06/12/08

काम की बाते

हम सब को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिये कि परिवार, समाज ओर यह सारी दुनिया हम सब के आपसी सहयोग ओर भाईचारे की भावना से ही चल रही है, मुस्बित, दुख ओर बुरा समय किसी पर भी आ सकता है, चाहे वो कितना भी लायक हो, अमीर हो, राजा हो. ऎसे समय मे हम सब को सहायता की जरुरत होती है,होसल्ले की जरुरत होती है, सहायता ओर होसल्ला मिल जाने से, मन को तस्स्ली होती है, ओर दुख, कष्ट ओर मुस्बित थोडी कम लगती है, इस कारण हमे बिना भेदभाव के बिना जातपात के ,बिना धर्म का भेदभाव के सब के काम आना चाहिये, आज किसी ओर पर दुख है..... कल हम पर भी आ सकता है.
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आओ ज्ञानी बने, आओ सुखी बने
क्योकि ज्ञानी मनुष्य का मन बिलकुल साफ़ होता है, जिस मे अहंकार का अंधेरा नही होता, यानि वह निर्हंकारी होता है,ओर यह एक बहुत ही बडा गुण है,ज्ञानी मनुष्य बहुत मेहनत करता है,
कई अच्छे काम करता है, लोगो की मदद करता है, लेकिन उस मै कभी अहंकार नही आता, कि यह काम मेने किया है, या फ़िर मेरे बिना यह काम कभी पुरा नही होता, या फ़िर अगर मै उस की मदद ना करता तो वो आज तक कुछ ना होता, ओर यह **मै** अहंकार है, इस अहंकार को खत्म कर दो आप सुखी हो जाओगे.

15 comments:

Dr.Bhawna said...

बहुत अच्छी और सच्ची बात कही है आपने...

शोभा said...

बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने। आभार।

Gyan Dutt Pandey said...

सच है जी, जितना कड़वा भय है उतना ही अहंकार है।

ताऊ रामपुरिया said...

बात आपने बहुत अच्छी बताई ! अहंकारी मनुष्य तो ये जानता भी है की वो अहंकारी है सो उसको कुछ गड़बड़ हो जाए तो बात संभाल लेता है ! यानी प्रायश्चित भी करले पर जो ज्ञानी महात्मा या मनुष्य हैं उनका अंहकार बहुत सूक्ष्म होता है और सारे अनर्थो की जड़ वही होते हैं !

हम तो आपकी शिक्षा पर चलते हैं सो आराम में हैं ! अपना कामधंधा करो और अपनी भैसों का दूध पियो , मस्त रहो ! नारायण अच्छी करेंगे !

रामराम !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अहंकारी को खुद का अंहकार नजर नहीं आता।

mehek said...

bahut achhi jankari sahi ahankar mann ka sabse bada dushman hota hai.

seema gupta said...

बहुत अच्छी और सच्ची बात बताई आपने

Regards

सुशील कुमार छौक्कर said...

कह तो बिल्कुल सही रहे है आप।

डॉ .अनुराग said...

बहुत अच्छी और सच्ची बात !

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

हमे बिना भेदभाव के बिना जातपात के ,बिना धर्म का भेदभाव के सब के काम आना चाहिये


बहुत अच्छी
सच्ची बात...

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

मैं एक शब्द जो समूल नष्ट के लिए पर्याप्त है . हम रावण ,कंस का अंत इस मैं के कारण देख चुके है लेकिन अनजान बने रहना भी तो अपना मैं ही है .

रश्मि प्रभा said...

इतनी सरलता से इतनी बड़ी बात अनुभव कि ही बात है,
सच कहा-अंहकार तज के सहयोग का रास्ता उत्तम है.......

विष्णु बैरागी said...

बापकी बात अच्‍छी भी है और सच्‍ची भी । किन्‍तु मेरे सिवाय बाकी सब अहम् पाले रहते हैं । कई लोगों को इस बात का अहम् होता है कि उन्‍हें कोई अहम् नहीं ।

विनय said...

you got 5/5, this time you did very well! ham fan ho gaye!

परमजीत बाली said...

बहुत अच्छी और सच्ची बात कही है