हूँ.

दीपक 'मशाल' said...

आदरणीय भाटिया सर, ये फिल्म मुझे भी बहुत पसंद आयी थी.. अब मेरे कहने पर 'थैंक्स माँ' जरूर देखिये.. कुछ गालियों की वजह से बीच में मत छोड़ियेगा बल्कि अंत तक जाइएगा.. आपको जरूर पसंद आयेगी.

रंजना said...

bahut hi vicharparak lekh....

Awashya koshish karungi film dekhne ki...

शोभना चौरे said...

भाटियाजी
आपने बिलकुल सही कहा है यह फिल्म एक साथ कई संदेस देती है जैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर सही तरीके से उसपर अमल करना ,शिक्षा का सही सदुपयोग एक शिक्षित बेटी कैसे आत्मसम्मान के साथ समाज से लड़ सकती है |
मैंने भी जब ये फिल्म देखि थी तो उस पार पोस्ट लिखना चाह रही थी कितु आपने जानकारी देकर बहुत ही नेक काम किया है धन्यवाद |

दिगम्बर नासवा said...

Lagta hai dekhni padhegi film ... aaj kal samaajik vishyon par achhe film kam hi banti hain ...