18/04/10

एक जरुरी सुचना सब भारतीय लोगो के नाम से..... युरोप मै पिछले शुक्रबार से फ्लाइटें बंद है

नमस्कार आप सभी को, युरोप मै पिछले शुक्र बार से हबाई सेवा बंद करनी पडी, जिस के कारण करोडो लोगो को बहुत सी कठिनाईयो का सामना करना पड रहा है, मै जर्मनी के मुनिख शहर के पास रहता हुं, अगर आप के जान पहचान मै , कोई रिश्ते दार, परिवार का आदमी, कोई परिवार, मित्र, बच्चा या महिला मुनिख एयर पोर्ट पर फ़ंसे हो तो मुझे बताये जब तक हालात सही नही हो जाते तब तक वो मेरे मेहमान बन कर रह सकते है, वो आप मै से कोई भी भारतिया हो तो मुझे मेल करे, मै उन्हे इज्जत से अपने घर लाऊंगा एयर पोर्ट से, ओर खाना पीना ओर रहना सब मेरे  घर पर, जब हालात नार्मल हो जायेगे तो उन्हे एयर पोर्ट छोड्ना भी मेरे जिम्मे.... वो किसी भी धर्म के हो मुझे सब एक जेसे ही है, मेरा फ़र्ज अपने भारतियो को इस मुश्किल समय मै सहारा देना है.... मै आप के फ़ोन , आप सब के मेल का इंतजार करुंगा.

चित्र आप के मुख पर मुस्कान लाने के लिये दिया है

26 comments:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

भाटिया जी, कृपया फाईटें को फ्लाइटें कर लें.
आपकी सद्भावना के लिए धन्यवाद.

राजभाषा हिंदी said...

सद्प्रयास।

honesty project democracy said...

HUM AAPKE LIKHAWAT KE TRUTIYON KI JAGAH AAPKE BHAWNA KO DEKH YAH SOCHNE PAR WIWASH HAI KI AGAR AAPKI WAKEE AISI SOCH HAI TO AAP KALYUG KE BHAGWAN HAIN.AAP JAISE LOGON SE HI IS KALYUG MAIN INSANIYAT KI RAKCHHA HO RAHI HAI.INDIA MAIN AGAR AAPKO KABHI MANWIY AADHAR PAR SAHAYTA KI JAROORAT PARE TO KRIPA KAR HAMEN JAROOR YAD KIJIYEGA. BLOG KO INSANIYAT KE LIYE PRYOG KARNE KE LIYE DHANYWAD.

Udan Tashtari said...

हमारे मित्र तो यहाँ फंस गये हैं, जा नहीं पा रहे.

neeshoo said...

bahut sahi kaha aapne sir ji ....hum sabhi ko aise me logo ki maddat karni chahiye ..

Arvind Mishra said...

बड़ा दिल है आपका ...मुस्कराहट तो बरबस आ जायेगी !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

धन्यवाद भाटिया जी!

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अजी हम तो पहले से ही जानते हैं कि आप एक दिलदार आदमी हैं....

महफूज़ अली said...

आपको नमन....

Sanjeet Tripathi said...

shukriya sir.

अभिषेक ओझा said...

तस्वीर तो मस्त है :) हमारे बॉस फंसे हुए हैं लन्दन में... नहीं आ पा रहे तो आनंद है आजकल !

Vivek Rastogi said...

वाह इसे कहते हैं दिलदार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ओह...!
इससे तो प्रवासियों को
बहुत ही परेशानियाँ हो रही होंगी!

सतीश सक्सेना said...

आप किसी भी ईमानदार भारतीय के लिए, एक अनुकरणीय उदाहरण है राज भाई ! किसी समय गृहस्वामिनी को अन्नपूर्णा कहा जाता था , अतिथि सत्कार हमारे लिए सौभाग्य का विषय रहा है ! पुत्री को बहुत पहले समर्पित एक कविता की कुछ लाइनें दे रहा हूँ !
द्रढ़ता हो , सावित्री जैसी,
सहनशीलता हो सीता सी,
सरस्वती सी महिमा मंडित
कार्यसाधिनी अपने पति की
अन्नपूर्णा बनो, सदा ही घर की शोभा तुम्ही रहोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी

स्वागत करो अतिथि का पुत्री
मुख पर ले मुस्कान सदा ही
घर के दरवाजे से तेरे ,
याचक कभी न खाली जाए
मान करोगी अगर मानिनी , महिमामयी तुम्ही दीखोगी
पहल करोगी अगर नंदिनी , घर की रानी तुम्ही रहोगी !

जी.के. अवधिया said...

बहुत ही बड़ा सत्कार्य कर रहे हैं आप! आपकी यह घोषणा अत्यन्त सराहनीय है!

प्रवीण पाण्डेय said...

काश फँसे होते तो आप के यहाँ टिक कर पराँठे खा रहे होते ।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आपका धन्यवाद....

पी.सी.गोदियाल said...

भगवान् न करे कि किसी को इस तरह की परशानी झेलनी पद रही हो मगर आपका यह कह लेना मात्र ही एक बहुत बड़ी दिलासा है भाटिया साहब !

Jitendra Bagria said...

@ राज भाटिय़ा ji ....
shreeman hum to aapke yahan ghumne fir kabhi fursat mein hi aayenge :P

nice attempt :)

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह ये हुई न बात. आपने तो यह कह कर ही दिल जीत लिया. लेकिन जो लोग एसे में फंस गए हैं उनके साथ मेरी भी सहानुभूति.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अभिषेक ओझा जी की तो बल्ले बल्ले ही हो गई :)

rashmi ravija said...

आपकी उदारता के आगे ह्रदय नतमस्तक है...
फिलहाल तो शिखा वार्ष्णेय के पतिदेव का वापस लन्दन जाना टलता जा रहा है...शिखा के वापस जाने में अभी वक़्त है

zeal said...

Beautiful gesture !

saadar naman aapko

राज भाटिय़ा said...

@ honesty project democracy जी, मै भी आप सब की तरह से एक बिलकुल साधारण सा आदमी हु, मुझ मै भी वो सब बुराईयां है जो एक आम आदमी मै होती है, लेकिन किसी के काम आ सकू, किसी का दुख बांट सकूं यह मेरे लिये मंदिर जाने से ज्यादा खुशी देता है...
बाकी Jitendra Bagria ,प्रवीण पाण्डेय जी, ओर शेष सभी मित्र गण जब चाहे हमारे यहां आये सब का स्वागत है

नरेश सिह राठौङ said...

इतने नेक विचार ,इस कलयुग में बिरले लोगो के ही हो सकते है |दिल बाग बाग हो गया |

नीरज मुसाफिर जाट said...

वो... क्या नाम है... भाटिया जी.
हम फंस गये थे वहां पर। और फंस ऐसे गये थे कि मेल भी नहीं कर पाये।
खैर, रब्ब जी दी किरपा है कि सही सलामत बच गये।
वापस आ गये।