27/05/10

आईये आज आप को अपने गांव के अंदर घुमा लाये भाग 3...

घर से निकल कर सब से पहले यह चित्र लिया, सामने एक बीयर वार है, थोडा आगे एक पिजरिया, एक सडक दाये मुड गई ओर एक बिल्कुल सामने....





आज सच मे बाते कम ओर चित्र ज्यादा, वेसे आज चित्र बहुत ही ज्यादा है इस लिये आधे चित्र आज ओर आधे चित्र कल की पोस्ट मै आप अगर मेरे इस नन्हे से गांव को देखना चाहे तो यहां क्लिक कर के देख सकते है ओर यहां मेरा गांव आप गूगल मेप से पुरा देख सकते है.

 जब मैने पीछे मुड कर देखा तो गांव का दुसरा हिस्सा भी मैने केमरे मै उतार लिया, यह सामने वाला लाल रंग का जो मकान दिख रहा है, यह दवाईयो की दुकान है





यह चित्र उसी सडक का है जहां नीचे बीयर वार देखा था, मै अब  ऊपर आ गया हू, वो सामने नीचे लाल पत्तो वाला पेड पिजरिये के ठीक  सामने है, ओर मेरे घर के बिलकुल नजदीक... चलिये अब आगे बढे...








यह सडक हमारे गांव की मेन सडक है, ओर मै खडा हुं इस समय पंचायत घर के बगल मै, इस चित्र मै बहुत दुर एक नीले ओर सफ़ेद रंग का एक बहुत बडा सा खम्बा दिख रहा है, इसे जर्मनी के हर गांव ओर शहर मै देख सकते है, इसे मई बाऊम( मई का पेड) कहते है, ओर इस पर छोटी छोटी तख्तियां जिन पर अलग अलग आकृतिया बनी है, कोई लोहार की कोई मोची

की तो कोई वकील की, कोई डाकटर की कोई बेक की यानि जिस जिस धंधे के लोग इस गांव मै रहते है उन सब की, ओर इसे पहली मई को बहुत धुम धाम से ओर इज्जत से यहां लगाया जाता है, ओर् पिछले मई बाऊम को शान से ऊतार कर उस के टुकडो को बेचा जाता है
इस  का अर्थ जो कोई अजनबी इस गांव या शहर मै आता है उसे पता चल जाता है कि यहा किस किस धंधे के लोग रहते है, नीला ओर सफ़ेद रंग बबेरिया के झंडे का रंग है.
मै अभी पंचायत घर के सामने ही खडा हुं, ओर यह चित्र सडक से दुसरी तरफ़,सामने एक छोटा सा पेट्रोल पंप है जो शाम ६ बजे तक खुलता है, फ़िर आटो मेटिक, यानि आप कार्ड से जितना पेट्रोल डालाना चाहे डाले, ओर उस के वायु मै एक छोट सा स्टोर है जहां से हम सुखा समान खरीद सकते है, हमारे गांव की यह इकलोती लाल लाईट है बच्चो के लिये आगे स्कुल जो है


अब मै नीचे से करीब २० कदम ऊपर आ गया हुं, यहां दो बीयर वार ओर रेस्टोरेंट है, जहां शुद्ध जर्मन खाना मिलता है मै एक बार ही यहां आया हूं, क्योकि हम लोग मीट नही खाते, ओर मै इस समय टीले के काफ़ी ऊपर भी आ गया हुं.



 यह मुर्ति इन की किसी देवी की है, ओर नीचे सेनिक बने है,  दुनिया की पहली लडाई जो १९१४ से १९१८ तक चली थी, ओर फ़िर दुसरी लडाई जो १९३९ से १९४५ तक चली थी उस लडाई मै मरे सेनिको की याद मै
 यह चित्र ओर  भी पहले वाले चित्र का ही एक रुप है यह थोडा दुर से लिया है, ओर इस के नीचे चारो ओर एक फ़ोव्बारा है जिस का पानी पीने लायक है
यह चित्र ऊपर वाले चित्र से ही लिया है, यह नीचे फ़ोब्बारे का है, जहां दिन रात साफ़ पानी बहता रहता है( सिर्फ़ गर्मियो मै) ओर इसे प्यास लगने पर हर कोई पी सकता है




 यह चित्र मैने ठीक फ़ोब्बरे के बगल से लिया है, नीचे यह सडक मेन सडक से मिल जाती है, ओर वो दुर सामने फ़िर से एक बीयर वार, बाबेरिया मै लोग बीयर बहुत पीते है, ओर बीयर यहां बहुत सस्ती भी है, यहां के लोग खुब लम्बे चोडे होते है, क्योकि इन का खाना ओर बीयर पीना इन की अलग ही पहचान है, लेकिन बहुत ही मिलन सार, दिक के द्यालू, अग्रेजॊ से बिलकुल अलग.

यह चित्र मैने फ़ोबबारे वाली सडक का ही लिया है लेकिन दुसरी तरह का, राईट साईड मै एक जनरल स्टॊर है, जहां खाने पीने का समान मिलता है, उस से थोडा आगे कापी किताबो की एक दुकान है, फ़िर उस से आगे एक प्रेस, फ़िर एक बीयर बार, दायी ओर सामाने बेंक की बिलडिंग है, ओर जो दाई तरफ़ दुर दो लाईटे दिख रही है, वहां  A  लिखा है उस का मतलब यहां दवाईयो की दुकान है.
जब आदमी दवाई ओर दुआ से ठीक ना हो तो वो फ़िर यहां आ जाता है, यह हमारे गांव का कब्रिस्थान है, ओर एक ही कब्र मै सारे खानदान को दफ़नाया जाता है, ओर परिवार वाले या फ़िर जान पहचान वाले या फ़िर जिन्हे जिम्मा दिया जाता है वो इन कब्रो पर फ़ुल चढने,  साफ़ सफ़ाई करने आते है.



 ओर इन कब्रो की खुब देख भाल होती है, कीमती से कीमती पत्थर लगाया जाता है जीते जी यह लोग आपस मै चाहे ना प्यार करे, अपने बच्चो के लिये इन के पास समय ना हो, लेकिन मरने के बाद उस के चाहने वाले घंटो यहां आ कर उस से दिल की बाते करेगे.....
 रोयेगे, अगले जन्म मै फ़िर से साथ निभाने का जिम्मा लेगे वादे करेगे, सफ़ाई आप को यहां हर तरफ़ मिलेगी, अगर कोई सडक पर कागज फ़ें दे तो दुसरा उसे झट से टोक देगा
यह सभी चित्र मैने कब्रिस्थान से ही लिये है, ओर यह कब्रिस्थान गांव मै मध्यम  ओर ऊचाई पर बना है, मैने यहा से पीछे गांव के कुछ हिस्से की फ़ोटो भी ली... शेष फ़ोटो कल की पोस्ट मै


आप मै से जो भी यहां आये मै उस का स्वागत  करुंगा, ओर मेरे पास जितना समय हुया घुमाने मै उतनी मदद भी जरुर करुंगा

27 comments:

shikha varshney said...

अरे इतना सुन्दर गाँव मेरे देखने से रह कैसे गया .....अभी पिछली कड़ियाँ देख कर आती हूँ

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत गाँव है! मैंने इतना सुन्दर गाँव कभी नहीं देखा! मनमोहक चित्र लगाये हैं आपने और देखकर तो अभी जाने का मन कर रहा है! बड़े ही सुन्दरता से आपने विस्तारित रूप से वर्णन किया है जो बेहद अच्छा लगा! उम्दा पोस्ट!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

इत्शे डंके! धन्यवाद!

महेन्द्र मिश्र said...

आपका गाँव तो बहुत ही जोरदार लगा फोटो देखकर पता चल जाता है.... फोटो बढ़िया हैं .. सुन्दर प्रस्तुति ...आभार

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर गांव है। अभी घूम रहे हैं। आप ने हमारी बहुत दिनों की इच्छा पूरी की है। गांव के कुछ लोगों को भी साथ के साथ मिलाते जाते तो और अच्छा लगता।

Arvind Mishra said...

अद्भुत -यह तो पूरा शहर है -हिट है आपकी यह सीरीज !

राजेश चौधरी said...

खाली खाली सड़कें..सुन्दर वर्णन!

Ratan Singh Shekhawat said...

ऐसे सुन्दर गांव हो तो लोग शहरों में बसना ही छोडदे |

विनोद कुमार पांडेय said...

राज जी यह गाँव कहीं भी किसी शहर से कम नही लग रहें बस भीड़ नही है..और हाँ आपकी यह प्रस्तुति सिरीज़ देख कर ऐसा लग रहा है जैसे हम जर्मनी की शैर कर रहें हो...बहुत बढ़िया प्रस्तुति..राज जी धन्यवाद स्वीकारें

Udan Tashtari said...

मजा आ गया घूम कर!! अब तो आना ही पडे़गा! :)

seema gupta said...

कितने सुन्दर चित्र हैं.......मनभावन....

regards

जी.के. अवधिया said...

मजा आ रहा है आपके गाँव में घूमते हुए!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

काश कि हमारे यहां के शहर आपके गांव जैसे हो सकें.

सुलभ § Sulabh said...

आप अपने गाँव को बहुत अच्छे से घुमा रहे हैं... हम एक एक चीज़ को समझ रहे हैं.... ये सफ़र जारी रहे. आपने मिलने की वहां आने की आशा जगा दी है.

Sanjeet Tripathi said...

ghum raha hu aapke sath hi aapke gaon me,
shukriya, lekin ek bat bataiye har sadak karib karib sunsan hi dikh rahi hai,aisa kyn?

अन्तर सोहिल said...

मुझे तो आप उस किसान के यहां गायों को नहलाने और देखभाल करने की नौकरी लगवा दें। तभी आ सकता हूं जी आपके गांव में

फोटोज के लिये हार्दिक धन्यवाद
अपने गांव के कुछ दोस्तों और पडोसियों से भी मिलवाते चलें जी, मजा आ रहा है

प्रणाम

rashmi ravija said...

बहुत ही अच्छी चल रही है यह सिरीज़ आनंद आ रहा है आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण ये गाँव देख.

sangeeta swarup said...

आपने तो घर बैठे ही अपने गांव की सैर करा दी...बहुत अच्छी प्रस्तुति

नरेश सिह राठौङ said...

बहुत सुन्दर गाँव है | ऐसा गाँव भारत में हो तो मै वही बसना चाहूँगा |इस प्रकार की रोचक जानकारी का आभार | समय मिला तो गूगल अर्थ के द्वारा भी आपका गाँव देखूंगा |

पी.सी.गोदियाल said...

भाटिया साहब, हमें तरसाते रहो , अपना गाँव दिखा दिखा कर ! पर जब मैं भी बहुत सारे पैसे वाला हो जाउंगा न तो अपने गाँव को भी ऐसा ही ख़ूबसूरत बनाउंगा !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यूं लगा मानो हम भी आपके साथ ही गांव में धूम रहे हों.

अरुणेश मिश्र said...

बहुत रोचक . प्रवाहपूर्ण एवं प्रशंसनीय रिपोर्ताज ।

anjana said...

कितना ही शांत और सुन्दर गाँव है आप का ।चित्र भी बहुत सुन्दर लिए है आप ने ।धन्यवाद गाँव की सैर करवाने का ..

नीरज जाट जी said...

भाटिया जी, अपने घर का भी तो फोटू दिखाओ। बल्कि यह तो पहले ही दिखाना चाहिये था।

दीपक 'मशाल' said...

खूब सारी रोचक जानकारियों के साथ भ्रमण कराया आपने.. बेहतरीन और आदर्श गाँव है.. आभार सर. पर क्या शाम को गोधूली बेला में गायें और धूल होती है? क्या कुंए पर गाँव की महिलायें अपने-अपने घड़े लेकर आती हैं? क्या घर में पाक रही कढ़ी की सुगंध पाकर बगल वाले घर से कोई कटोरी लेकर आता है? क्या वहाँ भी शाम को पंचायत के बाहर बड़े-बूढ़े मिल कर किस्सा कहानियाँ सुनाते हैं? अफ़सोस कि अब ये दुनिया के किसी गाँव में नहीं होता.. भारत में भी नहीं.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

बीयर की दुकाने बहुत है मेरे गांव मे भी कई घर मे कच्ची शराब बनती और बिकती है .

बेचैन आत्मा said...

खूसूरत फोटोग्राफी और सुंदर वर्णन.
वाह!
पंख होते तो उड़ आते रे..
मस्ती में झूम के गाते रे....

तेरा गाँव बड़ा प्यारा
मैं तो गया मारा
आके यहाँ रे..
आके यहाँ रे..
...आनंद आ गया..हम पूर्वी उत्तरप्रदेश वालों के लिए तो यह गाँव सपने देखने जैसा है.