03/11/08

चिंतन जगत जननी मां

आज का विचार मां पर, जो हम सब के जीवन को जेसा चाहे बनाये, क्योकि बाप तो सुबह का निकला शाम को ही घर आता है, मां बच्चे के साथ रहने के अलावा दिल ओर आत्मा से भी जुडी है, यही मां बच्चे को डाकू बना सकती है, एक निर्दयी बना सकती है ओर यही मां एक बच्चे को देश का राजा बना सकती है, तो चलिये आज के विचारो का मंथन करते है....

एक किसी नगर मै कोई सेठ गरीबो को कपडे बाट रहा था, ओर वहा पर बहुत लोग कपडे लेने के लिये एक दुसरे को पीछे धकेल कर पहले खुद कपडे लेना चाहते थे, सेठ के नोकरो ने कई बार उन्हे लाईन मै लगवाया, ओर कहा की सब को कपडे जरुर मिलेगे,

तभी उस सेठ की नजर एक १०, १२ साल की लडकी पर गई, जो इस भीड से थोडी दुर खडी सर्दी से ठिठुरती हुयी इस सारे तमाशे को देख रही थी, थोडी देर बाद सेठ ने देखा कि वह लडकी वही खडी है, ओर जब सब को कपडे दे दिये तो सब लोग धन्यवाद कर के अपने अपने घर की ओर जाने लगे , तो सेठ से उस बच्ची को प्यार से अपने पास बुलाया, ओर पुछा बेटे तुम्हे सर्दी लग रही है यह लो कम्बल, तुम इतनी देर से खडी हो पहले क्यो नही आई।

उस १०, १२ साल की बच्ची ने सर्दी से ठिठुरते हुये भी कम्बल लेने से मना कर दिया, तो सेठ ने पुछा बेटा तुम्हे मेरा यह कम्बल पंसद नही आया तो दुसरा लेलो, तो लडकी ने कहा नही सेठ जी ऎसी बात नही लेकिन मेरी मां ने मुझे भीख लेना ओर हाथ फ़ेलाना नही सिखाया, मां कहती है जो चीज हम मेहनत करके कमाये उसी पर हमारा हक है, मै ऎसे ही ठीक हु।

इतनी छोटी सी लडकी के मुहं से यह बात सुन कर सेठ बहुत हेरान हुया, ओर बोला बेटा मै तुम्हारी मां से मिलना चाहता हूं, तो वह बच्ची उस सेठ को अपने झोपडे पर ले गई, सेठ ने देखा झोपडे के सामने एक गरीब ओरत अपने घर के काम कर रही है, लेकिन उस के चेहरे पर एक अलग सी चमक है, तो सेठ ने सारी बात उस महिला से कही, तो वह महिला वोली सेठ जी आप ने बिलकुल सही सुना मेने अपनी बच्ची को यही शिक्षा, यही संस्कार दिये है, क्योकि मेरा मनाना है आदमी को अपने चरित्र ओर संस्कार का धनी होना चाहिये, बाकी यह संसारिक माया तो आनी जानी है, लेकिन संस्कार ओर चरित्र बचपन मै ही जेसे वो दिये बच्चे मै, वही पनपते है, फ़िर उन्हे नही बदला जा सकता।

सेठ ने कहा बहिन आप सच मै महान है, इतने दुखो मे भी तुम ने अपने संस्कार बच्ची मै डाले धन्य है आप, आप जेसी मां ही देश को बडे बडे महात्मा, ओर बडे बडे महान लोग देती है बहिन तुम्हे मेरा प्राणाम।
हम भी बना सकते है अपने बच्चो को इस तरह से चरित्रवान ओर संस्कारी, लेकिन पहले हमे बनाना पडेगा ????

16 comments:

Gyan Dutt Pandey said...

सबसिडी और सरकार की तरफ मुंह फाड़े देखने वालों के लिये अच्छी बोध कथा।
पर कोई सुनता है?

Anil Pusadkar said...

शार्ट कट से तरक्की की चाह सब करवाता है,बाकी गुरू जी की बातों से सौ प्रतिशत सहमत हूं ।

योगेन्द्र मौदगिल said...

Beshak..beshak
Gyan g v Anil g se poori sahmati
aapko sadhuwad

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत शिक्षादायक कथा सुनाई ! सबको सबक लेना चाहिए !

seema gupta said...

लेकिन मेरी मां ने मुझे भीख लेना ओर हाथ फ़ेलाना नही सिखाया, मां कहती है जो चीज हम मेहनत करके कमाये उसी पर हमारा हक है, मै ऎसे ही ठीक हु।
हम भी बना सकते है अपने बच्चो को इस तरह से चरित्रवान ओर संस्कारी, लेकिन पहले हमे बनाना पडेगा ????

" a story expressing deep moral secret of the life...."

Regards

डॉ .अनुराग said...

कुछ लोगो के लिए जीवन एक जिजीविषा सा है

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर और ज्ञानदायक कहानी !

दीपक कुमार भानरे said...

आदमी को अपने चरित्र ओर संस्कार का धनी होना चाहिये, बाकी यह संसारिक माया तो आनी जानी है,
महोदय बहुत ही शिक्षाप्रद और प्रेरणास्प्रद आलेख है . धन्यवाद .

समीर यादव said...

जीवन की अपनी परिभाषाएं हैं ....जो सबके लिए अपनी जगह पर सही हैं. अच्छी प्रेरक कथा.

रंजना said...

हम भी बना सकते है अपने बच्चो को इस तरह से चरित्रवान ओर संस्कारी, लेकिन पहले हमे बनाना पडेगा ????............................

सौ बात की एक बात कही आपने.

Rohit Tripathi said...

kabhi nahi bana payege.. kyonki hum khud hi kabhi aisa nahi ban payege aur woh bhi aaj ke daur mein an mumkin

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खो देना चहती हूँ तुम्हें..

अभिषेक ओझा said...

अति सुंदर ! बहुत बढ़िया रहा ये तो माँ के साथ-साथ अच्छी प्रेरणा भी.

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

बच्चो को संस्कारवान बनाने के लिए पहले स्वयम को संस्कारवान बनना पड़ेगा. बच्चो को चरित्रवान बनाने के लिए माँ की अहम् भूमिका होती है . हे माँ तुम्हे प्रणाम . बहुत सुंदर पोस्ट के लिए आभार .

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya.

Suresh Chandra Gupta said...

@हम भी बना सकते है अपने बच्चो को इस तरह से चरित्रवान ओर संस्कारी, लेकिन पहले हमे बनाना पडेगा ????

......... ख़ुद को चरित्रवान ओर संस्कारी.

सतीश सक्सेना said...

bahut achha raaj Bhai !