30/04/08

मोत से चार आंखे

कभी कभी सच मे आदमी के बिलकुल समाने मोत खडी होती हे, फ़िर पता नही कोन सी शक्ति उसे मोत के मुहं से बचा लेती हे, या फ़िर मोत ही दया कर जाती हे,
बात हे ७ अप्रेल की हे, शायाद पहला नबरात्रा था, मे मेरी वीवी ओर मेरा छोटा बेटा घर से निकले (बेटे के दातं Dr. को दिखाने थे, ओर Dr. हमारे घर हे १६,१७ KM दुर हे ) मे जब कार मे बेठा तो मेने कहा आखरी बार बेठो इस कार , तभी मुझे कुछ याद आया ओर मेने झट से कहा, कल यह कार खरीदने वाला ले जायेगा,सच मे मेने पुरानी कार बेच दी थी, लेकिन पता नही क्यो चलने के वक्त मुझे कुछ अजीब सा लगा, लेकिन मे बहमी नही इस लिये चल पडा, दिल भी थोडा उदास था, जिसे १० साल चलाया कल चली जायेगी,लेकिन नयी कार की खुशी भी थी.
हम आपिस मे बाते करते हुये जा रहे थे, एक दो गाव रास्ते मे आये कभी रफ़्तार कम कभी तेज, घर से करीब १० कि मी की दुरी पर एक गाव आया अभी मे इस गाव से करीब एक किमी की दुरी पर था, स्पीड १०० किमी कि थी मेने रेस से पेर हटा लिया,( मे बरेको ओर रेस को जरुरत के हिसाब से ही प्रयोग करता हु, जिस के कारण पेट्रोल कम लगता हे ) मेरे पीछे ४,५ कारे थी,ओर सामने से आने वाली दाहनि ओर भी काफ़ी कारे थी,अचानक सामने से आने वाली कारो की लाईन मे से एक कार अपने से आगे वाली कार को ओवर टेक करने के लिये बाहिर निकली, जो मेरे से करीब ५० मी की दुरी पर थी, इस समय मेरी स्पीड १०० किमी के करीब थी, ओर सामने वाली कार की स्पीड भी इतनी ही होगी,अचानक सामने आई कार को देख कर मुझे कोई भी भगवान याद नही आया, बस बचने के लिये मेने कार को जितना भी राईट साईड मे कर सका किया ओर साथ मे ब्रेक भी धीरे धीरे लगा दिये ताकि पिछे वाला कही पीछे से ही ना मार दे, सामने वाले ने भी (जिसे यह बेब्कुफ़ ओबरटेक कर रहा था,) अपनी कार कॊ अपनी राईट साईड मे किया,ओर वह कार हमारे बीच से निकल कर तेजी से चली गई, काफ़ी समय तक मेरे बेटे ओर वीवी कॊ अपने आप पर यकिन नही आ रहा था,ओर मे अपने भगवान का धन्यवाद कर रहा था, मेरे जीवन यह पहला केस था,सभी कारे रुक गई थी, फ़िर थोडा समन्या होने पर मेने कार आगे बढाई,
ओर एक सप्ताह बाद मेरी पुरानी कार मुझ से बिछुड गई,लेकिन जाते जाते अपनी याद मुझे दे गई.
अगर आप भी ड्राईविग करते हे तो ध्यान से, चले कभी भी गलत ओवरटेक मत करे

8 comments:

Udan Tashtari said...

ईश्वर का लाख लाख शुक्र है, सब सही सलामत है. हमारी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं हमेशा.

दिनेशराय द्विवेदी said...

तेज गति में ओवरटेक के कारण बहुत दुर्घटनाएं होती हैं, आप की छठी सेंस (मनुष्य की तुरन्त प्रतिक्रिया करने की शक्ति) ने आप को बचा लिया।
शुभकामनाएं।

mehek said...

jinko rakhein ishwar,mar sake na koi,bahut dil dehlane wla drush tha,glad u all were fine.kabhi kabhi maut ko karib se dekhne ke baad zindagi ki ehmiyat samjh aati hai,hum to hafte mein 2 ya 3 dardnak mautein dekh lete hai,ab aadat si pad gayi hai maut ko dekh ne ki,maut se ladhne ki nakam koshish kisi zindagi ko bachane ke liye,magar medical dield bhi har jata hai kabhi kabhi.

rakhshanda said...

खुदा का लाख लाख शुक्र है की आप सही सलामत रहे,आगे के लिए भी हमेशा careful रहें,आपस की ग़लतफहमी कितने बड़े हादसे का सबब बन सकती है.

DR.ANURAG ARYA said...

एक बार हरियाणा हाय वे पे जी टी रोड पे हम भी एक दुर्घटना से बचे थे ...तब याद आया की पिता जी ने बचपन मे कहा था ख़ुद को कितना ही बड़ा drivar समझो सामने वाला बेवकूफ हो सकता है......

praney ! said...

Your post reminds me of a similar incident in "like the flowing river' by Paulo Coelho.

(As others have advised you, why should i stay behind) I would remind you of old saying, Kabhi Kabhi Jivha par Ma Saraswati virajmaan hoti hai isleyee sadda soch kar bolen :)

कुन्नू सिंह said...

पहली तारिख है भई आज पहली तारीख है
टिप्पणी करो आज क्यो की पहली तारीख है

बहुत सुनदर और सांत लेख - अच्छा लगा पढ के(बहुत अच्छा)

राज भाटिय़ा said...

आप सब लोगो की चाहत ले आई उस जगह से वापिस, आप सब का प्यार ओर दुया चहिये,धन्यवाद