17/03/10

सिर्फ़ मर्दो के लिये... एक चुटकला??

इस चुटकले को सिर्फ़ हंसी ओर मजाक के तॊर पर ले, अगर किसी को पढने के बाद कॊई ऎतराज हो तो अपने लेपटाप पर, या अपने पीसी पर सारा गुस्सा उतारे, कृप्या मेरी टांग ना खींचे, ओर इसे पढ तो कोई भी सकता है, लेकिन इसे अशील करार मत दे, क्योकि यह अशील जो नही........

मकखन  ढक्कन से ....ओये ढ्क्कन एक बात तो बता कि भारतिया नोटो पर गांधी जी की हमेशा ही मुस्कुराती हुयी फ़ोटो ही होती है. लेकिन अमेरिकन डालर पर तो लिंकन की एक भी फ़ोटू मुस्कुराती हुयी नही है???
ढक्कन..... सोचते हुये..... पता नही यार.
मकखन.... ओए  खोते( गधे) तेनू एना भी पता नही कि अमेरिकन जनानियां पेसे बरा चां नही रखदीयां.
हिन्दी मे मकखन.... अबे गधे तुझे इतना भी नही पता कि अमेरिकन ओरते अपने नोट बरा मै नही रखती,

24 comments:

जी.के. अवधिया said...

हमने पढ़ लिया, मुस्करा भी दिये और अश्लील बिल्कुल भी नहीं माना।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

no comments :D

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हमने तो आँख बन्द करके पढा :-)

Tarkeshwar Giri said...

ओह हो , तो ये बात है। अब पता चला गाँधी बाबा हमेशा हँसते क्यों है।

Arvind Mishra said...

:)

विजयप्रकाश said...

हा...हा...हा...
आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

:)

डॉ. मनोज मिश्र said...

:):):):)

Suman said...

nice

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

धत्‌... गान्धी जी तो ऐसे न थे। :)

मनोज कुमार said...

नवरात्रि की आप को भी बहुत बहुत शुभकामनाएं.

अभिषेक ओझा said...

:)

विनोद कुमार पांडेय said...

मक्खन ने तो बड़ी जानकारी वाली बात कही...मजेदार..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बढ़िया!

Anil Pusadkar said...

हा हा हा हा हा!

पी.सी.गोदियाल said...

हा-हा-हा-हा-हा-हा... तभी मैं कहूँ की बुढ्ढा इतना खुश क्यों रहता है !

ताऊ रामपुरिया said...

हे भगवान गांधीजी को ये शौक कब लगा?:)

रामराम.

AlbelaKhatri.com said...

गांधीजी के तो मज़े हैं साहेब ..........अपन सिवाय ईर्ष्या के और क्या कर सकते हैं

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

majedaar, aap jaise logon ke liye masti banaa hai.
kripya yahan bhi aayen...
http://thodisimasti.blogspot.com

Udan Tashtari said...

फोटो तो आपकी भी मुस्कराती हुई ही है..:)

Jandunia said...

मुस्कुराने का अच्छा बहाना है। रचना पर विशेष क्या टिप्पणी करे

महेन्द्र मिश्र said...

हाँ दादा
अशील नहीं है ... पढ़कर मुस्कुरा लिए...

ललित शर्मा said...

हा हा हा हा हा:)

खुशदीप सहगल said...

राज जी,
जो जगह आपने बताई है वहां नोट ही क्यों रखे जाते हैं, चेक क्यों नहीं...

बाउंस होने का डर जो रहता है...

जय हिंद...