14/09/09

कंस को देखा है आप ने ?

जी आज भी सच मै कंस मिलता है, लेकिन आप उसे देख कर भी नही पहचान पाते,ओर इस कलयुग का कंस तो उस कंस से भी गंदा है जिस के बारे हम पढते आ रहे है, उस कंस को तो कृष्ण भगवन ने मारा था, लेकिन इस कंस को हम गले लगाते है, सर आंखो पर बिठाते है, इज्जत देते है..... जी मै सही कह रहा हुं, ओर फ़िर उस के पाप मै हम भी भागी दार बनते है, आओ मिल कर हम सब इस कलयुगी कंस को मारे .

जो मां बाप कोख मै ही बेटी को मारे, उसे आप क्या कहेगे ? जो ड्रा पेट मे किसी बच्ची को जन्म से पहले ही मार दे उसे आप क्या कहेगे? क्या मजबुरी है इन कंसो कि ? उस कंस को तो आकाशवाणी हुयी थी, लेकिन इन कंसो को कोन सी आकाशवाणी हुयी, आप जब भी किसी ऎसे जानवर को देखे उन की रिपोर्ट जल्द से जल्द पुलिस मै करे,ऎसे ड्रा से दवा लेना बन्द करे, ऎसे लोगो से बात करना बन्द करे.... किसी अजन्मे को मोत के मुंह मे धकेलना क्या अच्छा है, अगर वो बच्ची है तो क्या वो कलंक है ? अरे जिस के पेट मै है वो भी तो कभी बच्ची थी.... जो परिवार ऎसा करे उस परिवार से नाता तोड ले.... रहने दे उन्हे अकेला... उन के लडके को कोई बहू मत दो... आओ मिल कर इन गंदे कृत को रोके.... आओ मिल कर हम इस कंस को मारे

28 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

Bilkul sahee kaha aapne Bhatiya sahab. Aisa kadam hee in logon ko sabak sikhayega.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सही कहा आप ने।

अजय कुमार झा said...

ठीक कह रहे हैं..राज़ भाई...समाज में आज भी रावण और कंस मौजूद हैं...हमारे बीच में ही....

Mithilesh dubey said...

सुन्दर रचना.

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

भाईसाहब,
आपने आवश्यक विषय पर लिखा है।

वैश्विक सन्तुलन को बनाए रखने के लिए पुरुष और स्त्री दोनो ही अपना मुल्य है। अपनी अस्मिता है। एक दुसरे के बिना दोनो ही अधुरे है। इसलिए एक के अस्तित्व को नकारने का अर्थ है सृष्टी के सन्तुलन को ही नकारना। नारी शोषण का एक आधूनिक वैज्ञानिक तरीका है भ्रुण हत्या। समाज की विकृत मानसिकता ने कन्याओ को जन्म लेने के अधिकार से ही वन्चित कर दिया है । बहुत जल्दी ही आपके विचारो को लेकर हे प्रभू यह तेरापन्थ पर एक पोस्ट लिखुगा।

पहेली - 7 का हल, श्री रतन सिंहजी शेखावतजी का परिचय

हॉ मै हिदी हू भारत माता की बिन्दी हू

हिंदी दिवस है मै दकियानूसी वाली बात नहीं करुगा

शिवम् मिश्रा said...

भाटिया जी ,

प्रणाम |

कितनी भी कोशिशे करे आप और हम यह कंस और रावण इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ने वाले !! जब तक एक आम हिन्दुस्तानी अपनी सोच नहीं बदलेगा कुछ भी नहीं हो सकता | आप के और मेरे, अपने अपने ब्लोग्स पर लिखने से कुछ ना होने का | मैनपुरी , जहाँ मैं रहेता हूँ, उत्तर प्रदेश के 'politically highlighted cities ' में से है | In fact presently Shri Mulayam Singh Yadav is the MP from here. सिवाए अपनी राजनीति के मैंनेपिछाले १२ सालो में यहाँ के किसी नेता को "GIRL CHILD " के विषय में बोलते या भ्रुण हत्या पर बोलते नहीं सुना | बात लौट फ़िर के वही आ जाती है कि आम आदमी की सोच को बदलना होगा| यहाँ अब भी लड़की के पैदा होने पर एक प्रकार का शोक सा मनाया जाता है , कोई मुबारकबाद नहीं देता बल्कि यह कहेते बहुतों को सुना है कि, "चलो कोई बात नहीं, अगली बार लड़का होगा |"और यह उन लोगो कि बात कर रहा हूँ जोकि, so called , पढ़े लिखे है | गरीब को तो साहब, जाने ही दीजिये |

फ़िर भी.........." दिल के खुश रखने को... 'ग़ालिब'....यह ख्याल अच्छा है |"


सादर आपका

शिवम् मिश्रा

शिवम् मिश्रा said...

Kindly check :-

http://jaagosonewalo.blogspot.com/2009/09/blog-post_12.html


http://jaagosonewalo.blogspot.com/2009/09/blog-post_6043.html

सैयद | Syed said...

आज राम और कृष्ण के बजाय रावण और कंस ही दिखते हैं.

कहने को बहुत तरक्की कर ली हमने... पर इस तरह के कई मामलों में अब भी वही दकियानूसी सोच है हमारी...

... बहुत सही कहा आपने... जिन्हें बेटी से परहेज है, उन्हें बहु भी मत दीजिये.

शिवम् मिश्रा said...

Please DO CHECK !!

http://burabhala.blogspot.com/2009/09/blog-post_4111.html

संगीता पुरी said...

विचारों के प्रचार प्रसार के लिए धन्‍यवाद !!

Udan Tashtari said...

सही संदेश!!

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.

जय हिन्दी!

रविकांत पाण्डेय said...

एक ज्वलंत मुद्दे को उठाया है आपने। ऐसे कंस हर जगह फैल गये हैं आजकल। इनका बहिष्कार जरूरी है।

संजय तिवारी ’संजू’ said...

आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.

आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

seema gupta said...

बेहद भावनात्मक लेख मन को छु गयी ये अपील

regards

Arvind Mishra said...

बिलकुल सही आह्वान ! साथ हूँ आपकी इस मुहिम में !

हिमांशु । Himanshu said...

हम सब कृतसंकल्पित हैं इसके लिये । संवेदनशील प्रविष्टि का आभार ।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बेहतरीन संदेश देती हुई अपील है आपकी. सभी आपके साथ हैं.

रामराम.

mehek said...

bahut sahi mudda uthaya hai,shayad aur jagrukta aur saksharta ki jarurat hai,lekin tajub tab hota jab padhelikhe log bhi ye karte hai.

रश्मि प्रभा... said...

maine dekha hai kans aaj bhi

अभिषेक ओझा said...

बिलकुल सही पहचाना आपने.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

समाज में जागरूकता फैलाने के लिए इस प्रकार के प्रयासों की नितांत आवश्यकता है....भाटिया जी हम भी आपकी इस मुहिम के भागीदार हैं!!!

रंजना said...

एकदम सही कहा आपने.....

Nirmla Kapila said...

bahबुत सही कहा आपने हम इसके लिये आपके साथ हैं आभार

श्याम सखा 'श्याम' said...

मैं तो कहूंगा
अपने शहर के हर पार्क में यह पोस्ट display होनी चाहिये संभव हुआ तो आपके व अपने शहर से आरम्भ करता हू

लिखूंगा
झाकें अपने भीतर कहीं आप भी कंस के अवतार तो नहीं हैं।

Kajal Kumar said...

एसों के लिए श्राप ही काफी है

sandhyagupta said...

Adhunik kans to puratan kans se kahin jyada khatarnak malum padte hain.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आप देखने की बात कर रहे हैं,
चारों ओर कंस ही कंस तो हैं।

शोभना चौरे said...

ज़ुबान खामोश है पर दिल बैचेन है
आँखे ढूँढती है समुंदर डूबने के लिए
अहसासो की चुभन जीने नही देती
बस अब
एक कतरा ज़िदगी की धूप दे दो
चाँदनी अब सोने नही देती
बारिश आँसू सूखने नही देती
बसंत सिर्फ़ दर्द दे जाता है
बस अब
एक कतरा जिंदगी की धूप दे दो
मन के टूटे तारो को
बादल राग भी जोड़ नही पाता
योग की साधनाभी अर्थ के साथ मिलकर अर्थ हीन हो गई
बस अब
एक कतरा जिंदगी की धूप दे दो

हमारे सबकी मन की बेईमानी को बड़े ही सहज रूप मे रच दिया है आपने
हमारी क़ानून प्रणाली क़ानून व्यवस्था की दिक्कतो के चलते कोई ऐसे केसो मे सामने न्ही आना चाहता |
कुछ लोगो के लिए ऐसी घटनाए सिर्फ़ तमाशा होती है और कुछ लोग ऐसी अमानवीय और घ्र्नीत घटनाओ को अंजाम देते है
वे सब निंदनीय है |



आज कन्स और रावण के कद उँचे और उँचे होते जा रहे है देखिए अभी दशहरा आ रहा है कैसे रावण ही रावण को सजाकर जलाएगे
प्रवचनो मे ज़ोर शोर और बजे गाजे के साथ कन्स मारा जाता है |और अपने अंदर के कन्सऔर रावण साल दर साल पोषित होते जाते है |
आपकी इस पवितरा भावना मे हम आपके साथ है