19/07/08

बेचारी बीबियां

बस के गेट पर लटके मुसाफिरों से कंडक्टर ने कहा: 'भाइयों, अंदर हो जाओ। गेट पर लटकना खतरनाक है।' पर जब कोई भी अंदर न हुआ तो कंडक्टर गुस्से में बोला: 'तुम्हें तुम्हारी बीवियों की कसम, अंदर हो जाओ।' इतना सुनना था कि जो मुसाफिर सीटों पर बैठे थे वे भी आकर गेट पर लटक गए।
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मुकदमा जीतने के बाद वकील ने चोर की पत्नी से कुछ ज्यादा फीस मांगी तो वह झुंझला कर बोली: 'इस चोरी में आपका भी तो हाथ है।' ' मेरा हाथ? यह आप क्या कह रही हैं?' ' जी हां, न पिछले केस में आप उन्हें बरी कराते, न आज यह नौबत आती।'
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एक पंडित जी के घर के सामने गधा मर गया। उन्होंने नगरपालिका को फोन किया तो उधर से जवाब आया कि क्रिया-कर्म करना तो पंडितों का काम है। पंडित जी बोले , हां वो तो है लेकिन उस से पहले रिश्तेदारों को खबर करना जरूरी है।
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6 comments:

rakhshanda said...

मजेदार....
बहुत मजेदार...मज़ा आगया,ज़रा हंसने का भी इंतजाम होना चाहिए...thanks

अनुराग said...

ek aor muskaan.....

P. C. Rampuria said...

१. विवाहित मर्दों की कभी ना पूरी होने वाली इच्छा - ४ स्टार
२. वाकई विचारशील और समझ दार पत्नी - इसे भी ४ स्टार
३. हाजिर जवाब पंडीत , लगता है की हरयाना का होगा , इसे पूरे ५ स्टार !
४+४+५ = १३/३= ४.३३ हमने दबाएँ हैं ४ स्टार !
( भाटिया जी हरयाना वालों को ५ स्टार देने से नाराज तो नही हैं ना ? )

Udan Tashtari said...

यह माडस्साब तो कॉपी जाँच रहे हैं सब तरफ... :)

हा हा!!

advocate rashmi saurana said...

maja aa gya ise padhakar. bhut badhiya.

महेंद्र मिश्रा said...

bahut badhiya majedaar jog vah raj ji shukriya.