11/04/09

जवाब की तलाश का सफ़र

ये सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं कि अगर दुनिया भर के सभी मुसलमान एक ही क़ौम का हिस्सा हैं तो फिर इतने अलग अलग मुस्लिम देश क्यों हैं? अगर आप इस लेख को पुरा पढना चहते है तो यहां चटका लगाये

मै कुछ दिनो बाद फ़िर से आऊंगा, तब तक आप सब को नमस्ते, राम राम, सतश्री अकाल जी, सलाम

17 comments:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

पढ़ लिया राज जी अब कहाँ जा रहे है यह पढ़कर उलझन कड़ी हो गई है कृपया स्पष्ट करे भाई साब आभार

जितेन्द़ भगत said...

अच्‍छे लेख से अवगत कराने के लि‍ए आभार।
पर आप कहॉं जा रहे हैं ?

Arvind Mishra said...

सचमुच विचारणीय !

राज भाटिय़ा said...

महेन्द्र मिश्र जी, ओर जितेंदर जी नमस्कार मै भारत आ रहा हुं, इस कारण ब्लांग से दुर ही रहना पडेगा, मजबुरी है.
धन्यवाद

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

आप भारत आ रहे है इससे बड़ी प्रसन्नता की और क्या बात हो सकती है . आपकी यात्रा मंगल माय हो शुभकामनाओ के साथ .

रश्मि प्रभा said...

rajesh joshi ji ki lekhni padhaane ke liye aabhaar

दिलीप कवठेकर said...

बढिया लेख.

अपकी भारत यात्रा मंगलमयी हो. वैसे भारत में भी नेट की व्यवस्था है जो आप के लिये कोई बडी बात नही होनी चाहिये.

Science Bloggers Association said...

विचारोत्‍तेजक लेख।

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तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

Abhishek Mishra said...

इसलाम को इसी आंतरिक तलाश की जरुरत है. भारत यात्रा की शुभकामनाएं.

G M Rajesh said...

jab hajrat dharti par aaye tab bhi inke kunbe alag alag rahe
ab desh ka fark hai
vajah hai sataa aur sinhasan ki daud
jo kabhi kahin thamti nahi sivay hamaare desh ke.

Harsh said...

bharat yatra par dhair saari shubhkamnaye raj ji

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

इस्लाम के अनुयायियों के साथ दिक्कत यह है कि वे छ: सौ साल से चले आ रहे कट्टर धार्मिक मान्यताओं में बदलाव नहीं स्वीकार करना चाहते.

आदर्श राठौर said...

भाटिया जी भारत आइए लेकिन यहां आकर भी लगातार लिखिए....

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह... बहुत अच्छा लेख... भारत में आपका स्वागत है.. रोहतक पहुंच कर संपर्क करें ९४६६२०२०९९

दिगम्बर नासवा said...

अच्छा लेख है................जानकारी भी है isme

Mrs. Asha Joglekar said...

लेकिन सवाल तो अभी भी वैसे का वैसा ही है । आतिश का खयाल थोडा इकतरफा हो सकता है लेकिन मुसलमान महज कुरान के आधार पर ेक नही हो सकता वह अपनी स्थानीय संस्कृति से भी जुडा रहना चाहता है उसीसे जुडा इपना स्वतंत्र अस्तित्व भी बनाये रखना चाहता है ।

"अर्श" said...

KAHAAN HO BHATIYA SAHIB NAMSKAR, AAPKI KUSHALATAA KI KAAMNAA KE SAATHA AAPKA INTAZAAR...




ARSH