24/04/10

शादी-शुदा नही होने का असली कारण, कल मुझे सपने मै पता चला अनिल जी

आप सब रोजाना सोते है, तो भाई हम भी आप की तरह से रोजाना ही सोते है, लेकिन जब कल सोये तो भगवान ने दर्शन दिये, बोले बच्चा मांग क्या मागंता है, मेने कहां भगवान अपून की कोई इच्छा नही, बस सब कुछ आप की मेहरबानी से चल रहा है, इस से ज्यादा इच्छा नही, वर्ना सुना है ज्यादा मिलने पर आदमी इंसानियत खो बेठता है, हम इसी मै खुश है.... अरे ऎसा केसे हो सकता है, कुछ तो मांगो... बहुत सोचा लेकिन कुछ समझ मै नही आया, मेने कहा भगवान किसी ओर को देखो, मेरा काम बाद मै कर देना जब जरुरत होगी आप को वादा याद दिला दुंगा, अभी कुछ नही चाहिये, तो भगवान बोले आज ओर अभी मांग ले फ़िर कभी ऒर के लिये भी एक वादा पक्का... तभी दिमाग मै एक विचार आया अरे अपने अनिल भाई.... मेने कहा है भगवान अगर मै अपने किसी मित्र के लिये मांगु तो चलेगा.... भगवान बोले चलेगा, तो मेने कहां है भगवान हमारे एक मित्र है अनिल जी, वो अभी तक कुवांरे है.. आप कोई ऎसा योग बनाये जिस से उन्हे एक मिश्री जेसे बोल बाली अति सुंदर तेजस्वी बीबी मिल जाये... अभी भगवान तथा अस्तू कहने वाले थे कि अचनक उन्होने पूछा अर्फ़े कही तुम उन छत्तीसगढ़ बाले अनिल पूदसकर की बात तो नही कर रहे? मेने हाथ जोड कर कहा भगवान सही पहचाना मै उन्ही सज्जन की बात कर रहा हुं.... ओर दीन भाव से भगवान का चेहरा देखने लगा...... फ़िर भगवान मुस्कुरा कर बोले बेटा पहले यह विडियो देख लो ओर गंगा राम की जगह अनिल को रखो फ़िर बताना यह काम मेरे बस का है या इसे तो अनिल खुद भी कर सकता है... देखो पहले इस विडियो को मै फ़िर आऊंगा... ओर इसे देख कर बताना इस आदमी की मदद मै केसे करुं??

23 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:))

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

:D

दीपक 'मशाल' said...

muskurahat bikher di aaj aapne blog par sir.. :)

परमजीत बाली said...

vaah!!:)

Tej Pratap Singh said...

sahi hai....maja aaya.

M VERMA said...

मजा आ गया
एक कौतूहल
क्या गाने के गंगाराम की जगह अनिल लगाकर सुने

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

Arvind Mishra said...

भाटिया जी आपने अगुवाई की है इस वर्ष हाथ पीले करा ही दिए जायं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

स्वप्न तो सुखद ही रहा आपका!
बहुत-बहुत मुबारकवाद!

Udan Tashtari said...

अब ऐसे में तो भाई को भगवान का सहारा भी जाता रहा. :)

नीरज जाट जी said...

कहां हैं अनिल जी अभी तक?
बाहर आओ, छुपकर कहां बैठे हो?

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अनिल भाई की आज खैर नहीं।

अजय कुमार झा said...

हा हा हा एक एक करके इतने बाराती तैयार हो रहे हैं अच्छा है

सतीश सक्सेना said...

तैयार होकर आता हूँ , स्मार्ट दूल्हा के साथ फोटो सही आना चाहिए ! राज भाई बढ़िया पहल कर रहे हो !

बी एस पाबला said...

पिछले साल अनिल जी के वादे पर सिलवाया गया सूट अब तक वैसा ही अछूता पड़ा है। देखते हैं कब मुहूर्त निकलता है।

वैसे अनिल जी बहुत समझदार हैं उनकी समझ में सब आ चुका है। वो तो बस यूँ ही गंगाराम बन कर चुपचाप हम लोगों को देखकर मुस्कुराते रहते हैं

राजकुमार सोनी said...

पूरा गाना भी सुन लिया गया। बचपन याद आ गया। इसका संगीत भी बड़ा धांसू है। गाने में जो गिटार व ड्रम का उपयोग हुआ है वह शानदार है। कोरियोग्राफी भी बड़ी जबरदस्त है। आपकी पसन्द की दाद देता हूं।

शिवम् मिश्रा said...

मजा आ गया............पर अनिल जी कहां हैं ?

ललित शर्मा said...

बेहतरीन :D

श्याम कोरी 'उदय' said...

...बहुत खूब ... दोबारा सपने में भगवान जी आने वाले नहीं जान पडते ...अगर आयें तो बयां कर देना भाटिया जी !!!!

दिगम्बर नासवा said...

Bhai Geet to sach mein majedaar hai ...

पी.सी.गोदियाल said...

:):)

खुशदीप सहगल said...

मुझे सपने में अनिल भाई इस गीत पर मेरे साथ जुगलबंदी करते दिखाई दिए...
मैं...मुहब्बत बड़े काम की चीज़ है...
अनिल जी...ये बस नाम ही नाम की चीज़ है...
मैं...ये कुदरत के इनाम की चीज़ है...
अनिल जी...ये बेकार, बेदाम की चीज़ है...

आगे पूरा ब्लॉगवुड एक सुर में अनिल जी के लिए गा रहा है...
मुहब्बत से इतना खफ़ा होने वाले,
चल आज तुझको मुहब्बत की कीमत बता दें,
तेरा दिल जो बरसों से वीरां पड़ा है,
चल उसमें किसी नाज़नीन को बिठा दे...

इसके बाद मुझे लगा कि अनिल जी की ट्रेडमार्क कड़कदार आवाज़ गूंजी है...अबे क्या बकवास कर रहा है बे..

और डर के मारे मेरी नींद खुल गई...

जय हिंद...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हा,,हा..हा,,,वाह्! भाटिया जी...खूब्!