03/07/08

भारत यात्रा ६

नमस्कार,
आज हमे बहुत काम थे, ओर मेने भाई से सभी काम बाटं लिये थे, ताकि सही समय पर सारे काम हो जाये, क्योकि मेने अक्सर देखा हे जब भी कोई ऎसे काम होते हे तो कोई ना कॊई कमी रह जाती हे, कभी यह चीज भुल गये तो कभी वह चीज ओर फ़िर उस मोके पर भाग दोड शुरु हो जाती हे, ओर सब का मुड भी खराब हो जाता हे, इस लिये मे अपने स्वभाव के अनुसार कोई कमी नही रहने देना चाहता था, आज भाई के हिस्से मे थोडा कोर्ट का काम था, फ़िर बेकं मे जा कर गवाहो के साईन करवाने थे, ताकि पिता जी की पेंशन ओर जमा पेसे मां के खाते मे जमा हो जाये, मे नही चाहता था की वह पेसे हमे मिले, तो भाई को सब समझा दिया ओर कहा जहां भी कुछ गडबड हो झट से मुझे फ़ोन करलो,फ़िर सभी कागज पत्र भाई को दे दिये,
ओर मे चला हलवाई के लिये सारा समान खरीदने के लिये, बहुत से लोगो ने मुझे पुछा की हम कुछ सेवा करे तो मेने हाथ जोड कर धन्यवाद किया,लेकिन जो हरिद्वार से मेरे मामा जी के लडके हमारे साथ आये थे, मेने उन्हे साथ लिया ओर दोनो अन्जाने चल पडे खरीदारी करने, ओर हम पहुचे सीधे रियंआस मे या कोई ऎसा ही नाम होगा, अभी नया नया खुला था, एक ही जगह से सारी खरीदारी , कहां तो मे सारी रात सोचता रहा, केसे खरीदारी करुगां,ओर अच्छी तरह से सो नही पाया, ओर कहा यह तोहफ़ा.. ओर मेने हलबाई की लिस्ट निकाल ली एक वेगेन खुद ओर एक वेगेन अपने साथ आये मामा जी के लडके को दे दी ओर वही के स्टाफ़ के एक लडके ने ९८% खरीदारी करीब एक घण्टे मे करवा दी दिल बहुत खुश हुआ, बिल वगेरा दिया, अब वहा चारो ओर पलास्टिक के थेले ही थेले थे, अब मेने खरीदारी तो सारी कर ली यह सारा समान घर केसे ले जाउ, मुझे मेरी Audi बहुत याद आई, ओर लोगो को भी आना जाना मुस्किल हो रहा था, भाई को वही छोडा ओर बाहर चारो ओर देखा लेकिन यहा रोहतक मे चार कदम के लिये टेक्सी कहा, तभी मेने एक रिक्शे वाले को रोका उस से पुछा चलो गे सुभाष नगर, तो वह बोला जी मेने डरते डरते भाव भी नही किया ओर समान रखना शुरु किया, फ़िर दुसरे रिक्शे को , इस तरह से तीन रिक्शे किये ओर घर तक समान पहुचा,
घर आ कर भाई की वीवी से कहा की सारा समान अच्छी तरह से चेक कर लो,क्योकि वहा तो चारो ओर थेले ही थेले हो गये थे, कही मे किसी दुसरे का समान ना ले आया हु, या अपना कोई समान वहा ना भुल गया हु,फ़िर हम दोनो फ़िर से बाकी का समान लेने बाजार गये, ओर सारा समान ले आये, इतनी देर मे भाई भी अपना सारा काम निपटा कर घर आ गया,आज मुझे भारत मे आये ९ दिन हो गये थे, मां को बहुत सारा हो गया था, अब मां अपने आप बेठ जाती थी, लेकिन चल फ़िर नही पाती थी ओर मे ओर भाई काम मे इतने विजी थे की मां के लिये समय बहुत कम निकाल पाते थे,आज सारे काम दोपहर तक पुरे हो गये, भाई को बहुत अच्छा लगा की सभी काम प्रोगराम बना कर करो तो जल्द होते हे, ओर समय भी कम लगता हे,
आज हम दोनो भाईयो ने मां को फ़िर से दिन मे दो तीन बार थोडा चलवाया,लेकिन मुझे कोई खास फ़र्क नही लगा,क्योकि मां के दिल मे डर था कही गिर ना जाऊ,ओर फ़िर मेने देखा की मां पेर मोड कर रखती हे, तो मेने कहा मां पेर सीधा ओर पुरा पजां जमीन पर रखो गे तो जल्द चलो गी, ओर मेरी सलाह काम कर गई, ओर मां ने पेर का पंजा सीधा ओर पुरा पजां जमीन पर रखा ओर मां मे ज्यादा हिम्मत आई, फ़िर दोपहर का खाना खा कर हम सभी आराम करने लगे, मे सोया तो नही था लेकिन आंखे बन्द थी ओर सभी की बाते सुन रहा था, अब पडिंत जी को कया क्या देना हे, बिस्तर चारपाई, बरतन वगेरा वगेरा...ओर यह लिस्ट बडती ही जा रही थी, ओर मे चुप चाप सुन रहा था, कभी छाता याद आ जाता, तो कभी कुछ, मेने लेटे लेटे पुछा भाई एक ओरत का भी इन्तजाम कर लेना पडिंत जी के लिये तो सभी हंस पडे, फ़िर मेने सब से कुछ नही कहा,
बच्चो से मेरी रोजाना बात हो जाती थी, भारत मे उन दिनो बहुत गरमी थी, हा बरसात तो रोजाना होती थी, लेकिन गर्मी बहुत थी, ओर जहा मे सोता था, मेरे फ़ुफ़ा जी (पापा की उम्र के ) मेरे साथ ही सोते थे, जब मुझे गर्मी लगे तो मे कुलर चालऊ. जब कुलर चले तो फ़ुफ़ा जी को सर्दी लगे,अब मे सोऊ या फ़िर फ़ुफ़ा जी, लेकिन इस का हल भी निकाल लिया फ़ुफ़ा जी ने, वह चादर ले कर सो जाते ओर जब मेरी आंख लग जाती तो कुलर बन्द कर देते.
कल के लिये सारी तेयारी पुरी हो चुकी थी ओर सभी दोपहर की गर्मी से बचने के लिये अपने अपने कमरो मे लेटे थे, मे मां के पास अभी आया तो, एक छोटी बच्ची भागी भागी आई ओर बोली झाई जी झाई जी ( हम घर मे मां को इसी नाम से बुलाते हे ओर हमे देखा देखी सभी मां को ऎसे ही बुलाने लगे) वहा ना वीजी ( मेरी बडी मोसी जो ९० साल के करीब हे) से भरजाई लड रही हे, इतना सुनना था की मे बिना जुतो के भागा ओर मोसी को अपनी बांहो मे भर कर भाभी को दुर किया ओर मोसी को पुछा कहा जाना हे तो बोली मे दो दिन से तरस रही हू अपनी बहिन से मिलने को लेकिन यह मुझे मिलने नही दे रही, तो मेने कहा चलॊ मेरे साथ, कहा तो मोसी को उस स्थान से हमारे घर तक एक घन्टा लगता हे लेकिन उस दिन वह पाचं मिन्ट मे पहुच गई, ओर मेरे से बहुत सी बाते की फ़िर घर आ कर मां के पास बेठ गई ओर गर्व से ऎसे देख रही थी जेसे आज दुनिया जीत ली हो, दोनो बहने बहुत खुश थी, ओर उधर भाभी मुझे खुब गालिया बक रही होगी.
सारी बाते नही लिखुगा लेकिन भारत मे बुजुरगो का बहुत बुरा हाल हे, ओर मे मां को पक्का कर के आया हू मां पेसो को, सोने को ओर अपनी ज्यादद को सम्भाल कर रखना, जिस दिन तुम ने इसे खो दिया, हमारे नाम कर दिया वह दिन बहुत बुरा होगा, जब तक मां तेरी मुठी बन्द हे तब तक सभी तेरी देख भाल करे गे वरना ... मे भी दुर हू मजबुर हू बस मां अपने पेसे अपने पास रखना, मुठी मत खोलना, घर मे किसी चीज की कमी नही, ओर कभी भी तुम्हे मेरी जरुरत हो मे १२ घन्टो मे आप के चरणो मे हुगा, दो दिन पहले मुझे एक गुम नाम टिपण्णी आई थी ओर उस मे भी मेरे इन्ही हालात का जिक्र था, ओर मे धन्यावाद करता हु उन्हे, आप लोग भी मेरी कोई मदद या राय देना चाहे तो आप सब के लिये मेरे दिल के दरवाजे हमेशा खुले हे, आप चाहे अपने नाम के साथ या गुम नाम से आये आप सब का धन्यवाद
बाकी ......

7 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

सुबह से आपकी भारत यात्रा की प्रतीक्षा में था.. अब पढ़ रहा हू

शोभा said...

राज जी
रोचक लेख लिखा है।

mehek said...

aapne thik salah di hai apni maa ko,is baat se sehmat hun main aapse.

DR.ANURAG said...

जी राज जी ये बहुत बड़े दुःख की बात है की सुप्रेम कोर्ट को ये कानून देना पड़ा की हर बेटे को अपने बूढे माँ बाप की देखबाल करनी जरूरी है .आज से कुछ सल् पहले कोई सोच भी नही सकता था की इस कानून की भारत को आवश्यकता पड़ेगी....लेकिन आत्मनिर्भर हने के साथ साथ हम आत्मकेंद्रित भी होते जा रहे है.......उम्मीद है ...इस देश में कुछ चेतना दुबारा आये...

Udan Tashtari said...

जब तक मां तेरी मुठी बन्द हे तब तक सभी तेरी देख भाल करेगे वरना ...बहुत सही सलाह दी. दुनिया बहुत खराब है.

praney ! said...

Aap ki Bharat mein bujurgon ki sthiti wali baat bilkul theek hote hue bhi thodi chubhti hai (mere apne Bharat ke prati aseem prem ke karan :)

Mujhe lagta hai bujurgon ki sthiti to sari duniya main hi kharab hai, Bus itna hai ki videsh mein Old Age Homes aur pension ke karan un ka jeevan satr theek hai. Varash mein ek bar thanks giving ko shakal dikha bachhe un ka phone bhi kewal answering machine par he lena pasand karte hain. Bharat mein bhi jab acchi matra mein old age home (though I am against this trend)ban jayenge to halaat theek ho jayenge. Phir bhi acche aur bure bacche sab jaghon mein hain.

Aap ki, Maa ko muthi band rakhne wali salah purnta uchit hai. Audi ke jikr se chehre par muskaan aa gayee. kisi chota muhn badi baat ke liye kshama prarthana .

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का धन्यवाद, praney जी आप की बात ठीक हे, बुजुर्गो की स्थिति पुरी दुनिया मे खराब तो हे, लेकिन इतनी नही, बाकी भारत मे यह बात इस लिये चुभती हे कि हमारे जहां मां वाप अपना सब कुछ बच्चो पर नोछावर कर देते हे दिन रात मेहनत कर कर बच्चे को पढाते लिखाते हे,हमारे यहां मां वाप बच्चे को जितना प्यार देते हे विदेश् मे इस से बच्चे को इस का दसवा हिस्सा भी नही मिलता, विदेश मे तो बच्चे को सरकार पालती हे, तो बच्चे को प्यार कहा होगा मां वाप से, लेकिन हमारे यहा तो मां वाप जान तक देते हे बच्चे पर फ़िर वही बच्चा क्या करता हे, यह जग जाहिर हे,इस लिये अब मां वाप को पहले अपने बारे मे सोचना पडेगा, फ़िर बच्चो के बारे मे ??