13/04/08

चिंतन क्रोधाग्नि

आज का विचार.. हम कई बार क्रोध मे बहुत कुछ बोल जाते हे, बहुत कुछ ऎसा कर जाते हे जिस के बारे हम सोच भी नही सकते, यदि हम कुछ पल मोन रहे ओर विचार करे तो कितना नुकसान होने से बच सकता हे हमारा..इसी क्रोध पर आज का विचार
एक बार ज्ञानदेव महाराज को क्रोध आ गया तो उनकी बहन मुक्ताई ने कहा, ज्ञानेश्वर महाराज, आप अपना क्रोध कम कीजिए।ओर विचार करे.
उन्होंने कहा, यदि दुनिया आग-बबूला हो उठे तो संतों को चाहिए की स्वयं पानी बन जायें।
अग्नि को पानी बुझा देता है। अगर पानी में आग डाल दे तो क्या वह पानी को जला देगी या खुद बुझ जायेगी? संतों का स्वभाव भी ऐसा होना चाहिए। कोई कितना ही क्रोधित क्यों न हो, उन्हें शांत रहना चाहिए।
यहां संत साधु को नही हम सब को कहा गया हे, क्यो कि आदमी संत स्वभाब वाला ही माना जाता हे.

8 comments:

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

बिलकुल सही बात है, क्रोध मनुष्य के पतन का कारण है

praney ! said...

Woh log bahut bhagyashali hoten hain jo apne krodh par niyantran rakh paten hai.

Mera sath yesa anekon bar hua hai ki main ati krodh main bol jata hoon aur bad main apne he shabdon par dukh hota hai.

aur yese bhi log mere jeevan mein hain jo apne krodh turant pee jaten hain.

I always try to learn from them .

mehek said...

bilkul saufisadi sahi khari baat kahi.bahut achha laga.krodh hi vinash ka kaaran hota hai.

कुन्नू सिंह said...

बीलकुल सही कहा

mahendra mishra said...

मैं सुनील जी के विचारो से सहमत हूँ . क्रोध विनाश का कारण बन जाता है इसीलिए इंसान को अधिक क्रोध से बचना चाहिए . धर्म शास्त्र भी यही कहते आये है . धन्यवाद

दिनेशराय द्विवेदी said...

क्रोध पाप का मूल है। महाभारत में शर्मिष्ठा और देवयानी की कथा इसी पर है। उसे लिख डालिए।

अल्पना वर्मा said...

बिल्कुल सही कहा मगर क्रोध पर काबू करना बहुत मुश्किल है--लेकिन कोशिश तो जरुर करनी चाहिये.क्रोध ही मनुष्य सब से बड़ा दुश्मन है.

राज भाटिय़ा said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.