06/11/09

यमुना एक नदी है या नाला ? आप ही बताये

आज एक समाचार पढ रहा था तो अचानक यहां मेरी नजर गई, जब इसे पढा तो बहुत कुछ सोचने पर मजबुर हो गया, क्या आप भी जानना चाहे गे इस परेशानी का कारण तो देर किस बात की लगाईये एक प्यारा सा चटका अजी बस यही ना, फ़िर पढ ल्रे हम भारतियो की करतूत

30 comments:

खुशदीप सहगल said...

कृष्ण तेरी यमुना मैली हो गई...
दिल्ली का मल-मूत्र ढोते-ढोते...

जय हिंद...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

क्या कहें.........?
बरसात में तो नदी ही लगती है।
बाकी दिनों मे नाले से कम नही है!

Ratan Singh Shekhawat said...

लिंक पर चटका लगाकर क्या पढ़े जी ! दिल्ली में लगभग रोज यमुना को देखते है , कालिंदीकुंज से यमुना के पुल से जाते हुए कई सभ्य भारतियों को कार पुल पर रोक पूजा सामग्री यमुना में डालते देखते है कालिंदीकुञ्ज के एक साइड में तो यमुना नदी सी दिखाई देती है पर दूसरी और सिर्फ एक नाला जान पड़ती है और पानी का तो कहना ही क्या ? पीना के तो कोई क्या सोचे हाथ डालना भी गंदे नाले में हाथ डालने जैसा लगता है |

Tarkeshwar Giri said...

Sachmuch Yamuna NAdi NAhi Ek NALA Hai

वाणी गीत said...

सुना था ...गंगा में स्नान और यमुना का दर्शन एक समान है ...अच्छा है ...दर्शन से ही पुण्य मिल जाए ...इस गंदगी में स्नान कौन करना चाहेगा ...!!

श्यामल सुमन said...

नदी कहें नाला कहें यमुना को है आस।
बचा लो मुझको देश में बनने से इतिहास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

ताऊ रामपुरिया said...

क्या कहा जाये? आखिर इसके दोषी भी तो हम ही हैं.

रामराम.

जी.के. अवधिया said...

हमारे धर्म शास्त्रों में नदियों को माता की मान्यता दी गई है। यमुना को को अत्यन्त पवित्र माना जाता है किन्तु इस प्रकार से उसे गंदगीयुक्त बना देना घोर अनुचित कार्य है।

पी.सी.गोदियाल said...

और ऊपर से वन्देमातरम् का विरोध करने वाले मुसलमानों को कह रहे है कि डूब मरो सालो ! अब आप ही बतावो कि अगर सचमुच हमारी बात मानते हुए इतने सारे इस नाले में डूब मरे तो ?

Ashok Pandey said...

विकास के नाम पर हो रही अंधी दौड़ में हर तरह की दुर्गति संभव है।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

नदियो के किनारे जितने नगर ग्राम हैं उन का सब कुछ नदियों में जाता है। अब यमुना के किनारे दिल्ली है, मथुरा है आगरा है। इन नगरों का मैला ढोने के बाद यमुना कैसी होगी? आप सोच सकते हैं।
नदियाँ नदियाँ नहीं हैं मैला ढोने वाली मेहतरानियाँ हो गई हैं.

Devendra said...

सभी नदियों का यही हाल है...
प्रचीन नगरी वाराणसी का नाम वरूणा और अस्सी दो नदियों के कारण पड़ा
वरूणा नदी तो नाले के रूप मे आज भी दिख जाती है लेकिन अस्सी का पता नहीं, कहाँ विलुप्त हो चुकी है!!

सुशील कुमार छौक्कर said...

क्या कहें जी मेली यमुना को देखकर बहुत गुस्सा आता है। लोगो ने करोडो बहा दिए इसको साफ करने के नाम पर। पर मै सोचता हूँ वो करोडो लगे कहाँ? मै खुद इसके नजदीक रहता हूँ। शायद वो करोडो कही और चले गए।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

है तो नाला ही...पर दिल्ली के हम पागल लोग इसे नदी ही कहते रहते है।

संगीता पुरी said...

बहुत कठिन प्रश्‍न पूछा आपने .. मुझे तो लगता है कि यमुना भूतकाल की नदी , वर्तमान काल का नाला और भविष्‍य काल का गड्ढा है !!

Anil Pusadkar said...

हमारा प्रदेश तो एक कदम आगे है,यंहा तो नदी को बेच दिया गया है।

शिवम् मिश्रा said...

क्या कहे......... जनाब !!

ज्योति सिंह said...

abhi tak to nadi rahi ,aur mahasangam bhi ab aage kya kahi jaayegi ye khabar nahi ,shyamal suman ji ne bahut sahi baat kahi .achchha vishya

ज्योति सिंह said...

aapke lekh ko padhkar saham gayi aur yamuna par nirbhar kitni zingdgiyaan hai yah dekh hairaan ho gayi sabki dard bhari kahani jiska sahara bejuban yamuna hai .phir bhi hum kadr kyon nahi karte .hridyasparshi .is lekh ne bahut prabhit kiya ,main soch to paa rahi hoon par byan nahi kar paa rahi .zindagi ko kareeb se dekho ,iska chehra hila dega ....

ज्योति सिंह said...

zindagi ko kareeb se dekho
iska chehra rula dega ,
aadmi ,aadmi ko kya dega
jo bhi dega khuda dega ...
jagjit singh ki ye panktiyaan jahan me chakkr katne lagi .shayad jyada hi kah dali par kuchh haalat bebas kar dete hai .raj ji bahut achchhi charcha rahi .

नीरज गोस्वामी said...

भाटिया जी मेरा एक शेर है जो शायद यहाँ बिलकुल सही बैठे:

इक नदी बहती कभी थी जो यहाँ
बस गया इन्सां तो नाली हो गयी

नीरज

रश्मि प्रभा... said...

यमुना क्या, ....हर नदी की यही दशा है, गंगा में पाप धुल जाते हैं, ऐसा सोचकर हर पापियों ने
इतनी डुबकियां लगें,कि गंगा ने दिशा बदल डाली......

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

लोग कह सकते हैं कि यमुना सफाई के नाम पर सरकार ने पैसे खा लिये/बरबाद किये।
पर नाला बनाया किसने?

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa said...

भाटिया जी,
यमुना का क्या कहें देश की हर नदी का यही हाल है। अब तो नदियां पानी का स्रोत होने की बजाय धन का स्रोत हो गयी हैं। सुनते थे नदियों में स्नान कर पीढीयां तर जाती हैं। अब तो देख भी लिया पीढीयों को तारने का इंतजाम होते। भले ही गिनती के लोगों की हों। करोड़ों रुपयों की योजनाएं बनती हैं और इन्हीं नदियों के माध्यम से रसूखदारों की तिजोरियां भरती चली जाती हैं।
अंग्रेजों की बुराईयां तो हम आगे बढ-बढ कर अपनाते हैं , काश उनकी अच्छाईयों पर भी नजर ड़ाली होती। नाले में तब्दील हो चुकी टेम्स का उदाहरण सबके सामने है।

दिगम्बर नासवा said...

dheere dheere hum apni sabhyata hote jaa rahe हैं ........... jaane ya anjaane ही .......

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

पहले ये तो बताइये ये यमुना क्या है..? स्कूल में किसी यमुना नदी के बारे में पढ़ा था लेकिन वह तो बहुत समय पहले ही सीवर में तब्दील की जा चुकी है..!

Mrs. Asha Joglekar said...

देश के सारी नदियों का यही हाल है । सरकार चाहे तो क्या नही कर सकती,नालियां इंडस्ट्रियल वेस्ट सब तो इसी में जाता है और यही नही बडी बडी मूर्तियों का विसर्जन भी । सब बंद कर दें तो आय ए एस लोकों की कमाई कैसे हो । लोग भी अपना घर साफ रख कर कचरा रस्ते पर नालियों में नदियों में डालने से बाज़ आयें तब तो........

M VERMA said...

जिन्दगी देने वाली इन नदियों का अस्तित्व ही खतरे में है

G M Rajesh said...

kal baithaa tha ghar aane ke liye train me.
aap jo kah rahe hain lagbhag unse milti julti baaten raaste bhar chali .
magar jo kah rahaa hun vahi saar hai is baat ka jo aap likh gaye.

gai bhains paani me

ha ha ha ........

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

आने वाले समय में नदियाँ सिर्फ किताबों में ही देखने को मिलेंगीं......