12/02/10

चलिये आप को भारत ले चलाता हू , कुछ दिनो के लिये.... जहां बहुत सी बांहे मेरा इंतजार कर रही है

 नमस्कार, चलिये आप सभी को भारत ले चले, आज शाम को यानि ३१/१ को मेरे बेटे मुझे चार बजे के करीब मुनिख ऎयर पोर्ट पर छोडने आये, फ़िर सब ने उदास मन से विदाई ली, ओर कुछ समय बाद मै ब्रिटिश एयर वेज से लंदन की तरफ़ उड चला. करीब  दो घंटो मे हम वहां पहुच गये, फ़िर वहा से रात आठ बजे के करीब हम भारत के लिये बोंइग ७४७ से चल पढे, बाहर घुप अंधेरा था, जब जहाज अपनी उंचाई पर पहुच गया तो हम ने अपनी अपनी जहाज की सीट की बेल्ट खोल दी, ओर थोडी देर मै जल पान आ गया, मेने सोचा चलो एक दो बीयर पी लू,शायद नींद आ जाये..... ओर एक बीयर मंगवाई, फ़िर थोडी देर मै खाना भी आ गया, तब तक मै अपनी बीयर पी चुका था, खाने बाद एक बीयर ओर मंगवाई जो आधी ही पी सका.लेकिन नींद ना आई.

फ़िर फ़िल्म बगेरा देखनी चाही, लेकिन एक अजीब सी उदासी मन पर छाई थी, घर वालो को छोड कर जा रहा था, लेकिन आगे कोई भी अपना नही, अपना देश अब पराया लग रहा था, कभी कभार खिडकी खोल कर देखता, लेकिन बाहर अंधेरा ही था, नीचे ऊपर सब ओर अंधेरा ही अंधेरा.

फ़िर आगे का प्रोगराम बना रहा था, अभी हमारा जहाज अफ़्गानिस्तान ओर रुस के बीच मै ही था, मेने बाहर देखा तो झट से एक चित्र खींच लिया, जमीन से करीब १२ किलो मीटर ऊपर थोडी सी लाली नजर आई, फ़िर अंदर मेने अपने सामने लगे टी वी पर आती हुयी नोटिस का चित्र लिया, जिस मै हमारी जमीन से दुरी,जहाज की रफ़तार ओर बाहर का ताप मान दिखाया गया है.

फ़िर एक चित्र थोदी देर बार खींचा जब मुझे थोडी लाली ओर दिखी, ओर एक चित्र तब खींचा जब लगा की हमारे साथ साथ चंदा मामा भी दोड रहे है, फ़िर मेने बाथ रुम मै जा कर कुल्ला बगेरा किया, थोडी देर मै नाश्ता वगेरा आ गया, ओर फ़िर हम दिल्ली पहुच गये, एयर पोर्ट पर मेरा दोस्त आया था जिस के संग मै कुछ समय के लिये उस के घर गया, एक कप चाप पी कर हम रोहतक की तर चल पडे, पीडा गडी  चो्क से हमारे संग दिनेश राय जी साथ हो लिये, ओर अगले दो दिन दिनेश राय जी के संग बीते,
कुछ जरुरी काम दिनेश जी ओर मेने निपटाये, जब कि दिनेश जी के पास बहुत कम समय था, लेकिन उन्होने मुझे पुरा समय दिया, ओर दुसरे दिन रात दस बजे दिनेश जी कॊ छोड कर उदास मन से होटल वापिस आया, ओर तीसरे दिन मेने जाना तो दिल्ली ही था, लेकिन दो दिन ओर रुक गया रोहतक मै, लेकिन दिनेश जी के जाने के बाद एक दिन भुख नही लगी, दिनेश जी का प्यार बार बार याद आ रहा था, दिनेश जी बहुत ही मिलन सार, मधुर भाषी, ओर हितेशी है, ओर उन मे बिलकुल भी नाम मात्र को भी घंमड नही, यानि बहुत अच्छॆ मित्र बहुत अच्छे इंसान है, वो दो दिन मेरे साथ रहे, लेकिन हम इतना मिल जुल गये कि उन्हे मै कही घुमा भी नही सका ओर उन का कोई चित्र भी सही ढंग से नही खींच सका, रात के समय दो चित्र सोने से पहले खींचे, तो एक चित्र यहां दे रहा हुं,काश दिनेश जी जेसे सभी लोग हो तो कितना अच्छा हो.

चलिये पोस्ट ज्यादा लम्बी ना हो इस लिये यही खत्म करता हुं , ओर आगे की पोस्ट मै आप को मिलवाता हुं अमित ( अंतर सोहिल )ओर नीरज जाट जी से


 आप किसी भी चित्र को बडा कर के देख सकते है

31 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

राज जी आपसे मिलना भी मेरे लिए एक सुखद क्षण था...मैं आगे के वृतांत का इंतज़ार करूँगा और हाँ आप तो बहुत बढ़िया फोटोग्राफर भी है!

विनोद कुमार पांडेय said...

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ!!

परमजीत बाली said...

बढ़िया प्रस्तुति....प्रतीक्षा रहेगी...अगली पोस्ट की...

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 13.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

Vivek Rastogi said...

वाह जी, बहुत बढ़िया मजा आ गया, हवाई यात्रा का विवरण पढ़कर।

फ़ोटो तो बहुत ही अच्छे लगे।

महफूज़ अली said...

सबसे पहले तो मैं आपसे माफ़ी चाहूँगा.... कि मैं दिल्ली नहीं आ सका.... बहुत तमन्ना थी आपसे मिलने की.... लेकिन मेरी ट्रेन छूट गई..... और मन मसोस कर रह जाना पड़ा... उम्मीद है कि आप माफ़ कर देंगे....

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ!!

Kajal Kumar said...

आपकी अगली पोस्ट की भी प्रतीक्षा रहेगी.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप ने चित्र बहुत सुंदर लिए हैं। अफसोस ये है कि मेरे वाले फोटो में वो पैक्ड हुक्का अनपैक्ड दिनेशराय द्विवेदी से अधिक खूबसूरत नजर आ रहा है।
आप के साथ बिताया गया वो डेढ़ दिन मेरे लिए भी अविस्मरणीय रहेगा। मुझे लगा कि मैं ने वह वक्त होश संभालने के पहले बिछड़े अपने हमउम्र भाई के साथ बिताया। उस दिन वापस आने का मन नहीं था। मजबूरी न होती तो कम से कम एक दिन और आप के साथ बिताता।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर विवरण से शुरुआत की आपने, द्विवेदी जी बडे ही आत्मिय लगते हैं, जब भी बात होती है ऐसा लगता है कि बचपन से दोस्ताना रहा हो.

आगे की कथा का इंतजार है.

रामराम.

अविनाश वाचस्पति said...

चैनल राज के प्रसारण जारी रहें
कृपया ब्रेक न लगाएं
पर ब्रेक लगाना मजबूरी है
वाहन चलाते समय
रखनी चाहिये
उचित दूरी है।

अविनाश वाचस्पति said...

चैनल राज के प्रसारण जारी रहें
कृपया ब्रेक न लगाएं
पर ब्रेक लगाना मजबूरी है
वाहन चलाते समय
रखनी चाहिये
उचित दूरी है।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भाटिया जी, हमें भी समय नहीं मिल पाया..वर्ना दिल्ली की बजाय आपसे रोहतक में मुलाकात होती।
अगली बार जब भी भारत आएंगें तो आप को लुधियाना जरूर आना पडेगा..चाहे आप इसे हमारा निमन्त्रण समझ लें या हठ लेकिन कहे देते हैं कि आपको आना तो पडेगा।
बाकी आपका विवरण पढ रहे हैं और अगली पोस्ट की प्रतीक्षा में हैं....
महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!

Arvind Mishra said...

मजेदार होंगे ये संस्मरण

Anil Pusadkar said...

इंतज़ार रहेगा अगली कड़ी का।

Anil Pusadkar said...

इंतज़ार रहेगा अगली कड़ी का।

Udan Tashtari said...

बढ़िया विवरण शुरु हुआ.अच्छा लगा आपका दिनेश जी से मिलना. आगे जारी रहिये.

Babli said...

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!
बहुत बढ़िया लगा आपका ये पोस्ट ! बधाई!

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी रही आपकी रपट .. अगली कडी का भी इंतजार रहेगा !!

खुशदीप सहगल said...

राज जी,
आप के सानिध्य ने जो खुशी और बड़े भाई तुल्य स्नेह दिया, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं
किया जा सकता...बस इतना जान लीजिए आप अपनी सादगी से हमारे दिलों को लूटने आए थे और लूटकर ले गए...

जय हिंद...

रंजन said...

बहुत सुन्दर....

Tarkeshwar Giri said...

Namashkar, kitni sundar photo . agae bhi intjar rahega aapka.

जी.के. अवधिया said...

सुन्दर संस्मरण! चित्र भी सभी बहुत सुन्दर हैं!

दीपक 'मशाल' said...

सर, बहुत उम्दा तस्वीरें और विवरण भी.. ये भी तो कहते जाइये की जर्मनी में परिवार के कुछ सदस्यों को छोड़ के आये और भारत में कई मिल गए.. :)
जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

seema gupta said...

बहुत सुंदर विवरण
regards

अन्तर सोहिल said...

मुझे मेरी फोटु देखने का इंतजार है जी

प्रणाम

डॉ टी एस दराल said...

दिनेश जी से तो मिलने का अवसर अभी नहीं मिला।
लेकिन राज जी , आपसे मिलकर यही लगा की आप जैसे सज्जन व्यक्ति दुनिया में बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। आपसे मिलकर बहुर अच्छा लगा , दिल से।

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूबसूरती क़ैद किया है आपने,सुन्दर संस्मरण ........
आपसे मिलने का सौभाग्य कभी तो हमको भी मिलेगा .....

रश्मि प्रभा... said...

swaagat hai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपका हार्दिक अभिनन्दन!
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!

अजय कुमार झा said...

राज भाई क्या धांसू यात्रा वृतांत शुरू किया है आपने और चार चांद सूरज लगा रहे हैं फ़ोटुएं , बहुत ही बढिया , आपका आना तो यहां इतिहास बना गया , शुभकामनाएं
अजय कुमार झा

वर्षा said...

आपके आने की ख़बर मुझे भी ब्लॉग पर मिली। मैंने उस ब्लॉगर्स मीट को मिस किया।