11/01/10

आज तो फ़िसल ही गये....इस उम्र मै

अभी अभी टिपण्णियो से निपटा, लेकिन आज टिपण्णियां देने मै थोडी मुस्किल आ रही थी, ओर आज दिन मै सोचा था कि एक दो लेख लिखूंगा एक यहां ओर एक मुझे शिकायत है पर, लेकिन आज टिपण्णियां देना भी बहुत कठिन लगा,

हमारे यहां बर्फ़िला तुफ़ान कई दिनो से लगातार आ रहा है, हमारे यहां(हमारे इलाके मै) यह तुफ़ान तो नही आया, लेकिन रात को खुब बर्फ़ गिरती है ओर दिन मै मोसम थोडा गर्म हो जाता है, रात को फ़िर ताप मान गिर जाता है, जिस से दिन मै पिघली बर्फ़ शीशे की तरह जम जाती है, फ़िर ऊपर नयी बर्फ़ गिर जाती है, लेकिन आज सारा दिन बर्फ़ गिरती रही सब ने साफ़ भी की लेकिन नीचे जो बर्फ़ शीशे की तरह जमी थी कही कही रह गई, ओर उस पर ताजा ताजा सफ़ेद बर्फ़.

सर्दी भी बहुत थी, लेकिन गर्म कपडॊ ओर बुटो से सर्दी का पता नही चलता, तो जनाब हमारा चीफ़ किसी फ़ाईल को ढुढंता रहा, जब उसे नही मिली तो हमारे पास आया, हम ने उसे समझाया कि वो तो बिलकुल सामने पडी है, लेकिन उस कम अकल को अकल नही आई, ओर इस सर्दी मै हमे साथ चलने को बोला, ओर वो कमरा दुसरी बिलडिंग मै था, हम ने जाकेट भी नही पहनी क्योकि चार पांच मीटर दुर ही तो था वो कमरा, हम उस के साथ भुन भुनाते गये( उसे हंसाता हुया दीखे) जाते समय मोहद्य बर्फ़ पर फ़िसल गये, लेकिन गिरने से बच गये, हम ने फ़ाईल जब दिखाई तो बहुत शर्मिंदे हुये, ओर सॊरी बोल दिया.

अब हम बिना जाकेट बाहर आये थे, सामने हमारा कमरा था, सोचा चलो जल्दी से कमरे मै जा कर कुछ गर्म हो जाये, लेकिन दो कदम ही चले तो हम जमीन पर अपनी राईट वाली साईड की तरफ़ गिर गये फ़िसल कर, ओर उस वाजू का अप्रेशन हो चुका था, ओर सारा वजन उस वाजू पर दर्द तो बहुत हुया, दिल था कोई आ कर उठाये, लेकिन फ़िर जल्दी से उठे ओर कमरे मै आराम से गये, वाजू को थोडा मला, उस समय तो दर्द नही हुया, लेकिन अब दर्द बढ गया है, हम ने भी दो दिन की छुट्टी मार ली.... चोट ज्यादा नही आई... अभी बीबी वाजू पर तेल लगा कर मालिस करेगी, फ़िर सेंक दे कर सुबह तक आराम आ जायेगा.

जब फ़िसले तो पता ही नही चला, चारो खाने चित जब पडे तो मुंह से बडे जोर से आवाज आई ऒये तो पता चला कि हम तो इस उम्र मै भी फ़िसल गये

अभी बर्फ़ गिर रही है बूरा चीनी की तरह, ओर सर्दी की वजह से चारो ओर बहुत फ़िसलन है, कल दिन मै अच्छी तरह से बर्फ़ गिरी तो फ़िल्म जरुर बनाऊगा, चलिये अब आप टिप्ण्णियां दे ओर मै तेल लगवा कर सेंक दे दूं

32 comments:

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

प्रभू आपको स्वास्थ्य रखे आपकी तकलीफें मुझे मिल जावें

Udan Tashtari said...

भाई जी, बरफ से मजाक नहीं...हड्डी टूट लेती है. जरा संभालिये और कल तक आराम न लगे तो डॉक्टर को दिखाकर एक्स रे वगैरह करवायें..शुभकामनाएँ.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

अपना ख्याल रखे .पढ कर ठन्ड लगी की वर्फ़ पड रही है .हमारे यहं तो ७ डिग्री टेम्प्रेचर है तब भी ठंड लग रही है .

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

यहाँ इलाहाबाद में पारा ६-७ डिग्री पर है तो हम तंग हुए जा रहे हैं। जैकेट टोपी मफलर चढ़ाने में ही भुनभुनाते रहते हैं। उधर आप बर्फ़ पर कलैया खेल रहे हैं... वाह! हमारी तो ठण्ड ही काफूर हो गयी। तेल थोड़ा गरम कराते रहिए। लेकिन इसके लिए तो कपड़ा उतारना पड़ेगा। उई... ठण्ड न लग जाय। :)

Vivek Gupta said...

सर जी आप अपनी सेहत का ध्यान रखिये | orlando में भी आजकल बहुत ठण्ड पड़ रही है |

Dr. Amar Jyoti said...

'इस उम्र में भी फिसलने' के शीर्षक से तो लगा कि किसी 'रोमैण्टिक फिसलन' की चर्चा है। पढ़ कर बड़ी निराशा हुई।:) आप शीघ्र ही स्वस्थ हो जायें यही कामना है।

वाणी गीत said...

शुक्र है गिरने की सही जगह तलाश की ...और एक अदद बीबी भी है तेल मालिश के लिए ...!!

जी.के. अवधिया said...

राज जी, जल्दी से जल्दी आप स्वस्थ हों जायें, बस यही कामना है।

आपके यहाँ जैसा मौसम तो शायद हम कभी देख ही नहीं पायेंगे इस जिंदगी में।

डॉ टी एस दराल said...

भाई ,कन्फ्यूजिया तो हम भी गए थे। फिर सोचा फिसलने का असली मज़ा तो इसी उम्र में है। भाई तेल मालिश जो हो जाती है। वो भी नर्म नर्म हाथों से।

ललित शर्मा said...

भाटिया जी-सेकाई करवाएं और जल्द ठीक होने की सूचना जारी करें।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

जरा सी चूक भी कभी भारी पड़ जाती है। दो मिनट के लिए जैकेट नहीं पहनने का खामियाजा उठाना पड़ा। अब मालिश ही नहीं कुछ दवा भी कीजिएगा।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ध्यान रखिये भाटिया जी. यह उम्र नहीं है फिसलने की - खासकर जैकेट आदि मोटे कपड़ों के बिना.
Take care!

बी एस पाबला said...

लो!
शीर्षक पढ़ सोचा कि भाटिया जी इस उमर में भी फिसल गए? वाह!
पढ़ा तो पता चला कि भाटिया जी बर्फ़ पर फिसल गए :-)

अपना ख्याल रखिएगा

बी एस पाबला

पी.सी.गोदियाल said...

वैसे भाटिया साहब , कभी-कभी फिसलने का भी अपना ही मजा है :)

सुलभ 'सतरंगी' said...

आप भी न.. बर्फ से मजाक करते हैं... शारीर को कष्ट न होने दिजये... छोडिये टिप्पियाना अभी पहले भरपूर आराम कर लीजये..

- सुलभ

संगीता पुरी said...

इसी उम्र में फिसलना तो खतरनाक होता है .. स्‍वास्‍थ्‍य पर ध्‍यान दें , आराम करें .. जल्‍द ठीक हो जाएंगे !!

Anil Pusadkar said...

भाटिया जी संभल कर इस उम्र मे अब दोबारा फ़िसलने का रिस्क मत लेना,हड्डियां भी बडी मुश्किल से जुडती हैं।ईश्वर आपको तंदरूस्त रखे।

ताऊ रामपुरिया said...

इस उम्र मे फ़िसलकर गिरना अच्छी बात नही है.:)

खैर कोई बात नही, जब कोई गिरने लायक मौका मिल जाये तो हर्ज भी नही, पर एक्सरे जरुर करवा लिजिये.

रामराम.

अन्तर सोहिल said...

पोस्ट का शीर्षक पढकर एक मुस्कुराहट जो मेरे होंठों पर आई थी, अबतक बनी हुई है जी
वाकई सलाम है आपके जिन्दादिल नजरिये को
अब सिंकाई करवा कर आराम कीजिये और कल वीडियो जरूर दिखाईयेगा।

ताऊ की टिप्पणी से कापी पेस्ट इस लाईन को दोबारा पढें मजेदार है जी
"जब कोई फिसलने लायक मौका मिल जाये तो हर्ज भी नही"

प्रणाम स्वीकार करें

रंजना [रंजू भाटिया] said...

संभल कर चलिए ,रहिये .सर्दी तो इस बार वैसे ही बहुत कंपा रही है

Mired Mirage said...

बर्फ के लिए विशेष तले वाले जूते होते होंगे। बर्फ पर गिरना बहुत खतरनाक भी हो सकता है। जल्दी ठीक होइए।
घुघूती बासूती

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

गिरतें हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में :)
आप अपने यहाँ का हाल सुना रहे हैं ओर हमें पढ कर ही कंपकंपी छूट रही है...बाकी जरा स्वास्थय का ध्यान रखिए....

रश्मि प्रभा... said...

ab kaise hain?

वन्दना said...

kadam sambhal kar rakhiye is umra ki chot baut dukh deti hai.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आपको गाना चाहिये था आज रपट जायें तो हमें न उठाइयो.

मनोज कुमार said...

इस सीरियस वाक़ये में हंसी के पंच भा गये
भाटिया जी तुस्सी छा गए।
पर हां समीर जी की सलाह पर कीजिएगा ग़ौर।
उपचार का वृतांत लेकर पोस्ट लिखिएगा एक और।

रंजना said...

THAND TO YUN HI KISI BHI DABE CHHUPE DARD KO UBHAAR DETEE HAI,ISPAR YADI KOI TAJA CHOT CHAPET HO TO WAH TO BAHUT HI KASHTKAREE HO JAATA HAI....

APNA KHAYAAL RAKHIYE...SHEEGHRA SWASTHY LAABH KIJIYE....

महफूज़ अली said...

अपना ख्याल रखियेगा...

समयचक्र said...

शीर्षक पढ़ा तो लगा की आप इस उम्र में कही और फिसल गए है जब पोस्ट पढी तो समझ में आया की बर्फ में आप फिसलते फिसलते बच गए . ईश्वर आपको अच्छा रखें .....थोडा संभल कर चलें ... आभार

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

फिसलना तो किसी भी मौसम में बुरा होता है और प्रचण्ड सर्दी में तो और भी। अपना ख्याल रखियेगा भाटिया जी!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सम्भालो भइया!
लोहिड़ी पर्व और मकर संक्रांति की
हार्दिक शुभकामनाएँ!

विनोद कुमार पांडेय said...

गिरना,संभलना,फिसलना सब हम इंसानी फ़ितरत है कभी कभी इन सब का भी बड़ा मज़ा होता है...चलिए अब फिसल गये तो कोई बात नही मैने टिप्पणी दी और आप अब सेंक लीजिए ..