29/10/08

दादी मां

आप सब के साथ शायद ऎसा ना होता हो, लेकिन हमारी जगत दादी माँ के साथ हमेशा कुछ ना कुछ होता है, आज फ़िर से ऎसा ही कुछ हुआ, लेकिन पढने से पहले इस कहानी से कुछ शिक्षा भी मिलती है, उस पर जरुर धयान देवें , ओर दादी मां की नयी कहानी पढने के लिये यहां मोहर लगाये अब ख़ुलेगा

3 comments:

Udan Tashtari said...

लिंक नहीं खुल रहा.

कुन्नू सिंह said...

एक बार फीर दिपावली की बहुत सारी शूभकामनाऎं

दादी मां की याद आ रही है....

दीपक "तिवारी साहब" said...

बहुत बढिया कहानी ! धन्यवाद !