08/07/09

जब हम ने पहरे दारी की भाग १

यह मेरी पोस्ट बहुत पुरानी है, किसी कारण वंस उस समय पुरी नही दे पाया था, आज इस पर नजर पडी तो सोचा कि दोवारा से इसे ओर इस के अगले हिस्से को प्रकाशित करु, तो आज यह पुरानी पोस्ट कल इस से आगे....

बात बहुत ही पुरानी हे,हमारी नयी आवादी वाले इलाके मे चोरिया बहुत होने लगी थी, जब कि मुह्ल्ले वालो ने दो नेपाली चोकीदार भी रखे थे,लेकिन चोरिया रुकने का नाम ही नही ले रही थी, उस समय करीब सब मिला कर एक सों घर होगे पुरे इलाके मे, ओर सभी घर दुर दुर थे, ओर मुह्ल्ले वालो ने एक कमेटी बना रखी थी जहां सभी बाते बेठ कर सुलझाई जाती थी,ओर हर साल नये मेम्बर भी चुने जाते थे,

इस बार जब मीटिंग हुई तो मुहल्ले मे चोरियो पर बात हुई, ओर निश्चया हुआ की दोनो चोकी दार के साथ साथ मुहल्ले के भी दो दो लोग होगे, ओर सब मिला कर ६ आदमी हुये एक एक आदमी चोकी दार के साथ ओर दो मुहल्ले के आदमी इन दोनो से अलग तीनो ग्रुप हर एक घण्टे के बाद एक जगह मिले गे ओर कोई खतरा हो तो सभी एक खास इशारा करे गे, ओर अब मुहल्ले के चार आदमी जो रोजाना इन चोकी के साथ रहे गे वह कोन होगे ? इस का सीधा सा जबाब था, हर घर से बारी बारी से एक आदमी पहरा देगा.
अब जब यह शुरु हुया तो बडे लोगो को( जो हम से बडे थे उम्र मे )फ़िक्र हुयी,क्यो की कोई नोकरी पेशा था, कोई दुकान दार, तो कोई व्यापारी था,सभी घर मे आ कर बाते करने लगे अब यह केसे होगा, दुसरी तरफ़ सभी नोजवान खुश थे,सभी चाहते थे सारी रात की धीगां मस्ती, फ़िर सभी बडो ने फ़ेसला किया की सभी बच्चे जो सोलहा साल से उपर हे ,अपना नम्बर आने पर चोकी दारी कर सकते हे, इस के बाद सभी नोजवान अपनी अपनी बारी का इन्तजार करे, ओर सारी रात मस्ती करे दुसरे दिन सब हम उम्र बालो को बताये.
हमारे घर से थोडी सी दुरी पर एक प्रेस वाला था, ओर वो सभी से मुहं मागे पेसे लेता था, कारण बाकी चारो ओर कोई भी नही था प्रेस (कपडॆ प्रेस करने वाला) वाला, ओर वो हद से ज्यादा गुस्सा भी करता था,लेकिन था पक्का डरपोक.जुन का महीना था, तो एक दिन हमारे घर का भी नम्बर आया पहरे दारी करने का,हमारे सात ही तीन घर ओर भी थे,हम तो काफ़ी दिनो से इन्तजार मे थे इस दिन के पता करने पर बाकी तीनो घरो का भी पता चल गया, बाकी घरो मे भी हमारे से ३,४ साल बडे ओर हमारी उम्र के ही लोग भी थे, सभी ने घर वलो के बिना पुछे ही अपने अपने ग्रुप बना लिये, घर मे अब सभी सोच रहे थे कि पिता जी छुट्टी ले, जा मोसी के यहां से किसी को भेजे, तभी हम ने कहा हम जाये गे, तो सभी हमे देखने लगे फ़िर जब उन्हे पता चला की मेरे ग्रुप मे स्वामी हे( अब स्वामी रोहतक मेडिकल मे डाक्टर हे) तो सब ने हामी भरी ,क्योकी स्वामी की इज्जत सभी करते थे,वह एक मिशाल होता था हम सब के लिये,दुसरे ग्रुप मे एक सरदार जी का लडका ओर एक चोकी दार,तीसरे ग्रुप मे एक चोकी दार ओर एक हेड्मास्टर जी का लडका,सभी एक से बड कर एक.
क्रमश..
मेरी गलतियो को पर मेरा ध्यान जरुर दिलाये

16 comments:

  1. aapke rochak kisso ki lambi list hai... likhte rahiye, aage kya hua

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  2. एक गलती हो गयी आपसे..इतना रोमांचक किस्सा अधूरा ही छोड़ दिया...

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  3. आज रात तो हम भी पहरेदारी करेंगे कि कब अगला अंक आ रहा है, कहीं पढ़ने से चूक न जायें. :)

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  4. aji kahan jaa rahe hain..
    aap to bas likhte rahiye, ham sabhi ki yahi ichchha hai..

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  5. kissa poora kariye....intzaar hai.

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  6. अरे सर
    बीच में ही छोड़ दिया...
    रोमांचक किस्सा है बहुत...
    अगला भाग जल्द प्रकाशित करें

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  7. bhai hamaare saath toh dhokha ho gaya
    aur ghar baithe ho gaya.....

    itna anand aaraha thapadhne me ..
    aur aapne brek laga diya
    koi baat nahin ..hum bhi kabhi aisaa hi karenge..
    ha ha ha ha

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  8. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने ! मुझे बेहद पसंद आया!

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  9. कथा आगे बढ़ाई जाय। हम पूरा करके ही उठते हैं। बीच में छोड़ने पर पुण्य फल नहीं मिलता जी...।:)

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  10. हा हा हा हा हा फिर आगे क्या हुआ???????????

    regards

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  11. कुछ रोचक होने की संभावना और उत्सुकता बनी हुई है.

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  12. अरे वाह, क्या क्या किया चौकीदारी में?

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नमस्कार,आप सब का स्वागत हे, एक सुचना आप सब के लिये जिस पोस्ट पर आप टिपण्णी दे रहे हे, अगर यह पोस्ट चार दिन से ज्यादा पुरानी हे तो माडरेशन चालू हे, ओर इसे जल्द ही प्रकाशित किया जायेगा,नयी पोस्ट पर कोई माडरेशन नही हे, आप का धन्यवाद टिपण्णी देने के लिये