05/05/08

पता नही कोन किस रुप मे मिल जाये (अन्तिम )

क्रमश से आगे..
तभी पुलिस का नाम सुन कर उस लडके की मां भाग गई, तो सब बडो ने उस लडके से प्यार से सारी बात पुछी तो लडके ने कहा की वह अपनी मां के कहने पर ही चोरिया करता हे,ओर अगर चोरी नही करता तो मां उसे मारती हे ओर भुखा रखती हे, फ़िर मेने उस से काफ़ी बाते की, ओर उसे खाना वगेरा भी खिलाया, ओर उसे सम्झाया देखो तुम कितने लोगो की बददुया लेते हे, ओर मार भी खाते हो किस लिये, ओर अब तुम्हारी मां भी भाग गई हे, तुम्हे अकेला छोड कर, अगर तुम पढ नही सकते तो कोई काम कर लो इस गन्दी जिन्दगी से तो निकल जाओ गे,तब उसने बताया कि यह उस की मां नही इस ओरत ने ओर भी बहुत बच्चो को ऎसे ही फ़सा रखा हे,यह हमे डर दिखा कर चोरिया करवाती हे, ओर पकडे जाने पर मां बन कर ओर लोगो को धमकिया दे कर हमे छुडा लेती हे.
ऎसी ही ओर बाते उस लडके ने बताई तो सब की आखंए खुली रह गई, ओर उस पर तरस भी आया लेकिन करे तो कया करे उसे अपना घर भी मालुम नही था, फ़िर उसे पुलिस मे देना ही उचित समझा ओर उसे पास के थाने मे ले गये, जब दुसरे दिन एक सिपाही ने हमे बुलाया कि आप लोग अपना समान पहचान लो जो जो समान जिन का चोरी हुया हे,पुलिस ने एक बडे गिरोह को पकडा जिस की लीडर वह स्त्री थी ओर जो समान उन से खरीद ते थे उन्हे भी पकडा,वहा जाने पर उस लडके का हाल बहुत बुरा था लगता था उसे बुरी तरह पीटा गया था, बहुत सा समान मिला भी नही था, जिस मे मेरे कपडे भी थे, लेकिन उस लडके ने बताया की वह कपडे उसी ने चुरा कर उस ओरत को दे दिये थे,ओर आगे उसे नही पता. मुझे बहुत तरस आ रहा था उस लडके पर.
फ़िर हम घर आ गये, काफ़ी दिनो बाद मुझे एक सम्मन आया अदलत से गवाही देने के लिये, ओर सभी ने मेरा नाम ही लिखवाया था, गवाही वाले दिन मुझे थाने दार ने ओर एक वकील ने बहुत समझाया की तुम ने सिर्फ़ यह ही बोलना हे, बाकी कुछ नही बोलना, मे काफ़ी डरा हुया था, मेरा नाम पुकारा गया, ओर वो लडका मेरे सामने खडा था, ओर जज या वहा बेठे आदमी ने मुझे कसम खाने को बोला मेने कसम खा ली, फ़िर बोले इस को कहीं देखा हे मेने कहा जी इसे ही तो मेने पकडा था,एक वकील बोला जितना पुछा जाये उतना ही जबाब दो मे बहुत घबरा गया था, तो मेने कहा मे जितना जानता हू बताता हू मुझे बार बार नर्बस मत करो, जज ने कुछ इशारा किया ओर वकील चुप हो गया.
तो जज ने कहा बोलो अब आराम से बोलो डरो मत तुम्हे कोई भी कुछ नही कहे गा, फ़िर मेने सारी बात जज को बता दि की इस की पिटाई भी पहले लोगो ने फ़िर पुलिस ने भी की, एक दो बार वकील ने बोलने की कोशिश की लेकिन जज ने मेरी सारी बात सुन कर मुझे जाने दिया.
अब तक मे अपने कपडे भुल गया था ओर उस लडके से बहुत सहानुभुति थी, लेकिन मे कुछ कर नही सकता था,ओर फ़िर पता नही उस के साथ कया हुया, लेकिन मुझे कभी कभी डर भी लगता था कही अचानक अपने साथियो के साथ मुझे मारने ना आ जाये, ओर फ़िर धीरे धीरे इस बात को भुल गया. ओर अचानक १०, १५ साल के वाद वही लडका मिला तो सच मे मे उस की बात सुन कर डर सा गया था कि कही चाकु वगेरा न मार दे,
लेकिन फ़िर लडके ने बताया उसे बाल सुधार घर मे भेज दिया था, जब की पुलिस उसे जेल भिजवाना चाह्ती थी, लेकिन मेरे व्याण ने सब बदल दिया फ़िर दो साल के बाद उस ने कई जगह काम किया लेकिन ईमान दारी से , ओर अब वो रिकक्षा चलाता हे उस ने शादी कर ली हे ओर अपने लडके को स्कुळ मे डाल हे, ओर उस की नकली मां को पुलिस ने बचा लिया था, लेकिन वह मेरा ओर मेरी मां द्वारा किया व्यावाहर नही भुला था, उस ने कहा सभी ने उसे मारा ही था किसी ने प्यार से नही दुलारा प्यार से नही समझाया था, जिन्दगी मे सब से पहले जब से होश समभाला सिर्फ़ आप के घर से प्यार मिला, चाहे दो पल का,ओर मे उसे देखता ही रह गया, ओर वह अपने हर जानने पहचाने वाले कॊ हम से मिला कर बहुत खुश नजर आ रहा था, फ़िर मेने उसे घर आने के लिये कहा, ओर साथ ही कहा अब मत डरो वहां तुम्हे कोई नही पहचाने गा,ओर उस से बिछडते समय मेरी आखंऒ मे भी आसूं आगये थे.

11 comments:

lovely kumari said...

dil ko chhu lene wali dastan thi.

PD said...

बहुत ही बढिया.. दिल को छू लेने वाली मार्मिक कहानी थी.. सबसे बड़ी बात सच्ची कहानी थी..

mehek said...

bahut hi badhiya,ek chota sa bayan kisiki zindagi sawar gaya,dil ko chu liya is kahani ne,bahut badhai,sahi kaun kahan kaise mile pata nahi.

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

अच्छा हुआ आपने ये घटना यहा शेयर की.. हो सकता है इस से कई लोगो को कुछ सीख मिले..

mamta said...

दिल को छू गई ।
इसीलिए कहते है कि इंसान के रूप मे फ़रिश्ते होते है।

अभिषेक ओझा said...

बहुत अच्छी दास्ताँ बांटी आपने... धन्यवाद !

Gyandutt Pandey said...

वाह, आपकी मानवता और दबाव में भी सच पर कायम रहने को साधुवाद। ऐसे का नतीजा अंतत: सुखद होता है।

शोभा said...

राज जी,
बहुत भाव भरा संस्मरण है। जीवन में ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो सारा जीवन ही बदल देती हैं । अति सुन्दर।

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया संस्मरण रहा.

राज भाटिय़ा said...

आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद.

तपेश said...

आप का साइट देखा । आप भी संपादक हैं । अच्छा लगा । इन दिनों हर कोई इंटरनेट पर संपादक है पर आपका चयन अच्छा है ।

आपको गंभीर साहित्य के लिए बाजारू साइट के अलावा सृजनगाथा भी पढ़ना चाहिए । आपको लाभ ही होगा ।...

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