19/01/09

चिंतन सहनुभूति

आज का विचार हम सब कब किस मुसिबत मै फ़स जाये किसी को नही पता, इस लिये हम सब को मुसिबत मे फ़ंसे हर इंसान की मदद जरुर करनी चाहिये, बिना भेद भाव के... तो चलिये चिंतन की ओर चले......


एक बार भगवान बुद्ध एक कस्वे मै ठहरे हुये थे, उस साल भी बरसात ना हुयी थी, भयंकर अकाल पडा हुआ था, लोग भुखे मर रहे थे,कोई भी किसी की मदद नही कर रहा था,

यह सब देख कर बुद्ध ने नगर के सभी सेठॊ ओर धनिक लोगो को एक जगह बुलाया, ओर उन गरीब लोगो को भी बुलाया,ओर उन धनिक ओर अमीर लोगो से बुद्ध ने प्राथना की, कि हे सज्जनॊ आप सब से राज्य की, इन गरीबो की समस्या छुपी नही, यह भी तुम्हारे ही भाई है,तुम्हारे ही बच्चे है,आओ तुम सब मिल कर इन कि मदद करो इस समय !! लेकिन कोई भी धनवान इन अकाल पीडित गरीब लोगो की मदद के लिये आगे ना आया.



इन्ही नगर सेठो के बीच मै एक बालिका भी बेठी थी, उस बालिका को भगवान बुद्ध की दयानीया बाणी ने ओर उन पीडितॊ की हालात ने अन्दर तक झक्झोर दिया, वह अपने स्थान से उठी ओर बुद्ध के सामने जा कर प्रणाम किया,ओर बोली हे देव आप मुझे आशीर्वाद देवे ताकि मै लोगॊ के इस दुख कॊ बांट सकूं.इस नन्ही सी लडकी को देख कर सभी लोग बहुत हेरान हुये.
बुद्ध देव भी इस नन्ही सी बच्ची को देख कर बोले बेटी जब इस सभा मै इतने बडे बडे लोग बेठे है वो कुछ नही कर सकते तो तुम , तुम तो अभि बहुत छोटी हो ओर तुम्हारे पास तो अभी कुछ भी नही है, तुम क्या कर पाओगी, ओर ... बुद्ध कुछ ओर बोलते उस से पहले ही बच्ची बोल पडी, बाबा आप मुझे बस अपना आशिर्वाद ही देदे, मै अभी से घर घर भीख मांग कर मुट्ठी , आधा मुट्ठी जितना भी मुझे सारे दिन मे अनाज मिला उस अनाज से सारे नही दो चार लोगो का तो पेट भर ही दुंगी, अगर मै दो चार लोगो की जान ही बचा लूं, तो भी कुछ तो बच जायेगे, ओर यह कह कर बालिका फ़ुट फ़ुट कर रो पडी.

भगवान बुद्ध एक टक उस बालिका को देख रहे थे, कितना दर्द है इस बालिका के दिल मे इन लोगो के लिये, तभी फ़िर उस बच्ची की आवाज बुद्ध कॊ सुनाई दी, जो सुबकते सुबकते कह रही थी की हे देव अगर यह सभी लोग रोजाना एक एक मुट्ठी अनाज भी दान मे दे तो इन का कुछ नही घटने वाला, लेकिन उस अनाज से इन सब को जीवन दान जरुर मिल जायेगा, कोई भी इस भुख से नही मरेगा, हे देव जेसे बूंद बूंद से सागर भर जाता है वेसे ही सब के दान से इन गरीबो का पेट भी भर जायेगा.

अगर यह लोग दान नही देते तो कोई बात नही मे दुसरे गांव मे जाऊगी, दुसरे शहर मे जाऊंगी, जितना हो सका मे इन आफ़त मै फ़ंसे लोगो की मदद करुंगी, ओर इस नन्ही सी बच्ची की बाते सुन कर वहा बेठे सेठो का दिल उन्हे धिधकार्ने लगा, ओर उन मे सोया इंसान जाग गया, ओर सभी ने अपने अपने खजाने से, गोदाम से सभी दुखियो को दिल खोल के दिया, ओर अकाल समस्या खत्म हो गई, ओर फ़िर उस साल वर्षा भी खूब हुयी , ओर सभी ने उस साल खुब मेहनत कर के खुब आनाज पेदा किया, ओर सेठो के गोदाम फ़िर से भर गये.

36 comments:

  1. सुन्दर प्रेरक प्रसंग्। धन्यवाद ।

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  2. प्रेरक प्रसंग है। परन्तु कहीं पढ़ा था-
    'मैंने ग़रीबों को रोटी दी-तुमने मुझे संत कह कर पुकारा। मैंने पूछा ग़रीबों के पास रोटी क्यों नहीं है और तुमने मुझे कम्युनिस्ट कह कर कोसा।'

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  3. कहा जाता है कहाँ का लिया दिया कहाँ काम आ जाए, इसी कहावत को सार्थक करता प्रेरक प्रसंग

    Regards

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  4. बहुत प्रेरक कथा. आपका आभार महाराज!

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  5. ram ram ...

    badi achchhi kahaani lagi...

    bahut din baad aaye lekin kya khoob aaye

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  6. bahut prerak aur bhaavmay prasang hai

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  7. प्रेरक प्रसंग है।

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  8. बहुत ही प्रेरणा दायी लेख है । हम सभी को इससे सीख लेनी चाहिए ।

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  9. ek achhi katha ke madhyam se aap jo kahte hain,wah bahut mayne rakhta hai........

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  10. आपके ब्लॉग पर आने पर हर बार एक नया अनुभव होता है. आपकी लेखनी यूँ ही जादू बिखेरती रहे.

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  11. सुन्दर प्रेरक प्रसंग्

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  12. बहुत प्रेरक प्रसंग लिखा है आपने.

    रामराम.

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  13. भगवान् उस बच्ची की तरह सको दिल दें. सुंदर प्रेरक प्रसंग.

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  14. bahut hi achhi sundar kahani,dil ko chu gayi.

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  15. prerak or sach kathan. jitna sambhav ho madd to deni hi chahiye

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  16. सचमुच, अगर उस बच्ची की तरह सभी सोचने लगें तो संसार का परिदृश्य ही बदल जाये।

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  17. मेरे विचार से परोपकार आपको आपकी नजरों में ऊंचा उठाता है और यह बड़े काम की बात है।

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  18. Waah ! Itne sundar aur prerak prasang ke prakashan hetu sadhuwaad.

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  19. भाटिया साहब, मैं किन शब्दों में धन्यवाद दूँ,
    मेरी ज़िन्दगी के बिल्कुल एक सही मौके पर यह पोस्ट पढ़ने को मिली ।

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  20. आपने प्रेरक प्रसंग पोस्ट कर नई दिशा दी है
    Sadar

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  21. आपने प्रेरक प्रसंग पोस्ट कर नई दिशा दी है
    Sadar

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  22. प्रेरक प्रसंग !!

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  23. सही विचार...
    और सुंदर अभिव्यक्ति...

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  24. सचमुच बुद्ध से भी समझदार और ज्ञानी थी वह बच्‍ची। बेहतरीन प्रेरक कथा।

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  25. बहुत ही सुन्दर प्रेरक प्रसंग सुनाया आपने.......
    धन्यवाद.........

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  26. भई वाह भाटिया जी इस प्रस्तुति के विशेष आभार

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  27. भई वाह भाटिया जी इस प्रस्तुति के विशेष आभार

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  28. ... अत्यंत प्रसंशनीय व प्रभावशाली अभिव्यक्ति है।

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  29. बहुत प्रेरक संस्मरण है बहुत बहुत धन्यबाद
    http://manoria.blogspot.com
    http://kundkundkahan.blogspot.com

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  30. भाटिया जी ,
    बड़ा ही प्रेरक प्रसंग है !!!

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नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये