10/01/09

राष्ट्रपति से हाथ मिलाने से इनकार

इसे कहते है प्रजात्नत्रं, क्या हम ऎसा एक विधायक या सडियाल से मन्त्री के संग कर सकते है, जिस दिन एक आम भारतीया मै यह हिम्मत आ गई उस दिन से हम सही दिशा की कोर चलना शुरु करेगे... वरना हमारे वोट कभी ७००० मै तो कभी एक शराब की बोतल , तो कभी जाति वाद पर , तो कभी धर्म के नाम से बिकते रहेगे.....
हम मै है हिम्मत बस जागने की ओर जागरुक होने की जरुरत है, तो इस खबर को पढने के लिये यहां चटखा लगाये

25 comments:

Dr. Amar Jyoti said...

भारतीय लोकतन्त्र को तो अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है।

Mired Mirage said...

तभी तो हम भारतीय दूर से ही नमस्कार कर देते हैं। हाथ छूएँगे ही नहीं तो गंदा कैसे होगा ?
घुघूती बासूती

सचिन मिश्रा said...

main bhi mired mirage ke vicharo se sahmat hun.

जितेन्द़ भगत said...

वैसे यह समय दूर नहीं है, सफेदपोशों के स्‍याह कारनामें सामने आऍंगे तो लोग उससे दूर जरूर भागेंगे।

mahashakti said...

जैसा पूत वैसा करतूत

राष्‍ट्रपति और जनता दोनो के लिये :)

सुशील कुमार छौक्कर said...

अभी वक्त लगेगा। अभी तो काफी लोग नेता बनने के लिए उतवाले रह्ते हैं। वैसे काश ऐसे नेता भी आए कि लोग हाथ मिलाने को तरसे।

Gyan Dutt Pandey said...

सरकोजी एक्स्ट्रीम रिस्पॉन्स जनरेट करते हैं!

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बढिया है जी.

रामराम.

P.N. Subramanian said...

नमस्ते वाला अपना सिस्टम कितना बढ़िया है!

Dr. Chandra Kumar Jain said...

ये तो खूब है भाई.
================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

लेकिन यहां भारत में ऎसा हो पाना शा्यद असंभव है.........

रश्मि प्रभा said...

आम जागरूक जनता के हौसले की बात है....
आसान नहीं

Amit said...

bahut badhiya jee...acchi jaankaari de aapne...

डॉ .अनुराग said...

abhi bharat me aisa hone me kaafi vaqt lagega.

अभिषेक ओझा said...

एक बार ऐसी घटना जेएनयु कैम्पस में हुई थी. लेकिन भारत में उस कैम्पस के अलावा कहीं और होना अभी तो सम्भव नहीं दीखता.

दिलीप कवठेकर said...

काश , ये मैं भी कर दिखा सकता.मगर , हिम्मत वाली बात नहीं है, मगर इनसे दूर ही रहना अच्छा .

Dr.Bhawna said...

अच्छी रही ये खबर...

विनय said...

हाँ यही सच है पर क्या करें
बहुत बढ़िया साहब!


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Dev said...

आपको लोहरी और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ....

shelley said...

avi bhart me aisa samay aane me der lagega. yaha to logon ki aastha hoti hai ki kaise rasukh walon se sampark bane or mera v kuch kaam nikal aaye.

COMMON MAN said...

pata nahi ham logon me satya ko sweekarne ki himmat kab aayegi, aapko ek satya saamne rakhne ke liye dhaynavaad.

Harkirat Haqeer said...

राष्ट्रपति से हाथ मिलाने से इनकार इसे कहते है प्रजात्नत्रं, क्या हम ऎसा एक विधायक या सडियाल से मन्त्री के संग कर सकते है, जिस दिन एक आम भारतीया मै यह हिम्मत आ गई उस दिन से हम सही दिशा की कोर चलना शुरु करेगे... वरना हमारे वोट कभी ७००० मै तो कभी एक शराब की बोतल , तो कभी जाति वाद पर , तो कभी धर्म के नाम से बिकते रहेगे.....

hame is din ka hi intjar hai....

योगेन्द्र मौदगिल said...

लोकराज लोकलाज से चलता है यदि कोई माने तो पर आपका धन्यवाद भाटिया जी

प्रदीप मानोरिया said...

कटु यथार्थ
http://manoria.blogspot.com
http://kundkundkahan.blogspot.com

sandhyagupta said...

Bharat me to aisa sambhav nahin dikhta.Yahan to log badi hastiyon jinme neta bhi shamil hain, ko paas se dekhne aur chune ke liye lalayit rehte hain.
Mujhe is samachar ke bilkul viprit kai varsh pahle ki ek ghatna yaad aa rahi hai.Rajiv Gandhi ke U.P ke kisi daure ke dauran unse haath milane ke baad kisi vyakti ne ek saptah tak apna haath nahin dhoya tha.