24/12/08

काम की बाते !! सर्दी से बचाव

्वेसे तो सभी को पता है कि सर्दी से बचाव केसे करना है, लेकिन कभी कभी दुसरो की सलाह भी काम आ जाती है, जब हम नये नये यहां आये तो हमे सिर्फ़ काली चाय ( भारतीया चाय) ही दुनिया की नम्बर एक लगती थी, ओर हमारे जर्मन साथी कभी सोंफ़ की, कभी नीबूं की चाय तो कभी कोई ओर चाये पीते, हम अकसर सोचते थे कि यह गोरो के चोंचले ही है :)
लेकिन वक्त ने समझा दिया की यह चोंचले नही एक जरुरत है, ओर अब हम भी अब सर्दियो मे नींबू की चाय खुब पीते है, ओर दिन मे कई बार, एक ताजा नींबू के ४,६ टुकडे कर के उसे ६ गिलास या मग्गे ( छोटे कप नही ) पानी मे डाल कर खुब उबाले ५,६ मिन्ट फ़िर उसे गिलास या मग्गे मै डाल ले, ओर फ़िर उस मे चीनी, या शहद अपनी इच्छा अनुसार डाल ले, या कुछ भी ना डाले लेकिन नींबू का बचा टुकडा नीचोड ले ओर इसे गर्मा गर्म धीरे धीरे पिये, फ़िर बताये आप का जुकाम , बलगम, कहां है, अगर आप इसे रोजना दिन मे चार पांच बार पिये तो पुरी सर्दियो मे आप बिमारी से बचे रह सकते है. नींबू को सिर्फ़ धोना है छिलका नही उतारना छिलके समेत उस के टुकडे कर के उबाले,

अगर आप को या बच्चो को खांसी है तो एक चम्मच असली शहद मे एक चुटकी हल्दी मिला कर, मामुली सी गर्म कर ले ओर उसे चाट ले रात को सोने से पहले फ़िर कुछ ना पीये दो तीन घन्टे, सुबह आप को खुद फ़र्क महसुस होगा. इसे दो तीन दिन कर सकते है ओर हर उम्र के बच्चे को यह चटा सकते है.
पाव गर्म रखे.

23 comments:

डा० अमर कुमार said...

अरे भाटिया साहब..
मैं भी बड़े हौसले से अपने मरीज़ों को यह नुस्खे
बताया करता था । सोचा कि कोई साइड इफ़ेक्ट
नहीं.. कमख़र्च बालाँनशीं ।
हुआ उल्टा.. लोग कहने लगे कुछ नहीं जानता
होगा, तभी यह बवाल बताता है !
वैसे मैं अपने व्यक्तिगत जीवन में इनका मुरीद हूँ !

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत काम की बात बताई आपने !

रामराम !

''ANYONAASTI '' said...

अगर लौंग का प्रयोग करें तो वह भी एंटी बायोटिक का प्रभाव छोड़ता है ,दालचीनी ,मूड फ्रेश करता है ,इलायची अवसाद दूर कराती है ,काली मिर्च +तुलसी कुछ देसी घी काफ निकालती है ,| लोग ढेरों अदरक छोड़ कर चाय पीते है जैसे अदरक का जूस पी रहे हों अति हर चीज की बुरी होती है ,अधिक अदरक काफ सुखा देती है ,ध्यान रखें |

विनय said...

बहुत अच्छा सर्दी से बचने का उपाय है अबकि ज़रूर आज़मायेंगे


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http://vinayprajapati.wordpress.com/

सचिन मिश्रा said...

Jankari ke liye aabhar.

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत उपयोगी जानकारी दी है आपने।धन्यवाद।

seema gupta said...

बहुत काम की बात और सर्दी से बचने का उपाय है जानकारी के लिए आभार
regards

Aaditya said...

शहद और हल्दी वाला नुस्खा ्बहुत काम का है!! धन्यवाद!!

रंजन

Gyan Dutt Pandey said...

अच्छा बताया जी। ये चीजें बेहतर हैं बनिस्पत अंग्रेजी दवाओं के।

Vidhu said...

आदरणीय भाटिया जी ..अच्छी और उपयोगी जानकारी है ...इन दिनों तो नीबू की पैदावार भी बहुत होती है ..बिटिया भी आपको बधाई दे रही इस पोस्ट के लिए ....जब तक पोस्ट आप तक पहुंचे ...हम नीबू की चाय ,आपकी विधि से बनाई पी रहें होंगे आभार

सुशील कुमार छौक्कर said...

सच ये तो काम की बात बताई। आज की पोस्ट से अपने नाना जी की याद आ गई जब नानी के यहाँ जाते तो अगर खाँसी हो जाती तो नाना कहते थे अरे इस छोरे ने हल्दी दे दो थोडी सी फाँकी मार लेगा परेशान हो रहा घना कसूता ही ।

विवेक सिंह said...

शुक्रिया जी . अच्छी जानकारी दी !

रश्मि प्रभा said...

maine to note kar liya hai......shukriyaa
ab sabko bataaungi

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत बढ़िया उपाय बताये आपने सरल और उपयोगी धन्यवाद

Alag sa said...

पहले कहां इतनी दवाएं वगैरह काम में लेते थे लोग। घर की दादी-नानी माएं ही छोटी-मोटी व्याधियां दूर करने में सक्षम थीं। बच्चे भी ज्यादातर प्रकृति के करीब रह कर ही बड़े होते और स्वस्थ रहते थे।

Alag sa said...

खांसी में एक चम्मच अदरक का रस और शहद भी बहुत मुफ़ीद रहता है। वैसे आयुर्वेद में शहद को गर्म करने की मनाही है।

mehek said...

bahut kaam ki baat hai e tho.

''ANYONAASTI '' said...

शहद को गरम करना मना है ,क्योंकि इससे उसके प्राकृतिक गुण नष्ट हो सकते हैं , परन्तु किसी पीने योग्य गर्म में शहद मिला सकतें हैं | गर्म से आशय वैसे तो लुक-वार्म होता है परन्तु ऐसी औषधियां सामान्यतः ''पीने योग्य गुनगुने दूध से अधिक पान्तु हम भारतीयों द्वारा पीने वाली चाय से कम गर्म होना चाहिए [ उतनी भी चल सकती है ,परन्तु मेरी दृष्टि में उचित नही होगा ]

राज भाटिय़ा said...

बात आप की ठीक है, लेकिन उतना गर्म नही की उस के प्राकृतिक गुण ही नष्ट हो जाये बस बिलकुल मामुली सा जिस से वो हमारे शरीर के ताप मान के समान हो जाये, लेकिन गर्म दुध या चाय मे भी डाल कर पी सकते है, आप सभी की राय भी बहुत अच्छी लगी,कभी पुदिने की चाय भी पी सकते है, लेकिन पुदिना उचित मात्रा मै ही हो थोक मै नही..:) आप सब का धन्यवाद

डॉ .अनुराग said...

ये उन लोगो के सालो के तजुर्बे है जो ऐसे सर्द मौसम में रहे है.....हाँ इन्हे नुस्खे भी कहते है

G M Rajesh said...

kadhaa hi hai magar videshi

jayaka said...

सर्दी से बचाव करना बहुत ही जरुरी है.... समय पर ही ध्यान दिया जाए तो आगे होने वाली कई तक्लिफों से बचा जा सकता है।... आपने सही मार्गदर्शन कीया है, धन्यवाद।

सुनीता शानू said...

बहुत जरूरी है सर्दी से बच कर रहना...बच्चे अधिक बीमार होते हैं,शुक्रिया घरेलु नुस्खे बताने के लिये...