04/08/08

घोसला २

घोसला
क्रम्श से आगे..
बच्चे का धक्का लगने से मेरे हाथ मे पकडा डण्डा थोडा हिला ओर सन्तलुन बिगडने के कारण जाली बिल्ली के मुंह पर लगी, ओर वो शायद डर गई, ओर डर के उस जगह से उछली, जब उछली तो छत से टकराई, ओर फ़िर सीधी १० मीटर के करीब नीचे जमीन पर गिरी, ओर गिरते ही एक बार उछली ओर फ़िर जमीन पर सीधी लेट गई, सभी नीचे भागे देख कही मर तो नही गई, लेकिन अभी उस की सांस चल रही थी, ओर आस पास कही खुन भी नही था,कोई झट से बिल्ली बाले को भी बुला लाया,वह गोरा हमारा पडोसी था,जिस से अच्छी राम राम थी, अभी उसे सारी बात बता ही रहे थे कि बिल्ली मियाउ मियाउ करके भाग गई, ओर सभी हंसने लगे, बात खत्म ,अब दे्खा तो चिडिया ओर चिडा भी मजे से बेठे हमे देख रहे थे,जेसे हमे धन्यवाद कर रहे हो,ओर कुछ ही दिनो मे चिडियां के बच्चे अपनी चोचं अपने घोसला से बाहर निकाल कर देखते थे,सारा दिन चीची लगी रहती हे, हम सोच रहे थे की हर साल की तरह से चिडिया इन्हे फ़िर से उडना सिखाये गी, ओर फ़िर यह पक्षी थोडे समय बाद उडना सीख जाते हे, ओर मां बाप के साथ रहते हे या नही पता नही फ़िर पतझड मे कही गरम देश मे चले जायेगे...
यह दोनो फ़ोटो हमारे घर के पाचवे सद्स्य हेरी की हे, बिलकुल बच्चो सा,बहुत ही छोटा सा था, जब इसे ले कर आये थे,शायद एक हाथ मे ही आ जाता था... ओर अब आप खुद ही देख लो,

एक दिन मुझे अदलत का एक पत्र मिला, मे उसे पा कर हेरान सा हुआ, खोलने पर पता चला की मेरे पडोसी ने जीव हत्या करने की कोशिश करने पर मेरे उपर मुकदमा ठोंक दिया हे, दुसरे दिन मे अदालत मे गया, वहा से कुछ पता नही चला तो एक वकील से सलाह लेने गया, तो उस बकील ने सारी बात सुनी, ओर राय दी की तुम्हे किसी भी वकील की जरुरत नही, बस एक पत्र लिख कर या टाईप करके ओर सारी कहानी उस मे लिख कर अदालत को भेज दो, कुछ ही दिनो मे फ़ेसला आ जाये गा,वकील को मेने धन्यावाद किया घर आ कर बेटे ने एक पत्र पुरी बात समेत अदालत के नाम लिख कर भेज दिया, साथ मे यह भी लिख दिया की आप का फ़ेसला मुझे मंजुर होगा जो फ़ेसला भी आप करे गे, लेकिन मेने बिल्ली को जान बुझ कर नही गिराया. मे तो दुसरे चार जीवो को बचाने की कोशिश कर रहा था,ओर बिल्ली को भी नुकसान नही पहुचाना चाहता था,
तीन सप्ताह बाद फ़ेसला मेरे हक मे आया, ओर इस दोराना चिडिया के बच्चे भी काफ़ी बडे हो गये थे, एक दिन देखा कि चिडिया के बच्चे बाहर आंगन मे उड रहे हे, ओर साथ साथ चिडिया ओर चिडा भी शायद उन्हे सीखा रहे थे,ओर हमे डर था कही हेरी उन्हे नुकसान ना पहुचाये, लेकिन हेरी भी उन्हे देख कर, ओर सुंघ कर वापिस आ जाता था, फ़िर कुछ दिन बाद यह सब पता नही कहां उड कर चले गये,अगली बार फ़िर से आये गे, लेकिन अब मेने वहां जाने वाले रास्ते पर थोडी कीले लगा दी हे.
लेकिन इन सब बाते से मेने देखा हमारी तरह से पक्षी भी तडपते हे अपने बच्चो के लिये,ओर वो भी भावन्ये रखते हे,

20 comments:

P. C. Rampuria said...

धन्यवाद ईश्वर का ! बड़ा ही सुखान्त रहा !
रात भर (सच में) में दो बार आपकी कहानी
के अंत की याद आई !
शायद पक्षियों के बच्चे बड़े होने पर माँ-बाप
के साथ नही रहते होंगे ! यह तो हम लोगों
की ही अच्छी या बुरी (जो भी हो) आदत है !

आपके हेरी को हमने चुरा लिया है ! है ही
चुराने लायक ! मग्गा बाबा के गुरु स्थान
पर बैठा रहे हैं ! आपको ऐतराज हो तो
बता देना ! वैसे आपके ऐतराज के बाद
भी हम वापस नही करेंगे ! हरयाणवी
ने कर लिया सो कर लिया !
आपको वापस चाहिए तो मुकदमा
कर देना ! ये आपकी अदालत नही है
की घर बैठे बिना खरचा किए आपके
पक्ष में फैसला आ जायेगा ! हमने
चोरी भारत में बैठ कर की है ! तो
मुकदमा भी भारत में ही चलेगा !
यहाँ क्या होगा ? आप जानते ही
होंगे !

इब ज्यादा ना बोलूंगा नही तो यहाँ
लोग मारेंगे मन्ने !

कहानी के सुखांत के लिए और हेरी
की चोरी करवाने के लिए बड़े भाई
को धन्यवाद !

कामोद Kaamod said...

chalo billi bach gayi..
paap se bach agye raj ji :)

PD said...

bahut badhiya sir..
bach kahun to bas maja aa gaya.. :)

अनुराग said...

अच्छा लगा इस का अंत पढ़कर ,आपका हैरी है ,हमारा रुस्तम है......हमारा काला है ......

fundebaj said...

सर , आपने कहानी का सुखान्त करके बहुत
अच्छा किया ! धन्यवाद !

आपका हेरी हमको बहुत पसंद आया और
इनको हम आपकी इजाजत से अपने गुरु
स्थान पर विराजमान करना चाहते थे !
और हम निहायत ही शरीफ आदमी हूँ !
पर जब मैं आपका लेख पढ़ कर कमेन्ट
बॉक्स में आपकी इजाजत लेने आया तो
वहाँ ताऊ का विचार और हेरी को चुराने
का कार्यक्रम पढा तो सोचा जब खुले आम
डकैती हो रही है तो ताऊ करे या हम ! सो
हमने ये डकैती कर ली है ! अब ताऊ भी
देखता रह गया ! और आप को जो करना
हो सो कर लेना !
और इस अपराध के लिए आप और ताऊ
ही जिम्मेदार हो !
क्योंकि आपने हमारे ब्लॉग पे आके हेरी
की तारीफ़ की उससे हमारा मन ललचाया !
वरना हमने तो एक गली के गुरु महाराज
की फोटो लगाकर अपनी दूकान दारी
चला रहे थे !
और ताऊ के विचार पढ़ कर हम को चोरी
करने का विचार आया ! और अगर आपने
मुकदमा किया तो ये ही हम कोर्ट में लिख
कर देने वाले हैं ! सो कोई भी कदम आप
सोच समझ कर उठाना !






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Anil Pusadkar said...

achhi wyawastha hai warna yanhaa to mukadmebaazi me umra nikal jaati hai.badhai sab bhalaa to ant bhala

मीत said...

hosla badhane ke liye shukriya sir...
apki rachnayein bhi bahut achi hain..
jari rahe

Gyandutt Pandey said...

चलो जी, चिड़िया और बच्चे बच गये!

G M Rajesh said...

apki kahaani meri jubaani
thode masaale ke sath padhen aur comment kare taki use hataa du ya rakh sakun

G M Rajesh said...

अबाबील के उस घोंसले के नजदीक खतरा बनी बिल्ली को हैरी ने भोंक कर जैसे ही ललकारा उस वक्त हम घर को ताला लगाकर बस कार में बैठने ही वाले थे। जमीन पर जहाँ मैं खडा था से १६ फुट की ऊंचाई पर बने इस घोंसले तक पहुँचने के लिए, जो मेरी खिड़की से महज ३ फुट दूर है, कोई साधन नहीं था। अचानक घटे इस घटनाक्रम में मेरी चिंता घोंसलों में पल रहे चूजों के जीवन रक्षण की हो गई। फिसलन भरी उस चढाई पर बिल्ली सावधानी से आगे बढ़ रही थी और महज कुछ ही सेकंड के फासले पर जीवन और मृत्यु को मैं महसूस कर गया था। अचानक ही मकडी जाला साफ़ करने वाली झाडू मेरे हाथ लग गई। मैं इसे खोलते हुए बिल्ली की और लपका। बिल्ली का ध्यान अब मेरी और था। बिल्ली अपने शिकार से महज २ सेकंड की दूरी पर थी। खतरा भांप कर उसने खिड़की की मुंडेर पर जम्प लगा दी पर वो नीचे जमीं पर आ गिरी । इसी बीच चिडा चिड़ी दाना लेकर आ गए और मुझे हमलावर समझ आक्रमण कर बैठे । हम बहुत हँसे नन्ही चिडिया की नादानी पर। हैरी को मैंने डांटा और हौले से चपत लगाकर कहा "देख ये नादान मुझे अपने बच्चों का दुश्मन मान बैठी है।"
जिन्हें मैंने बचाया था उस घोंसले से जिसके बनते वक्त हो रही गंदगी के कारण घर भर के हम सभी बनने ही नहीं देना चाहते थे।
ये दृश्य मेरे गोरे पड़ोसी ने देख मुकदमा दायर किया तो मैं असमंजस में था। खैर कोर्ट ने पूरी कहानी सुनकर और जानवरों की खैरियत जान मुझे बख्श दिया है।
पर घर बाहर निकलते वक्त मुझे ध्यान रहता है चूजों का और उनके माँ पिता के हमलों का .............

Hari Joshi said...

बच्चा किसी भी जीव का हो, होता तो मासूम ही है। ममता तो हर जीव में होती है।

राज भाटिय़ा said...

राजेश जी,लगता हे आप कहानी कार हे,मेने तो सीधी साधी भाषा मे दिल की बात लिख दी.यही अन्तर हे आम आदमी ओर एक लेखक मे, धन्यवाद आप ने बहुत सुन्दर शव्द दिये हे, मेरी इस कहानी को

Udan Tashtari said...

अच्छी लगी कथा-आपका मुकदमें बच जाना और हैरी मास्टर की तस्वीरें..निश्चित ही पशु-पक्षी भी हमारी तरह ही भावनायें रखते हैं.

रश्मि प्रभा said...

waakai bhatia sahab ,kahani kafi rochak lagi,
badhaai ho

सचिन मिश्रा said...

bahut accha likha hai

Mired Mirage said...

बहुत अच्छा हुआ जो सुखद अन्त हुआ। हैरी बहुत प्यारा है। क्या लैब्रेडौर है?
घुघूती बासूती

राज भाटिय़ा said...

घुघूती बासूती जी हमारा हेरी,३, नस्लो के मिलाप से हे,Labrador Retriever, Rottweiler or Garman Shepherd से मिल कर बना हे,धन्यवाद आप को हेरी पस्न्द आया,

योगेन्द्र मौदगिल said...

बंधुवर
प्रसाद बांटिये कि बिल्ली बच गई
भारत में बिल्ली मरती तो स्वर्णबिल्ली दान करनी पड़ती
वहां तो गोरा और उनका कानून है ही
खैर आपकी साफ़गोई काबिले तारीफ है
आपने हैरीदर्शन कराये
हम आपको सैमदर्शन कराएंगे
प्रतीक्षा करें

Smart Indian said...

"बड़े मियाँ तो.. " बिल्ली तो बिल्ली, उसका मालिक तो और भी जालिम निकला. अरे पड़ोस का तो कुछ लिहाज़ करना चाहिए? खैर चिडियां सकुशल हैं और पड़ोसी बिल्ली और उसके मालिक की चालें भी नाकाम हुईं यह जानकर खुशी हुई.

अभी तक तो आप ही छाये हुए थे, अब देख रहा हूँ की हैरी जी ने शो स्टील कर लिया है - बधाई हैरी!

राज भाटिय़ा said...

हमारे यहां लोग ऎसी बातो पर मुकदमा दायर कर देते हे, लेकिन झुट पकडा जाता हे,ओर फ़ेसला भी ज्यादा से ज्यादा ६ सप्ताह मे हो जाता हे,अगर आप ने किसी को गाली दे दी, किसी को थापड मार दिया,या आप की गलती से किसी का नुकसान हो गया ओर आप अन देखा कर के चल दिये, ऎसी बहुत सी बाते हे....
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद