30/10/08

एक सवाल आप सब से

यह मेरा सवाल आप सब से है( हिन्दु, मुस्लिम, सिख ओर ईसाई वा अन्य धर्म वालो से भी,) ओर आप किसी भी देश के नागरिक हो, लेकिन सवाल का जवाव जरुर देवें...
आप को अपना धर्म ज्यादा प्यारा है??? या अपना देश ????

28 comments:

sunil manthan sharma said...

अपना देश

समीर यादव said...

हमें तो राज जी पसंद हैं....क्योंकि वह भी अपने देश को बहुत चाहते हैं.

Mrs. Asha Joglekar said...

ये भी कोई पूछने की बात है, देश सबसे पहले है ।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

हमेँ दोनोँ से प्रेम है :)
- लावण्या

Gyan Dutt Pandey said...

मेरे धर्म और देश में कोई विरोध नहीं, विरोधाभास नहीं।
आपने यह प्रश्न नेक नीयत से उठाया होगा। पर यह सवाल कई सियासी खुराफात करने वाले भी उठाते रहे हैं - एक या दूसरे को वरीयता देने वालों को लड़ाने के लिये।

संगीता पुरी said...

देश सुरक्षित होगा , तभी तो धर्म सुरक्षित है।

Ratan Singh Shekhawat said...

मुझे अपने धर्म पर गर्व है लेकिन जब बात देश की आती है तो मेरे लिए मेरा देश सबसे महत्वपूर्ण है | जाति,धर्म,परिवार सब बाद में |

रंजन said...

देश प्यारा है

Udan Tashtari said...

अपना देश ही भाई...तड़प कर रह जाते हैं.

Udan Tashtari said...

बताना जरुर कि क्या निष्कर्ष निकाला जबाबों से या रियलिटी शो के एस एम एस टाईप बात है?

ताऊ रामपुरिया said...

भाटिया जी मेरा धर्म इंसानियत है और मेरे हिसाब से ये पुरी धरती ही इंसानों की है ! नक्शे से लकीरे मिटा दीजिये कहीं पर कोई देश नही दिखेगा ! और अलग २ धर्मो के लोगो को चार दिन एक कमरे में बंद कर दीजिये और उनका राशन पानी बंद कर दीजिये ! फ़िर बाहर निकाल कर उनसे पूछिये धर्म क्या है ? एक ही जवाब आयेगा - रोटी ! अब मेरा जवाब आप जैसे भी समझे .. वोट कर दीजिये ! शुभकामनाएं !

seema gupta said...

" ofcourse desh pehle aata hai jhan hum janam laiten hain jhan kee mittee mey pltey bdhty hain.... or jub desh se pyar hotta hai to uskee hr cheez se pyar hona bhe lajmee hai.."

Regards

युग-विमर्श said...

इस प्रश्न का सम्बन्ध एहसास से है और एहसास की कोई भाषा नहीं होती. ज़बान से लोग बहुत कुछ कहते रहते हैं, उसका क्या भरोसा. मैं मुसलमान हूँ. दूसरों के बारे में नहीं जनता. मेरे संस्कारों ने मुझे नबीश्री की इस हदीस को मेरी घुट्टी में डाल दिया है."हुब्बुल वतनि मिनल ईमान" अर्थात देश-प्रेम ईमान का आधार है. यहाँ ईमान शब्द प्रयोग हुआ है, धर्म या मज़हब नहीं. ईमान का सम्बन्ध चित्त से है. ईमान के स्तर पर धर्म का भेद मिट जाता है. ईमान एक परिष्कृत चित्त के बिना हो ही नहीं सकता. तमाम बुराईयों से रहित. वर्चस्व की भावना से मुक्त. जहाँ ईमान होगा वहाँ मातृभूमि के प्रति प्रेम निश्चित रूप से होगा. जो बे-ईमान हैं वे किसी के नहीं हो सकते.

श्रीकांत पाराशर said...

Donon se pyar hai, magar vah dharm hi kya jismen desh ko sthan dusare number par ho. Agar desh nahin bachega to dharm ki raksha kahan se hogi. Apne apne dharm par garv hona hio chahiye parantu desh ko sarvochh sthan milna chahiye.

डॉ .अनुराग said...

देश ..देश ..ओर देश.........
कभी सोचा है आदम ओर हव्वा किस धर्म के थे ?धर्म तो इंसान ने बनाया है ..धर्म का अर्थ है इंसानियत ..त्याग ,भाईचारा ...मेरे लिए वो आदमी ज्यादा अच्छा है जोकभी मन्दिर नही जाता मस्जिद नही जाता ....पर भूखे बच्चे को रोटी देता है ,अपने माँ बाप को बुढापे में छोड़ता नही है ,दोस्तों की मदद के लिए हमेशा खड़ा रहता है ,पशुओ पर अत्याचार नही करता है ...ओर अपने देश के लिए अपनी जान दे देता है..

अभिषेक ओझा said...

देश !

pintu said...

apana desh,

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

मेरा प्यारा वतन जिसपे मेरा दिल कुर्बान ......

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

मुझे तो धर्म से ही पता चला की देश माँ है ,और माँ महान होती है . स्वयम भगवन राम ने कहा था
अपि स्वर्ण मयि लंका न मय लक्ष्मण रोचते ,जननी जनम भूमि स्वर्ग्य द्पी gryasi

सचिन मिश्रा said...

jab desh mahfuj rahega, tabhi to dharam...

Dr. Chandra Kumar Jain said...

राष्ट्र धर्म
==================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

ज़ाकिर हुसैन said...

भई राज भाई! अगर ताऊ जी के शब्दों का कॉपी राइट न हो तो हमारा भी जवाब यही होगा कि हम तो देश-धर्म से ज्यादा इंसानियत के पुजारी हैं. इसके बाद देश और फिर धर्म.

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाकई भाटिया जी
ताऊ ने हम सभी का जवाब दे डाला
शेष शुभ

सतीश पंचम said...

चित्रलेखा फिल्म का एक गीत सुना होगा आपने - ....उसमे कहा गया है कि - हर युग मे बदलते धर्मों को कैसे आदर्श बनाओगे....बस इसी मे सारा उत्तर छिपा है। देश पहले....धर्म बाद मे आता है।

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

देश के लिए प्यार ही मेरा धर्म है

डा. अमर कुमार said...

अगर मैं हिंदू कायस्थ कुल में पैदा न होकर मुस्लिम मोची का बेटा होता तो ?
मज़हब बदल जाता, देश और माँ तो शाश्वत रूप से मेरे साथ ही चलेंगे !
जननी जन्मभूमि का कोई विकल्प हो सकता है, भला ?
मैं इसका उत्तर देकर स्वयं को निरुत्तर करना नहीं चाहता, अतः टिप्पणी बक्से से बहिर्गमन करता हूँ !

राज भाटिय़ा said...

यह सवाल मेने नही, मेरे छोटे बेटे ने मुझ से पुछा था, क्योकि मै भारत के कई समाचार घर पर सब को बताता हू, तो एक दिन मेरे से यह सवाव किया? जिस का जवाव मेरे पास नही था, अगले दिनो मे, मै इस सवाल को इस के पुरे रुप मे फ़िर से आप सब के सामने रखूगां जिस मे सवाल ओर जबाब दोनो ही है.
यह सवाल किसी विषेश धर्म या राजनीति से प्रभावित नही है, यह सवाल हम सब से है,ओर हर देश के हर नागरिक से, चाहे वो भारत हो या अमेरिका, पाकिस्तान हो या रुस.
आप सब का धन्यवाद जवाव देने के लिये,ओर आप सब के जवाव से दिल खुश हुआ. क्योकि जब तक मुझे इस सवाल का जवाव नही मिलता तो इसी सवाल का अगला सवाल केसे करता,
फ़िर से आप सब का धन्यवाद

Suresh Chandra Gupta said...

मेरा जवाब देर से आया. मैं देश को सबसे ऊपर मानता हूँ. धर्म एक व्यक्तिगत भावना है लेकिन मेरा व्यवहार धर्म की शिक्षा से प्रेरित है. मेरा धर्म मुझे देश से प्रेम करना सिखाता है. देशवासियों से प्रेम करना सिखाता है.