17/07/08

चिंतन मां

आज का विचार,यानि शब्दो का मन्थन, आये कुछ विचार करे, मां जिस शब्द को बोलते ही दिल मे ठण्डक पडती हे, वो मां जो एक बच्चे को संस्कार दे कर, पाल पोस कर, दुनिया की ऊंच नीच बता कर, खुद को दुख दे कर अपने बच्चे कॊ सुखी देखना चाहती हे,यह सब एक अच्छी मां ही कर सकती हे, मां जो पहले एक बीबी उस से पहले एक बहिन या बेटी होती हे, एक अच्छी बेटी, एक अच्छी बहिन, ओर एक अच्छी बीबी ही एक अच्छी मां बन सकती हे, जो बिना स्वार्थ के त्याग करना जानती हो, अपने शोको का, अपनी इच्छा का, अपनी भावनओ का, ओर ऎसी मां ही पूत को सपूत बनाती हे, एक अच्छे नागरिक का, एक अच्छे समाज का, एक अच्छॆ दॆश का निर्माण करती हे, तो पढिये आज का विचार..
एक १०, १२ साल का लडका किसी बात से मां से नाराज था, दुसरे दिन सुबह स्कुल जाने से पहले बच्चे ने एक पत्र मां के नाम लिखा ओर मां के काम करने वाली जगह जहां मां का धयान चला जाये रख कर स्कूल चला गया,अब मां किचन के काम निपटा कर बेठने लगी तो उस की नजर उस चिठ्ठी पर गई, उसे ऊठा के पढा, ओर मुस्कुराई, उस पत्र मे बच्चे ने लिखा था...
१०, ०० रुपये छोटी बहन को खिलाने के.
१०,०० शाम को बाजार से समान लाने के.
५,०० रुपये मां को किचन मे हाथ बटाने के
१०,०० रुपये आटा पीसवाने के.
१५,०० रुपये छोटे भाई को पढाने के.
सारे हुये ५०,०० रुपये, मेरी टेबल पर शाम कॊ मिलने चाहिये.
अब मां ने उस पत्र के साथ ५०,०० रुपये ओर एक पत्र अपनी ओर से रख दिया.
बच्चा जब स्कुल से आया तो सीधा अपने कमरे मे गया ओर ५०,०० रुपये देख कर बहुत खुश हुआ, जब वह पेसे उठाने लगा तो उस की नजर मां के लिखे पत्र पर गई...
बच्चा उसे उठा कर पढने लगा...
नो महीने तुम्हे पेट मे रखा= ० रुपये
तुम्हे जन्म दिया = ० ,,
दिन रात तुम्हारी बिमारी मे जागी =० रुपये
तुम्हारे गीले बिस्तर पर खुद सोई तुम्हे सूखे ओर साफ़ बिस्तर पर सुलाया = ० रुपये
तुम्हे लोरी सुना कर देर से सोना = ० रुपये
स्कुल मे दाखिल करवाया = ० रुपये
अच्छे अच्छे कपडे बनबा कर दिये =० रुपये
ओर भी बहुत सी बाते वगेरा वगेरा... यह सब पढ कर बच्चे की आंखॊ मे आंसु आ गये ओर उस ने पेसे मां के कदमो मे रख दिये ओर बोला मां तुम सच मे महान हो मुझे माफ़ कर दो, ओर मां ने उसे गले से लगा लिया. अब आप इसे चिंतन कहे या कहानी लेकिन सोचे जरुर एक बार मां के बारे,

8 comments:

Udan Tashtari said...

सही चिन्तन है/

meltyourfat said...

Hi Raj,
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Thanks
Sri

Ila's world, in and out said...

मां तो खयालों से,दिलोदिमाग से जाती ही नहीं है.आपने चिर शाश्वत चिन्तन हम तक पहुंचाया,इसके लिये धन्यवाद.

अनुराग said...

sahi chintan hai ....vakai....

Gyandutt Pandey said...

मां का शून्य बड़ी से बड़ी संख्या से बड़ा है।

अभिषेक ओझा said...

बहुत बढ़िया चिंतन है... ये शून्य नहीं अनंत है !

P. C. Rampuria said...

मां तो एक इश्वर का दिया हवा तोहफा है इंसानियत या कहूँ की प्राणी मात्र को ! और माँ के गुजर जाने के बाद जो शुन्य पैदा हुवा है वो कभी नही भरेगा ! और सही मायनों में माँ हमारे लिए क्या थी ? इसका बोध उसके जाने के बाद रह रह कर
आता है ! आपने आज आखें फ़िर भिगवा दी !

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद