28/06/09

अनाम या अनामिका ?? खुद ही पहचान ले

नमस्कार, आज मै घुमता घुमता शर्मा जी के एक दो दिन पुराने लेख पर गया, ओर वहां पुरानी टिपण्णीयां पढने लगा, यह मना थोडे ही है, फ़िर पढते पढ्ते एक टिपण्णी पर नजर पढी, जिस मै हमारी ओर हमारे भाईयो को तारीफ़ के पुल बंधे थे,यह तारीफ़ किसी अनामी जी ने की, लेकिन यही टिपण्णी मेने दो तीन बार पढी, तो मालूम हुआ कि यह टिपण्णी किसी महिला यानि आनमिका जी की है.... आप भी इसे ध्यान से पढे, इस के शव्दो पर ध्यान दे..

Anonymous said...

हमारा नाम क्यों खराब करते हैं? यहां का सब माहौल खराब करने मे आप जैसी पोस्ट लिखने वाले, शास्त्री, और सबका सरदार ताऊ और उसके चेले, राज भटिया, अरविंद मिश्रा, अविनाश वाचस्पति जैसे लोग जिम्मेदार हैं और हमारा नाम क्यों लेते हैं? महिलाओं का कुछ तो सम्मान करना सीखो।
June 26, 2009 2:41 AM


अब आप ही इसे पढ कर बताये कि यह किसी महिला की ही टिपण्णी ही लगती है या नही, क्योकि यह भाषा आप को कई लेखो मे , कई टिपण्णीयो मे मिलेगी.
लेकिन शाक करने से कोई चोर साबित नही होता, इस लिये अभी खोज बीन चालू है, बस इन अनाम/ आनमिका जी को चुस्त करने के लिये यह लिखा है,कि अगली गलती ना करे वरना.......परदा उठ जायेगा....

23 comments:

Udan Tashtari said...

एक जासूसी हैट और लगा लो और एक पाईप धुँआ छोड़ते हुए-जासूस राज भाटिया.फिर हम सब सलाम करेंगे. :)

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

पर्दा उठ जाने दो.......

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

समिरभाई की सलाह पर भी सोच विचार करने मे नुकशान नही है.

डॉ. मनोज मिश्र said...

पर्दे में मत रखिये नहीं तो ऐसी बहुत सी टिपण्णीयो की बाढ़ आ जायेगी .

बी एस पाबला said...

महिला या महिला जैसों की तो लग रही टिप्पणी :-)

संगीता पुरी said...

पूरी जासूसी कर रहे हैं आप तो !!

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह भाटिया जी अब इस अनामिका का फोटो भी ढूंढ लो तो कसम जी टी रोड की मजा आ जायेगा...

Anil Pusadkar said...

पता नही है कौन है वो …………।

ताऊ रामपुरिया said...

लगता है अब ताऊ को ये अनामिका हरयाणा छोड कर ही आयेगी? भाई कुछ हमको भी तो बताओ कि आपने पकड ली है या अभी जाल ही फ़ैलाया हुआ है.:)

रामराम.

Nirmla Kapila said...

जल्दी करें मेरे ब्लोग पर भी कोई अनाम तिप्पणी कर के अप्ने आप डिळीट भी कर देता है मुझे तो अधिक जानकारी भी नहीं है मुझे क्या करना चाहिये

अल्पना वर्मा said...

क्या बात है ! 'अनाम ने नाम खराब न करने की गुजारिश की है!'
'नाम वाला बदनाम होता है 'सुना था मगर अब नयी बात सुनी-'अनामी भी बदनाम होते हैं???'

बिलकुल ऐसी ही मिलती जुलती टिप्पणी -[टारगेट--यही गिने चुने नाम ]--अजय जी की एक पोस्ट पर भी २-४ दिन पहले थी...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

007 भाटिया जी.......:)

G M Rajesh said...

apne likh ki aage kya?
so likh diya



aa dekhen jara
ka
agla bha

अविनाश वाचस्पति said...

लो कल्‍लो जी बात

अनामी को नामों में आने लगा स्‍वाद

जायका न खराब हो जाए

अनामिका हों तो बतलायें

कि टिप्‍पणी करने से पहले
कौन सा इत्र/घासलेट इस्‍तेमाल करती हैं

क्‍योंकि वही गंध टिप्‍पणियों में

महसूसी जा सकती है

बोलो
जोर से बोलो
चना जोर गरम

बाबू मैं लाया मजेदार।

●๋• सैयद | Syed ●๋• said...

अब पर्दा उठा ही दो ठाकुर :)

अजय कुमार झा said...

राज भाई...कसम से..परदे को आग लगा दो ..या फाड़ कर चित्थ्रे चित्थ्रे कर दो....मगर कसम सोते वाले की..अब तो ये पर्दा हट ही जाए....बहुत मजा आने वाला है..भैया बड़ा परेशान किया शरीफों को ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

yeh parda utha do, jara mukhda dikha do sir, anamika ji ka aur tareeka bhi bataiyega.

Abhishek Mishra said...

Lagta hai kafi kareeb hain aap is 'Gumnaaam'ko range haath pakadne ke. Pata nahin is 'hasti' ko benaqab karna uchit hoga ya nahin, vaise ye kai nai posts ki prerna to ban hi rahe/rahi hain.

सुशील कुमार छौक्कर said...

पर्दा उठना ही चाहिए।

प्रकाश गोविन्द said...

मुझे लगता है कि यह कोई अनामी ही है !

अपनी तरफ से ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर आख़िरी लाईन लिखी है ताकि लोग किसी महिला पर शक करें !


आज की आवाज

venus kesari said...

महिलाओं का कुछ तो सम्मान करना सीखो।
ये एक चुग्गा भी हो सकता है अनामी ने चुगाया हम सब चुग रहे हैं
क्या पता भरमाने के लिए किसी पुरुष ने ये लिखा हो ताकि शक किसी महिला पर जाये
वीनस केसरी

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

पता नहीं यह टिप्पणी महिला की है या नहीं, पर आपको और कई अन्य को हिला जरूर गई है! :)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

क्या बात है जी...! आजकल बड़े भाई लोग बेनामीफोबिया में जी रहे हैं। मैं तो बस उस मुँह्चोर लेखक के कमेण्ट्स मजे लेकर पढ़ता हूँ। यदि यह पता चल गया कि यह कोई अनामिका है तब तो स्वाद बढ़ ही जाता है।

शर्माजी से कहिए, आनन्दित रहें।:)