नमस्ते, नमस्कार,सलाम
आप सब दोस्तो के नाम
आप सब खुश रहे ....
मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया
प्रस्त्तुकर्ता
राज भाटिय़ा
समय
18:52
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आप सब दोस्तो के नाम
आप सब खुश रहे ....
नाम समाप्त The End
मैं कहता हूं कि आप अपनी भाषा में बोलें, अपनी भाषा में लिखें।
उनको गरज होगी तो वे हमारी बात सुनेंगे। मैं अपनी बात अपनी भाषा में कहूंगा।*जिसको गरज होगी वह सुनेगा। आप इस प्रतिज्ञा के साथ काम करेंगे तो हिंदी भाषा का दर्जा बढ़ेगा।
महात्मा गांधी
अंग्रेजी का माध्यम भारतीयों की शिक्षा में सबसे बड़ा कठिन विघ्न है।...सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।"
महामना मदनमोहन मालवीय
6 आप की राय:
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, मन तो नही करता कि जाऊ क्योकि आप सब ने इतना प्यार दिया हे, लेकिन अब यहां कुछ अजीब सा लगता हे, इस लिये आज यह मेरी आखरी पोस्ट हे, वेसे मे आता रहुगा टिपण्णी के रुप मे.
कुछ समझ में नही आया ?
क्यों ऐसा राज जी अचानक ?
तमाम मसरूफियत के बावजूद कुछ वक़्त निकालिए.....हमे आपकी आदत पड़ चुकी है....
राज जी ऐसा क्यूं?
राज जी
अपने निर्णय पर पुनः विचार करे आप कृपया अपनी आखिरी पोस्ट न कहे . पढ़कर मुझे अच्छा फील नही हो रहा है .
समझ नहीं आया कि एक दम ऐसा फैसला कर लिया। इस रंग-बिरंगी दुनिया में तो हर क़दम पर अजीबो-गरीब हालात ललकार कर सामने आ जाते हैं, लेकिन वक़्त का सहारा लेकर सोचने से कुछ ना कुछ मिल ही जाता है। फ़िलहाल अभी नहीं, थोड़ा थोड़ा समय देकर कभी कभी लिखते रहा करिए। लिखने का जो इल्म क़ुदरत ने आपको बख़्शा है उससे मुंह ना मोड़िए। बस इतना ही कह पाऊंगा।
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