16/12/09

जिन्दगी का हिसाब किताब

नमस्कार आप सभी को, ओर धन्यवाद आप सब का जिन्होने मुझे मेल किया, मेरा हाल चाल  पूछा, आज समीर जी का फ़ोन भी आया, मेरे से बात तो नही हुयी, लेकिन मेरे बेटे से उन्होने बात की, आप सब का प्यार सर आंखॊ पर, मैने कई बार सोचा कि आप सब के मेल का जबाब दुं, लेकिन लिखूं क्या, ओर यही सोच कर रुक जाता था कि जब पुरी बात पता लगेगी तो तो एक अन्तिम पोस्ट आप सब के नाम कर दुंगा..... लेकिन अभी  वो समय नही आया.

मेरी टांगो की पिडंलियो मै बहुत दर्द रहता था, लेकिन वो अब बिलकुल ठीक है, पिन्नियो के बारे आप सब  ने जो भी बताया बहुत अच्छा लगा, लेकिन  BrijmohanShrivastava जी ने जो लिखा वह मन को बहुत भाया, ओर मै यही सोचता था कि इन पिण्णियो को पचा पाना भी  तो मुश्किल है, अब पिन्नियां केंसल.

मै काफ़ी समय ब्लांग मै आया नही , ओर बिना सुचित किये एक दम से चला गया इस के लिये माफ़ी चाहता हुं, कारण तो कोई बडा नही था, लेकिन मेरी सोच ने इसे बडा बना दिया था, काफ़ी समय से मेरी जीभ पर छाले पड जाते थे, जो दो चार दिन ठीक रहते , फ़िर दोबारा निकल आते, मैने दो बार डाकटर को भी दिखाया, दवा खाई, अपने खाने पीने पर ध्यान दिया कि हम ने कोन सी  अपने खाने मै नयी ली है, लेकिन यह छाले ठीक नही हो रहे थे, फ़िर मैने फ़िटकरी को पानी मै डाल कर भी दिन मै एक दो बार मुंह साफ़ किया, छाले कुछ समय ठीक हो जाते थे, फ़िर निकल आते, ओर  मै इन से बहुत तंग हो गया,

तभी एक दिन मुझे मां की याद आई तो मुझे मां की वो बात याद आई जब मां ने मुझे कहा था बेटा मेरी जीभ पर जख्म हो रहे है, ओर कुछ समय बाद पता चला कि मां को जीभ का केंसर हो गया है, ओर यही बात मेरे दिमाग मै भी बेठ गई कि मुझे भी........., ओर फ़िर मैने अपने हिसाब से सोचा कि अब तो बच्चू तुम दो साल से ज्यादा नही, तो क्यो ना यह दो साल तुम अपने परिवार को देना शुरु करो, ओर यही सोच कर मैने ब्लांग मै आना छोड दिया, कभी कभार आता भी तो कोई भी पोस्ट मुझे अच्छी ना लगती, जब मुड ही अच्छा ना हो तो टिपण्णी केसे दुं, फ़िर धीरे धीरे आप सब मे मेल आने शुरु हुये, लेकिन जबाब दुं भी तो क्या दुं?

तो पिछली बार जब मै अपने डाकटर के पास गया तो , मैने उसे मुंह के छाले दिखाये तो, वो फ़िर से एक दवा लिखने लगा, तो मैने उसे मना कर दिया, ओर अपनी मां वाली बात उसे बताई, तो डाकटर ने कहा कि अब यह बात तुम्हारे दिमाग से जरुर निकलनी चाहिये, ओर मुझे उसी समय स्पेशलिस्ट की लिस्ट दे दी, मैने एक स्पेश्लिस्ट को चुना ओर उसे फ़ोन कर के अगले दिन चेक अप का समय निशचित कर लिया, दुसरे दिन उसे अपनी जीभ दिखायी ओर सारी बात जो मेरे दिमाग मै घर कर गई थी बताई, डाकटर ने जीभ को बहुत अच्छी तरह से देखा, आस पास देखा जीभ को पलट कर, मुंह के अंदर सारा चेक किया, ओर बताया कि यह छाले तो आम हो जाते है, इन से कोई हानि नही, जब मैने पुछा कि क्यो होते है तो डाकटर ने बताया कि इस का कोई एक कारण नही, लेकिन यह खतरनाक नही. अब मेरा विशवास कुछ लोट आया, दुसरे दिन किसी की मोत हो गई, तो वहां गये, वहा पर बातो बातो मै मैने मुंह के छालो की बात बताई तो एक अन्य भारतीया महिला ने कहा कि साल मै ८,९ महीने उस के मुंह मै भी छाले पड जाते है,यह सुन कर मै फ़िर वापिस अपनी दुनिया मै लोट आया.

आशा करता हुं आप सब मुझे माफ़ करेगे बिना बताये जाने के लिये, ओर कल से फ़िर आप सब के ब्लांग पर नियमित हाजरी भरूंगा, वेसे दिन मै कई बार आप सब के ब्लांग पर आता, फ़िर बन्द कर देता, ओर आप सब से निवेदन है कि बिना डाकटर की सलाह के अपने दिमाग मै कभी भी मेरी तरह ऎसी बात मत बिठाये.

कल से सब पहले जैसा चलेगा, क्यो कि अब मुझे ३ जनवरी तक छूट्टियां  है, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होने मैरा हाल चाल किसी भी रुप मै जानाना चाहा,ओर मै माफ़ी चाहूंगा कि आप मै से कई लोगो के मेल का जबाब ना दे पाया.

28 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें!
आपके स्वास्थ्य-साभ की कामना करता हूँ!

अजय कुमार झा said...

इश्वर आपको सलामत रखे ...सेहत से बडी कोई नियामत नहीं

Arvind Mishra said...

आज ही सहसा लगा था की अरे अपने भाटिया जी नहीं दिख रहे हैं -कुछ आशंकाएं भी हुईं आपकी पुराणी बीमारी को लेकर
मगर अब संतोष हो गया !

परमजीत बाली said...

राज जी,इन छालो से परेशान ना हो यह अक्सर पेट की खराबी से भी हो जाते हैं.....ज्यादा सोचने से भी हो जाते है......बस जरा खान-पान का ध्यान रखें और ज्यादा सोचे नहीं..यह इस लिए बता रहा हूँ कि हम भी कभी इस तकलीफ से गुजर चुके हैं...वैसे आप की कमी सभी को बहुत दिनों से खल रही थी....

प्रकाश गोविन्द said...

इश्वर आपकी सेहत सलामत रखे
ज्यादा सोचे नहीं
आप की कमी बहुत दिनों से खल रही हैं.

Udan Tashtari said...

चिन्ता को दूर भगाईये. पेट साफ रखिये. छाले ठीक हो जायेंगे.

आज तो आप ऑफिस में थे जब हमने फोन लगाया.

कल फिर लगायेंगे.

अनेक शुभकामनाएँ.

AlbelaKhatri.com said...

भाई जी नमस्कार !

आप बहुत दिन से नहीं दिख रहे थे तो मैंने सोचा, आप किसी ज़रूरी काम में व्यस्त होंगे ...लेकिन निराशा हुई ये जान कर कि आप तो फ़ोकट की चिन्ता में व्यस्त थे.............

आप हमारे बड़े हैं ..आपकी काया स्वस्थ रहे हमारी दिली चाहत है.........लेकिन फिर भी इक बात आपसे निवेदन करता हूँ कि जी भर के जियो............उस चीज की परवाह बिलकुल ना करो जो परमात्मा ने केवल खुद के हाथ में रखी है.......

छाले किसी की आत्मा पर और अंतर्मन पर ना पड़ें........ये ज़ुबान के छाले तो आते-जाते रहते हैं...........

बुरा ना मानना.............

आपके दीर्घ और स्वस्थ जीवन के लिए सदैव शुभाकांक्षी ,

-अलबेला खत्री

रंजन said...

स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएँ...

वैसे मेरी माताजी को भी ये समस्था थी.. एक कारण तो विटामिन 'बी' की कमी थी.. इंजेक्शन लगवाया और उससे काफी राहत मिली..

दूसरा होम्योपैथी में इसके लिए बहुत अच्छी दवा है.. आजमा कर देखिये...

मनोज कुमार said...

भगवान आपको खुशहाल रखें। स्माइल लगाइए..

अशोक मधुप said...

फालतू परेशान न हो, पेट साफ रखे, अमरूद की कोपल चबाइए

जी.के. अवधिया said...

राज जी,

आप अपने दिल से वहम को बिल्कुल निकाल दें। एक तो आपको, आप जैसा सोच रहे हैं वैसा, कुछ भी होने वाला नहीं और फिर हम सब लोगों के प्यार में इतनी शक्ति है आपको कुछ भी होने ही नहीं देगा!

दूसरी बात यह कि कल जो होना है उसे सोचकर हम आज की खुशियों को क्यों खत्म करें।

हम तो आपसे अधिक उम्र के हैं पर ऐसा वैसा कभी नहीं सोचते। बस अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं।

बस वहम को निकाल फेंकिये मन से। वहम की दवा तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं है।

ताऊ रामपुरिया said...

लो जी, बिना बात आप परेशान रहे? हमसे पूछ लिया होता. पेट साफ़ रखने का फ़ार्मुला तो आपको लोगों ने बता ही दिया. अब एक और....रात को किसी भी हालत मे मंजन करना ना भूले ...अगर रात को पेस्ट करके सोयेंगे तो छाले कभी भी नही होंगे.

रामराम.

हिमांशु । Himanshu said...

इतना न सोचें । देह-धर्म है यह । छाले कोई बड़ी बात नहीं ।

कमी खटक रही थी आपकी । अब संतोष हुआ ।

पी.सी.गोदियाल said...

अरे भाटिया साहब ! आप कैसी बात करते हो ? अभी तो आपने और मैंने सभी ब्लोगर मित्रो के साथ मिलकर २०४७ की स्वतंत्रता की १००वी बर्ष गाँठ माननी है ! कभी सुख, कभी दुःख यही जिन्दगी है, ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी है.......!
अभी दो दिन पहले डाक्टर दराल साहब ने जयपुर के चन्द्र मोहन गुप्त जी के बारे में खोस खबर ब्लॉग पर ली थी तो आपका भी जिक्र आया था की भैत्या साहब भी नहीं दिखाई दे रहे काफी दिनों से !

PrakashYadav said...

Bhatia Ji namaskaar!
blog to aapka regular padha per comment ya rply pehli baar kar raha hoon..
waise yeh blog padhakar apne aap likhne ka man kar gaya.....
saare doston ne kaha hai chhalon ke baare mein aur sab baa common hai ki pet ki kharabi se hi yeh hote hain..
yeh 100% sahi hai. per sirf pet ki kharabi se hi nahin, aur bhi karan hote hai. jise deshi bhasha mein sara garm kahte hain. jaise aap kisi garm jagah se aye aur chilled cold drink pe liye 2 ghante mein aapke munh per chhale aa jayenge, kyonki aapka pet jo garm tha(bahar se aane ki wajah se) us per achanak chilled water pada to woh water halka garam ho gay aur pet ke bhitar bhaap bankar bahar nikla munh ke raaste se, aur jaisa ki hota hai hamare munh ke chaale bahut soft hote hein worh unhein jala gayaa..
yeh natural si cheez hai is per itna na ghabrayeein..abhi to haneim aur bahut se blog padhne hain aapke hathon...
ilaaz simple hai.. chalon per desi ghee(cow wali agar ho to) lageein yah phir dahi khayein..(yeh desi upchaar hai). yah phir b-complex ki tab...
aur haan pindli ka dard thand mein hota hai ya regular batayein... phir main iska kargar desi ilaaz batata hoon...

aapka subhechchhu
Prakash(India)
mere comp per Hindi nahin aa raha hai isliye aisa likhaa...
padhne mein taklif ho to sorry........

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

तो यह छाले थे जो आपको रोक रहे थे हमारे पास आने को . इनकी चिन्ता ना करे मस्त रहे . नुस्खे तो बहुत मिल ही गये है आपको इस्तेमाल करे . आपकी प्रतीक्षा है मेरे ब्लोग पर

अन्तर सोहिल said...

अजी आप बहुत भावुक हैं, चिन्ता मत कीजिये
मेरे तीन साल के बेटे को यही प्राब्लम पैदाईशी चल रही है। खाना खिलाने में बहुत परेशानी आती है। मगर वह भी और हम भी मस्त रहते हैं। मैं उसे बी-काम्पलेक्स का सिरप नियमित देता रहता हूं तो आराम रहता है।

डाक्टर की बताई दवा लीजिये और मस्त रहिये। शायद आपने सर्दी शुरू होते ही बहुत गर्म चीजें ज्यादा खानी शुरु कर दी हैं। हमें तो पेट साफ ना होने, पेट में गर्मी बन जाने पर मुंह के छाले होते हैं।

प्रणाम स्वीकार करें

सतीश सक्सेना said...

राज भाई !
शुरुआत में पढ़ते हुए, एक बार तो आपने डरा ही दिया , आप जैसे जिंदादिल लोग कमजोरों को रास्ता दिखाते हैं, बहुतों को प्रेरणा देने वाले राज हजारों साल जियेंगे ! आपको प्यार करने वालों की कमी नहीं है, ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको कभी कमज़ोर न पड़ने दे !
सादर !

महेन्द्र मिश्र said...

काफी दिनों से आपकी पोस्ट न देखकर सोच रहा था की आप कहाँ है ... आप स्वस्थ रहें . ईश्वर से यही कामना है .

महफूज़ अली said...

आपके अच्छे स्वास्थ्य कि इश्वर से कामना करता हूँ....

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

कुछ दिनों पहले ताउ से आपके बारे में बात हो रही थी कि पता नहीं भाटिया जी नहीं दिखाई पड रहे तो उन्होने भी चिन्ता प्रकट की थी कि उन्होने आपको मेल भी की थी...लेकिन आपकी ओर से कोई जवाब ही नहीं आया....
लेकिन हमें क्या पता कि आप फालतू के बहम में पडे हुए हैं....अजी चिन्ता छोडिए और बस मस्त रहिए ।
डोन्ट चिन्ता एण्ड टेक हौंसला :) छाले वगैरह क्या कहते हैं ।

ज्योति सिंह said...

main anjaan rahi aapke is haal ,chaliye ab behatar hai yah jaankar khushi ,aur saath hi aapke achchhe swasthya ki kamna karti hoon

दिगम्बर नासवा said...

आप ठीक हो गये जान कर अच्छा लगा ..... आपकी कमी खाल रही थी ..........

योगेन्द्र मौदगिल said...

shubhkamnaen...aapke sukhad swasthay ke liye....

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जीवन में उंच नीच होता ही रहता है. भाई स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें. ढेरों मंगलकामनाएं.

खुला सांड said...

ओह !! ऐसी बात थी भाटियाजी सचमुच बीमारियों का दर जो मन में बैठ जता है वो सबसे बड़ी बिमारी होती है !!! अच्छा किया आपने की स्पेलिस्ट चुन कर अपने मन का बहम निकाल लिया!!! अब तंदुरुस्त भाटियाजी हमारे साथ है इस बात की ख़ुशी है!!!

रंजना said...

Aapke shighra swasthy laabh kee kaamna hai....

नरेश सिह राठौङ said...

लो करलो बात इतनी छोटी सी बात छालो से परेशान होने की जरूरत ही नहीं है | हमारी देशी तहजीब की खासियत ही यही है आप एक रोग बताइये तो आपके आजू बाजू में उसके दस वैध मिल जायेंगे | नो तो आपको मिल गए होंगे अपना ज्ञान बघारने के लीजिए दसवाँ न. पर हम भी हाजिर है | पहली बात पेट साफ़ रखने के लिये हमेशा त्रिफला चूर्ण रात को सोते समय एक चम्मच लीजिए | अगर छाले तुरंत ठीक करने है तो अमरूद की पत्ती चबाएये और लार को थूकते जाइए | बाकी इलाज बाद में फिर कभी |