30/10/09

अब आप इस शादी को क्या कहेगे???

जी आज कल बाते हो रही है शादियो की, वेसे तो देवता भी जाग गये है, ओर शादियां भी बस शुरु होने वाली है, फ़िर तो मिठठईयां खुब मिलेगी..... छोडो इन बातो को तो चलिये एक अनोखी शादी मै, लेकिन इस शादी की अपनी एक खासियत है जी, ना यह दुसरी शादी है ना पहली... ना बेटी की उम्र की लडकी है, ओर ना ही दादी की उम्र कि...... अजी वो भी बात नही जिस के लिये आप के दिमाग की घंटी खटखटा गई....अब हम क्या बताये..... चैये चलते है शादी बाले घर, बस आप को अनोखी सोमाली शादी का दरवाजा खटखटाना है, मेरे कहने का मतलब बस चटका लगाना है, ओर फ़िर देखिये यह अनोखी सोमाली शादी.
अजी फ़िर बताये जरुर केसी लगी यह अनोखी सोमाली शादी

24 comments:

परमजीत बाली said...

वाह क्या बात इन साहब की ११२ साल के हो कर भी १७ साल की युवति से विवाह और अल्लाह का शुक्रिया कर रहे हैं कि उन्होने उस का सपना पूरा कर दिया......कमाल है...इस उमर मे भी जनाब ऐसे सपने देख लेते हैं...;))

रविकांत पाण्डेय said...

क्या कहें? बस थोड़ा हंस लेता हूं...:)

सुशील कुमार छौक्कर said...

ये भी खूब रही।

MANOJ KUMAR said...

अब क्या कहूं, यह तो हक़ीक़त है। एक शेर उस कन्या के लिए
हो करके बिंदास षोडशी तू मुस्कुराती जा,
बुड्ढ़े में भी ज़िन्दगी के फूल कुछ खिलाती जा।
जाना तो हर एक को है एक दिन जहान से,
जाते-जाते पुराना एक गीत गुनगुनाती जा।
हाए क्या करूं राम मुझे बुड्ढ़ा मिल गया।

महफूज़ अली said...

ab kya kahen aise logon ko? in jaise logon ne sharm bech ke moongfali kha li hai...... bataiye ab kahan 112 ki umr aur kahan 17? yeh is budhdhe ka paap hai jo itni umr tak zinda rah gaya........

khair! maine nayi kavita kihi hai.... aap dekhiyega

"...मत बनाना मेरा बुत, मेरी मौत के बाद...."

AlbelaKhatri.com said...

शेम !
शेम !!
शेम !!!
शेम शेम शेम शेम...............

Arvind Mishra said...

शादी है की हद है !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

शादी की खुशी तो होती ही है।
चाहे कब्र में ही पैर क्यों ना लटके हों।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

शादी की खुशी तो होती ही है।
चाहे कब्र में ही पैर क्यों ना लटके हों।

पी.सी.गोदियाल said...

भाटिया साहब, सबसे पहले तो मैं अपना रोष उन व्यैज्ञानिको पर व्यक्त करना चाहूँगा जो यह दावा कर रहे है की उन्होंने ऐसी खोज कर ली है की अब इंसान १५० से अधिक साल तक जी सकेगा ! मई कहता हूँ की इन हरामखोर व्यैज्ञानीको को तो लें में खडा करके गोली मार देनी चाहिए ! इनके पास काम धाम तो कुछ है नहीं फालतू के काम करते रहते है ! अब ऐसे में अगर प्रकृति अपना प्रकोप दिखा दे तो क्या हर्ज है ! साले इन्सान को अमर बना देंगे तो इस शख्स की तरह वह जिन्दगी भर शादिया नहीं करेगा तो और क्या करेगा ?

Anil Pusadkar said...

यानी भाटिया जी अपना चांस बना हुआ है।हा हा हा हा हा।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान :)

Dr. Jitendra Bagria said...

heheheh..
main to ise shaadi hi nahi kahunga !!
ye to bakwash hai .....

कुन्नू सिंह said...

:)) अभी तो साईट खूला ही नही है पर हेडलाईन दिख रहा है "BBC Hindi - अंतराष्ट्र...."

:)

रश्मि प्रभा... said...

सपनों को पूरा ही करना है,तो दुनिया में सपनों की कमी नहीं.........
१७ वर्षीय युवती के सपने ....रास्ते और भी हैं !

neelima sukhija arora said...

छी छी, ऐसी आदमी को भरे चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए। आखिर कैसे वो एक १७ साल की लड़की की जिन्दगी खराब कर सकता है।

Harkirat Haqeer said...

दूल्हे का कहना था,'' मैंने उन्हें शादी के लिए मजबूर नहीं किया, लेकिन अपने अनुभव का इस्तमाल करके उन्हें अपने प्यार का क़ायल कर दिया, और उसके बाद हमारे बीच शादी के लिए रज़ामंदी हो गई.''

सोमालिया की राजधानी मोगादिशू से बीबीसी संवाददाता के मुताबिक गुरीसील शहर में हुई इस शादी के बारे में सोमालिया के इतिहासकारों का कहना है कि अफ्रीका में पूरी सदी की ये एक अनोखी शादी है.

राज जी हम भले ही शेम शेम चिल्लाते रहे पर जब मियाँ बीवी राजी तो क्या करेगा काजी .....???

ये तो उस लड़की को सोचना चाहिए था ....??

राज भाटिय़ा said...

Harkirat Haqeer जी अकसर ऎसी शादियां के पीछे सिर्फ़ ओर सिर्फ़ पेसॊ का लालच होता है ओर कुछ नही, यह बुढा माल दार होगा ओर क्या....

ताऊ रामपुरिया said...

माल है तो ताल है. या पैसे तेरी बलिहारी.

रामराम.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

क्या कहूं
सोच ही रहा हूं अभी तो...

Babli said...

अब क्या कहूँ ? शादी तो हो चुकी है मेरी पर जिनकी शादी नहीं हुई है वो अब दुबारा सोचेंगे शादी करने के बारे में!

Hari Shanker Rarhi said...

समझ में नहीं आता कि इन साहब के जीवन का उद्देश्य शादी करना ही था या कुछ और भी ? उन मोहतरमा की बावत क्या कहें? कहीं मौत का लाइव देखने तो नहीं आई हैं या विधवापन का शौक तो नहीं चर्राया है ? ज़नाब के लिए मिर्ज़ा गालिब का एक शेर अर्ज है-
गो हाथ में ज़ुम्बिश नहीं,आँखों में तो दम है.
रहने दे अभी सागर- ओ- मीना मेरे आगे .

सुलभ सतरंगी said...

कुछ नवयुवतियां इस तरह की शादी से खुश रहती हैं - वे कहती हैं "एक तो इन्कम और फिर दिन कम"

Mrs. Asha Joglekar said...

मुझे तो दुल्हन की फिक्र है । पर वह तो अपने मियाँ से ज्यादा ताकतवर होगी ।