07/05/08

चटपटी चाटोरी खिचडी

नमस्कार,नमस्ते,सलाम. भाई आप लोगो ने खिचडी नाम सुन कर जरुर अजीब सा मुहं बना लिया होगा, क्योकि इस तरह का खाना तो हम जब बिमार होते हे तब खाते हे ना, सच मे बडा बेस्वाद होता हे खिचडी का खाना, तो फ़िर बताये क्यो जा रहे हो आप खिचडी के बारे मे ?
बात ऎसी हे कि एक बार मे इस्कोन (हरे रामा हरे कृष्णा ) वालो के मन्दिर मे गया तो एक गोरा कुछ बना रहा था, उसे देख कर मुझे दिल मे हंसी आई, मेने उस से पुछा आप यह कया बना रहे हे, तो उस ने कहा खिचडी, मेने कहा तुम्हे आती हे क्या खिचडी बनानी, पर यह खिचडी नही कुछ ओर ही हे, तो उसने कहा, यह खिचडी ही हे. अब मेने उस बात पर गोर नही किया, लेकिन अपनी वीवी से जरुर कहा यह गोरा जो खिचडी बना रहा हे उसे ज्यादा मत लेना, क्योकि वो जब बना रहा था तो मेने देखा, बिलकुल बेकार, लेकिन यह लोग परसाद अगर खिचडी का दे तो एक आध चम्मच ही लेना.
जब हम ने एक चम्मच के करीब खिचडी ली तो मानो गे नही झट से सब ने अपनी अपनी थाली ले ली ओर भर पेट खिचडी खाई, ओर फ़िर भारत मे जब खिचडी का नाम लिया की आज सब को खिचडी मिले गी तो मेरी मां ने ही कहा बेटा सब ठीक हे कोइ नही खाये गा तुम्हारी खिचडी को, ओर मेरी वीवी ने दो पतिले खिचडी बनाई उस के वाव्जुद सभी बार बार मागं रहे थे,ओर एक चम्मच भी नही बची खिचडी.हम यहां जब परोथे खाते तो उस दिन खिचडी खाते हे, तो आज आप को भी इस चटपटी चाटोरी खिचडी बनानी सिखाते हे. जब कभी दिल हो बनाये खाये, फ़िर हमे याद करे, इस खिचडी मे सभी पोष्टिक तत्व हे,विटमिन हे, ओर बनाने मे कोई ज्यादा काम नही, बनती भी झट पट हे.
तो बताऊ.
.
.
चार आदमियो के लिये...
समाग्री
एक काटोरी चावल
एक काटोरी दाल ( मुगं की साबुत या धुली हुई कोई सी भी )
एक प्याज, नमक , मिर्च लाल, गर्म मसाला, हल्दी स्वाद अनुसार
ओर हरी सब्जिया, एक गाजर, एक छोटा सा टुकडा घीया कद्दु, सीता फ़ल, शिमला मिर्च,बन्द गोभी, फ़ुल गोभी,टमाटर,बेंगन, जिमी कन्द,एक आधा आलू ,बराकोली, ओर जो भी सब्जी मिले सभी के थोडे थोडॆ टुकडे लेकिन छोटे छोटे कर के , ओर साथ मे एक दो कली लहसन की.( जितनी सब्जिया होगी उतनी ही स्वदिस्ट बने गी )
बिधि..
सब को एक कुकर मे मिला कर डाल दे ओर पानी अपने हिसाब से डाल दे, ओर एक, दो शीटी बजने पर उतार ले, थोडी देर कुकर को वेसे ही पडा रहने दे, फ़िर एक बर्तन मे थोडा देशी घी डाल कर उसे गर्म कर ले फ़िर उस मे थोडा सा ( स्वाद अनुसार) जीरा भुन ले जब जीरा तड तड करे तो उसे खिचडी के उपर डाल दे ओर खिचडी को अच्छी तरह से हिला कर प्लेटो मे डाल दे गर्मा गर्म फ़िर धीरे धीरे इसे ठ्ण्डा कर के खाये,

10 comments:

Poonam said...

राजजी खिचडी पोस्ट का लुत्फ उठाया और कभी आपकी दी हुई विधि से खिचडी बनाकर उसका भी लुत्फ उठाएंगे!हमारे घर में हर इतवार की रात खिचडी बनती थी.पापा का कहना था कि हफ्ते में एक शाम पेट को और मम्मी दोनों को आराम चाहिये .आलू का चोखा,पापड ,अचार और बहुत सा देसी घी .आपकी पोस्ट ने नोस्टाल्जिक कर दिया.

अभिषेक ओझा said...

आप खाना बनाने का भी शौक रखते हैं? ये तो बहुत अच्छी बात है... अब आगे से खाना बनाना भी सिखने को मिलने वाला है आपके ब्लॉग पर.

Gyandutt Pandey said...

वाह, ब्लॉग नये डायमेंशन ले रहा है!

अजित वडनेरकर said...

खिचड़ी हमारी पसंदीदा डिश है। आपके वाले तरीके से भी अक्सर बना कर खाई है। बस , घीया कभी नहीं डाला :)

Kirtish Bhatt, Cartoonist said...

जी.... खिचडी का नाम पढ़कर आपके ब्लॉग पर चला आया. हमें तो बहुत भाती है. वैसे बनने में ज्यादा चोचले नही करने पढ़ते इसलिए अकेले रहते थे तो अक्सर इसी से काम चलता था.

रोचक और स्वादिष्ट पोस्ट :)

mamta said...

वैसे भी प्रसाद कि खिचिडी तो स्वादिष्ट ही होती है।

खिचिडी तो हमारा पसंदीदा खाना है। इसकी दो वजह है एक तो ये बनाने मे आसान और दूसरे हमारे बड़े बेटे यूं तो दाल से परहेज रखते है पर खिचिडी उन्हें बहुत पसंद है। इसलिए जब तब हमारे घर मे खिचिडी बनती है।

Udan Tashtari said...

खिचड़ी तो प्लेन वाली को कहते हैं, इसे हमारे यहाँ तहरी कहा जाता है.

आपके बताये अनुसार बना कर देखते हैं. :)

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

वैसे आपने खिचडी को बेस्वाद कहकर तो दिल हो तोड़ दिया था.. लेकिन आगे जो आपने लिखा उससे मन खुश हो गया.. वैसे हमारे लिए खिचडी तो लगभग रोज का ही भोजन है.. सस्ता, समय बचाऊ और पोष्टिक

DR.ANURAG ARYA said...

आपने तो दल रोटी चावल वाले ब्लॉग वालो को नाराज कर दिया होगा इस खिचडी वाले लेख से ...बचपन मे हम भी नक्चाडे थे ओर खिच्री के नम पे मुंह बिसोरा करते थे ,पर होस्टल के भूखे पेट ने सब कुछ खाना सिखा दिया....अब मूंग की दाल की खिचरी बड़े शौंक से खाते है.......

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, पुनम जी बात बिलकुल सही हे, ममता जी आप की बात उचित हे. हमारे घर मे मे ओर मेरे बेटे दाल ओर चावल बिलकुल नही पसंद करते, लेकिन खिचडी मे हम सब खा जाते हे, अभिषेक भाई मुझे तो चाय भी नही बनानी आती,जब भी खाना बनाया किसी ने भी नही खाया ,समीर जी पलेन वाले कब से खिचडी देने लगे ? :) :)बाकी खिचडी एक ऎसा खाना हे जो सब के लिये हे, जल्दी बनती हे सस्ती हे ओर पोस्टिक भी, अभी पता नही मन मोहनी सरकार मे खिचडी भी महंगी ना हो गई हो.
ग्यान जी अजित जी,भट जी आप सभी का भी धन्यवाद,अनुराग जी आप ने भी खुब कही मजा आ गया.