17/04/10

लो जी हम सड भुन के वापिस आ गये...

अरे पता नही यह मेरे साथ ही होता है क्या? मै जब भी कोई सीडी, डी  वी डी अपने लेपटाप मे डालता हुं, चलती नही, दस बार डालने के बाद चलती है, बच्चो ने भी ट्राई किया नही चली, तो मेने कम्पनी को फ़ोन किया, उन्होने मुझे सारे कागज पत्र मेल से भेज दिये, ओर दुसरे दिन सुबह पोस्ट  वाले ने मेरे घर से पाकेट ले लिया, एक सप्ताह तक मै इस मुये के बिना तडफ़ता रहा, फ़िर आया.... मेने झट से एक खुद बर्न की सीडी डाली, चल पडी मन खुश हो गया, फ़िर  बच्चे घर आये, उन्होने चेक किया सब ठीक ठाक.

फ़िर हम बाजार चलेगे, शाम को दोवारा इस को चेक किया, कोई सीडी नही पढ रहा, खुब भुन भुनाया, फ़िर साथ आये पत्र को पढा तो मालुम हुआ कि उन्हे कोई भी फ़ाल्ट नही मिला, ओर कम्पनी ने सिर्फ़ सोफ़ट वारे चेक किये जो सब ठीक थे, फ़िर बच्चो ने सीडी ओर डी वी डाल कर फ़िर देखा सब ठीक चल रही है, लेकिन जब मै डालता हुं तो .... चलती नही, मेरी कुछ समझ मै नही आया, ओर जब बच्चे मेरे पास आ कर इसे चेक करते है तो भी कोई सीडी नही चलती, पता नही कोई भुतनी इस लेपटाप मे घुस गई है, या कोई बुरी आत्मा ने इस मै वास कर लिया है, या फ़िर किसी अग्रेजी बोलने वाली बेनामी की टिपण्णी की आत्मा घुस गई है,

मेने कपनी को लिखा तो उन्होने इसे फ़िर मंगवाया, मेने मना कर दिया कि मै एक सप्ताह इस के बिना नही रह सकता, लेकिन कमपनी को मेने बहुत बुरा भला लिखा कि जब पहले भेजा तो अच्छी तरह से चेक क्यो नही किया......अब रोजाना उन की सलाह आती है,  अभी कुछ दिन आप के संग है फ़िर दिमाग थोडा  शांत होगा  तो सोचूगा...

22 comments:

Vivek Rastogi said...

सभी जगह यही हाल है अगर एक बार में ठीक कर दिया तो बेचारों का सर्विस सेंटर कैसे चलेगा

सुलभ § सतरंगी said...

कोई भुतनी?

ठीक से चलियेगा.

दीपक 'मशाल' said...

ye to bahut nainsaafi hai.. chaliye aap aaye to.

M VERMA said...

भुतनी का ईलाज ये कम्पनी वाले क्या जाने ---

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यहां तो उल्टा है...कंपनी को याद दिलाते-दिलाते आदमी बूढ़ा हो जाता है तब भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती.

जी.के. अवधिया said...

उस भूतनी से हम भी मिलने के लिये इच्छुक हैं।

Arvind Mishra said...

भारत से गयी भूतिनी लगती है ,दिनेश राय जी ने तो अपने पल्लू से आपमें तो नहीं गठिया दिया !

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

चलिये वहां कम्पनी वाले आते तो हैं>..

सतीश सक्सेना said...

राज भाई !
भूतनी वाली बात हो सकती है ....
:-)

Udan Tashtari said...

अरे, थोड़ा दूर ही रखिये..ये भूतनी का चक्कर बहुत बुरा होता है.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भाटिया जी, आप भी कहाँ कम्पनी वालों के चक्कर में फँस गए...भूत प्रेतों का इलाज उनके पास नहीं हमारे पास है......आप एक काम कीजिए कि मंगलवार सुबह सुबह बिना कुछ खाए पिए लैपटोप को अपने सामने किसी शुद्ध पवित्र आसन पर स्थापित कर लें...सामने धूप अगरबती जलावें और एक नारियल "जय बजरंगबली" बोलकर लैपटोप पर फोड दीजिए...कुछ देर हनुमान चालीसा का पठ करें तो समझिए थोडी देर में ही सारे भूत प्रेत भाग जाएंगें...गारन्टी से :-)

अमित जैन (जोक्पीडिया ) said...

अरे भूतनी को एक किस (kiss) ऑफर कर के देख लो , शायद उसे तरस आ जाये ....:)

पी.सी.गोदियाल said...

भाटिया साहब खरीदते वक्त धुप-वूप जलाई थी क्या लेपटोप के ऊपर :)

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ा समय खा जाती हैं ये समस्यायें ।

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

बस एक काम करें। पहले पता लगाएं कि वह है किस धर्म की। वहीं की हो तो चर्च से पानी मंगवा लें। मुस्लिम हो तो लोबान का इंतजाम कलें और यदि यहां से गयी हो तो कोई बात नहीं। अब पता लगाने के बाद जिस क्षेत्र से सम्बंध रखती हो उस जगह का पानी या लोबान इस्तेमाल कर जहां सी डी लगाते हैं ठीक वहीं हनुमान चालीसा का पाठ करें। एक बार आजमा कर तो देखें, शर्तिया इलाज है।
नोट : वैसे वहां हनुमान चालीसा की सी डी भी लगा कर मुसीबत से छुटकारा पाया जा सकता है।

किसी भी परेशानी के लिये मिलें,
स्वामी .........नंद।

अजय कुमार झा said...

ओह समस्या तो गंभीर है , भूतनी को कहिए कि अगले साल चीयर गर्ल्स में भर्ती करवा देंगे , बस अपने आप लैपटौप से उतर कर प्रैक्टिस करने चली जाएगी ।

नरेश सिह राठौङ said...

लगता है इतने भारतीय नुस्खे आपकी समस्या का समाधान जरूर कर देंगे |

दिगम्बर नासवा said...

किसी भारतीय से ठीक करवाना पढ़ेगा .....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आप किसी ओझा से सम्पर्क कीजिए!
बहुत से तो ब्लॉगिंग भी कर रहे हैं!

राज भाटिय़ा said...

डॉ महेश सिन्हा जी ने यह कमेंट मेल से भेजा है...
बच्चों ने जरूर कुछ शरारत की है :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस सुन्दर पोस्ट की चर्चा यहाँ भी तो है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_19.html

उन्मुक्त said...

लिनेक्स पर क्यों नहींकाम करते। उबुन्टू डालिये और मस्त रहिये।