18/07/08

ताऊ की चौपाल

एक बाबा आटा मांगण चल्या गया - बाबा नै एक घर मैं जा-कै रूका मारा । बाबा नैं देख्या सारा घर खिंढ्या पड़्या था - कितै बर्तन पड़े, कितै चप्पल-जूते, कितै कपड़े पड़े थे । फेर एक बेसूहरी सी लुगाई बाहर आई ।लुगाई - बाबा, न्यूं आटा मांगता हांडै सै ईब, घर क्यूं ना बसाया ?बाबा - "बेबे, सुथरा घर कदे बस्सया कोनी, और तेरे बरगा वसावण का जी कोनी करया ।"
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एक बार ताऊ के घर में चार चोर बड गए.सबेरे सबेरे ताऊ थाने में पहुच गया रपोर्ट लिखाण खातर.दरोगा न उस ते पूछी ," ताऊ के बखत था ?"ताऊ बोल्या ," थानेदार साहब बखत तो माडा ऐ था ता ऐ तो ये रासे हो गए ."दरोगा बोल्या ," ताऊ यो बता के बाज्या के था?"ताऊ बोल्या," के बताऊ थानेदार साहब एक लट्ठ मेरे सिर पे बाज्या और एक तेरी ताई के सिर पे लगया "दरोगा न अपने गुस्से प कंट्रोल कर के फिर पुछ्या ," ताऊ न्यू बता अक घड़ी प के बाज्या था ?"ताऊ बोल्या ," घड़ी प तो एक ही टिक्या था व तो एक में ही खिंड गई।"दरोगा न अपना सिर पकड़ लिया बोल्या ," ताऊ तू सिर्फ़ इतना बता दे की टेम के होया था?"इब ताऊ न भी छो आ गया वो बोल्या ," र दरोगा तू यू बता अक चोर कदे टेम बता क जाया करें ?"
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भाई जाट जुगाड़ी आदमी हो से , किते न किते तै सारी बाता का जुगाड़ कर लिया करे ,एक बै एक जाट और एक बामण का छोरा एक एक ऊंट ले के जंगल में घुमण जा रे,जाट के छोरे की नकेल टूट गी , ऊंट उसने तंग करण लाग गया , वो बामण के छोरे तै बोल्या भाई यो शरीर के तागा (जनेऊ ) बांद रहा यो मने दे दे,यो ऊंट मने दुखी कर रहा से , बामण का बोलूया- न भाई यो जनेऊ तै हमारा धरम से में ना दू,वो दुखी सुखी हो के घरा आगे .आते ही जाट का छोरा आपने बाबु तै बोल्या - बाबु आज जंगल में इस बामण के ने मेरी गल्या इसा काम करा . एक तागा माँगा था वो भी न दिया . आगे इन तै वयवहार कोन्या राखना,उसका बाबु बोल्या -- अरे इसका बाबु भी इसा ऐ था . तेरी बेबे के ब्याह आले दिन तेरी बेबे बीमार होगी तै मने बामण ताहि न्यू कही के भाई एक बै तू फेरा के उपर आपनी छोरी नै बिठा दे एक घंटे खातर घाल तै मैं आपनी ने दूंगा, पर भाई यो बामण मान्या नही,छोरा बोल्या -- फेर के हुआ बाबु बाबु बोल्या - अरे होना के था फेर एक घंटे खातर तेरी माँ फेरा पे बठानी पड़ी

5 comments:

अजित वडनेरकर said...

बहुत खूब !

Udan Tashtari said...

बड़ी कठिन हरयाणवी है भई.

P. C. Rampuria said...

* "बेबे, सुथरा घर कदे बस्सया कोनी, और तेरे बरगा वसावण का जी कोनी करया ।"
** र दरोगा तू यू बता अक चोर कदे टेम बता क जाया करें ?"
*** अरे होना के था फेर एक घंटे खातर तेरी माँ फेरा पे बठानी पड़ी !
भाटिया जी आज तो सुबह सुबह थमनै तबियत बाग़ बाग़ कर दी ! यानी आपने भी आज हरयाणवी चआलेह काट दिए ! इब आज ५ स्टार तैं कम रेटिंग होण का कोई सवाल ही नही उठदा ! हमने दबाए - ५ स्टार !

भाटिया साहब उपरोक्त तीनों वाकये लोगों के लिए तो चुटकले हो गए ! पर एक हरयाणवी आदमी के रोज मर्रा की बात है ! हरयाणवी बहुत सीधी और सुथरी बात करया करें सें ! हरयाणवी में ये आम बात है पर जो नही समझते उनको तकलीफ खड़ी हो जाती है ! इब वो सफाई देता है तो बात लम्बी होती है और लोग कहते हैं ताऊ फुटेज मत खा ! और सफाई ना देवे तो तकलीफ ! तो ताऊ लोगों के साथ हमेशा समस्या ही रहती है ! वैसे ये मन में कुछ नही रखते !

आज सुबह की घटना है ! आपके चुटकलों के लिए मैंने आपका ब्लॉग खोला ही था की मेरा मालिश वाला राकेश आगया ! ये भी हरयाणवी है ! ये लड़का होमियोपथी के फाइनल इयर का छात्र है ! इसके पिता जी नही है ! पर ये चार साल से हर
शनिवार मेरे यहाँ आता है और ये मालिश का पार्ट टाइम धंधा करके घर भी चला रहा है और पढ़ भी रहा है !
अब देखिये इसने क्या गुल खिलाये हैं आज अभी मेरे सामने ही !

इसने मालिश शुरू की और १० मिनट बाद ही इसका मोबाइल बजा ! उधर से पूछा गया होगा की क्या कर रहे हो ? कितनी देर में आवोगे ...?
इस भाई का जबाव सुनिए --- अजी खंडेलवाल साहब , इब्बी तो मन्ने रामपुरिया साहब का काम लगा राख्या सै ! एक घंटे बाद आकर थारा भी काम लगा दूंगा !

अब ये जबाव सुनकर खंडेलवाल साहब पर क्या गुजरी होगी ? आप सोचिये !

भाटिया जी यो तो टिपन्नी नही टिपन्ना हो गया ! बल्कि नाम वर लिखाडो की तो पुरी पोस्ट हो गई ! इसीलिए लोग मुझसे खफा होते हैं की ताऊ बहुत फुटेज लेता है !

पुनश्च : मैंने जब टिपन्नी लिखनी शुरू की थी तब तक एक भी कमेन्ट नही था ! इब लिख कर पोस्ट करने गया तो म्हारे गुरुदेव की टिपन्नी "बड़ी कठिन हरयाणवी है भई." मोजूद है !
कठिन को सरल बनाने के लिए ही फुटेज ज्यादा हो जाते है !ताऊ भी क्या करे ? भाषाई परेशानी दिखाई सै यो तो !

jasvir saurana said...

bhut badhiya.

राज भाटिय़ा said...

आप सभी की मेहरबानी