05/01/09

चिंतन भगवान का सहारा

आज का चिंतन जब हम बहुत छोटे थे तो पिता जी ने कहानी के रुप मे सुनाया था, ओर मेने अपने बच्चो को भी यही संस्कार, ऎसी कहानियो के रुप मै दिये है... तो लिजिये आप भी पढिये इस चिंतन रुपी कहानी को...
उस ऊपर वाले के सहारे
सर्दियो के दिन थे, इस लिये शाम जल्दी हो जाती थी, यानि जल्दी अंधेरा हो जाता है, एक दिन मोसम बडा खराब था, ओर आसमान मै दोपहर से ही बादल छाये हुये थे, लगता था अन्धेरी ओर तुफ़ान बहुत घिर से आयेगे, सभी पशु पक्षी अपने अपने सुरक्षित स्थानो पर पहुच गये थे, एक कोयल अपना घर भुल गई, क्योकि एक तो काफ़ी अंधेर हो गया था, दुसरा वो बेचारी घवरा गई थी.

सामाने ही उसे एक नीम का बडा सा पेड दिखाई दिया, कोयल ने सोचा चलो आज रात यही गुजार लुगी, ओर जेसे ही वह उस नीम के पेड पर बेठी, वहा बेठे कोव्वो ने कांव कांव कर के उसे भगाना चाहा, कोयल नै कहा भाईयो मै आज अपना घर भुल गई हुं, बस आज की इस तुफ़ानी रात मै मुझे किसी एक कोने मै पडी रहने दो, कल सुबह ही मै यहा से चली जाऊगीं,लेकिन कोंवे कहा मानाने वाले थे, ओर वह सब उस कोयल को खुब गालिया निकालने लगे , तो कोयल ने कहा भाईयो मै तो तुम्हारी बहिन जेसी हूं, कृप्या मेरे ऊपर दया करे अब तो आंधी भी शुरु हो गई है, मै गरीब कहा जाऊगी, आज की रात बस आज की रात मुझे यहां रहने दो....

लेकिन कोवें तो स्वभाव से ही लडाके होते है, वो कोयल तो क्या अपिस मै भी बहुत लडते है, ओर खुब शोर भी तो मचाते है, अब सारे कोवे कोयल को मारने की सोचने लगे, तो कोयल ने, वहा से जाने की सोची, तो कोवे बोले अरे कोयल तुम तो भगवान को बहुत मानती हो फ़िर उसी भगवान के सहारे किसी दुसरे पेड पर चली क्यो नही जाती, जा दफ़ा हो यहां से वरना हम तेरे पर नोचं डालेगे.

कोयल वहा से उड कर सामने एक आम के पॆड पर बेठ गई, तभी उसे एक कोटर( ऎक डाल डुडने से बना एक छेद) सी दिखाई दी, ओर कोयल डरते डरते उस मै चली गई, वहा पहले से ही कबुतर, गोरेया,तोता ओर कई अन्य पक्षी बेठे थे, उन सब ने मिल कर कोयल को भी जगह देदी.

फ़िर तो खुब जोर से बारिस हुयी, खुब मोटे मोटे ओले भी पडे, उन ओलो से कई कोवे वेचारे मर गये, कई बुरी तरह से घायल भी हो गये, सारी रात बरसात होती रही, दुसरे दिन जब सुर्य देवता निकले तो मोसम भी साफ़ हो गया, ओर बादल भी छटक गये, तो उस कोटर से सारे पक्षी एक दुसरे को राम राम कर के आसमान मै उड चले... अब कोय़ल को देख कर कई घायल कोवे जमीन पर गिरे पहचान कर बोले अरे कोय़ल बहिन तुम केसे बच गई... कोयल बोली उस ऊपर वाले के सहारे से

22 comments:

P.N. Subramanian said...

सच कहा. संकट में ऊपरवाला ही तो है जिस का आसरा सब को मिलता है.

Nirmla Kapila said...

bahut badiaa hai

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

भगवान का सहारा ही बेड़ा पार लगाता है...। अच्छी प्रेरक पोस्ट।

irdgird said...

जाको राखे साईंया, मार सके न कोए।

seema gupta said...

"सच कहा उपर वाले से बढ़ कर कोई नही, तभी तो कहते हैं... तेरा नाम एक सांचा दूजा न कोई.. मेरे राम "
regards

अशोक पाण्डेय said...

हमेशा की तरह प्रेरणादायी आलेख। जिन्‍हें कहीं से भी मदद नहीं मिलती, भगवान वैसे लोगों का खुद ख्‍याल रखते हैं।

रश्मि प्रभा said...

प्रेरणा देती कहानी......

Amit said...

बहुत अच्छी कहानी थी ......सही में जिसका कोई नही उसका ऊपर वाला होता है...

COMMON MAN said...

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों-- की याद आ गयी इस कहानी को पढ़कर.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

सच है संकट के समय ऊपर वाला (ईश्वर) ही सबसे बड़ा सहारा है .
प्रेरणास्पद कहानी के लिए आभार.

ताऊ रामपुरिया said...

प्रेरक कहानी.

रामराम.

pintu said...

bhagvan ka sahara hi beda paar lagata hai!bahut hi prerak kahani hai!

G M Rajesh said...

uparwalaa sabko baraabari se deta hai
sirf samjhne aur mauke ki najaakat par aapkaa dil gawah to ho

डा० अमर कुमार said...


भाटिया जी, यार ज़रा यह बताओ कि, जितनी बार यहाँ आता हूँ ..
कुछ न कुछ नया ही रंगरूप देखने को मिलता है !
आखिर, राज़ क्या है ?

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह... भाटिया जी वाह... बेहतरीन प्रस्तुति है.. साधुवाद स्वीकारें..

अल्पना वर्मा said...

प्रेरक पोस्ट.

कविता वाचक्नवी said...

बुजुर्गों के पास जीवनसत्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के ऐसे कारगर तरीके थे कि वे बातों बातों में कई संस्कार दे जाते थे।

Zakir Ali Rajnish (TSALIIM) said...

प्रेरक एवं सार्थक प्रस्‍तुति। आभार।

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

भगवान् का सहारा ही तो सब कुछ है

Suresh Chandra Gupta said...

अच्छी प्रेरणादायक कहानी है. मिल जुलकर रहना तो भूल गए हैं आज कल सब. आशा है कुछ सीखेंगे इस कहानी से.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह्! भाटिया जी, क्या खूब कही.......
बहुत ही प्रेरक प्रसंग सुनाया.........
धन्यवाद.........

Dev said...

बहुत सुंदर और बहुत ही प्रेरणा दायक कहानी है , मन करता है की बस कहानी ही सुनता रहूँ
बचपन में दादी की कहानी सुने बिना सोता ही नही था , आपकी कहानिया पढ़ कर दादी की कहानिया याद आ जाती है . यह कहानिया एक तरह का संस्कार है जो एक पीढी से दूसरी पीढी में हस्तांतरित होती है , जैसा की आपके पिताजी ने आप को सुनाई और आपने इस कहानी को अगली पीढी में . आप की पिताजी का मेरा सादर प्रणाम .....