09/07/08

तुम

यह गीत मेरे बच्चो की मां के नाम ,हमारी शादी कॊ २० साल हो गये हे मेने कभी भी अपनी वीवी से नही कहा जो शब्द सुनने मे बहुत प्यारा हे, लेकिन कहने मे बहुत मुस्किल हे,ना ही उस ने कहा हे,शायद कहने की जरुरत ही नही पडी.ओर हां इस गीत मे भी गीत कार ने वह शब्द नही बोला,लेकिन सब कुछ बोल दिया

तो चलिये इस गीत मे वह सब बाते हे जो जुबान मे नही ला पाता, तो आप से भी बाटंता हु,


6 comments:

अभिषेक ओझा said...

चाँद सी महबूबा हो मेरी... मुकेश की आवाज़ में दम है... बहुत खुबसूरत गाना है भाटिया जी.

advocate rashmi saurana said...

undar gaane ko sunane ke liye aabhar. jari rhe.

दिनेशराय द्विवेदी said...

गाना हम नहीं सुन पाए, मगर अभिषेक जी ने बताया तो जान गए। भाभी को ब्लाग के माध्यम से कहने के लिए बधाई। जरा भाभी की प्रतिक्रिया भी बता दीजिएगा।

अनुराग said...

kya bat hai raj ji ....kabhi kabhi aap bhi....

Lavanyam - Antarman said...

Are wah ...Geet jab itna madhur hai tub Bhabhiji kitni achchee hongeen ..ye samajh rahe hain ..Khush rahiye ..sanand rahiye ..
Regards,
- Lavanya

राज भाटिय़ा said...

लावण्यम् जी,ओझा जी, दिनेश जी, अनुराग जी ओर रेश्मी सुराणा जी आप सभी का धन्यवाद,आप सभी का स्नेह बना रहे,हमारी वीवी को पता ही नही था इस पोस्ट का आज सुबह जब लावण्यम् जी की टिपण्णी पढ रहा था, तो उन्हे यह पोस्ट दिखाई , बस फ़िर क्या था उन्होने दिल से एक गरमा गर्म चाय पिला दी. ओर मुस्कुरा दी.
धन्यवाद